अनुप्रिया पटेल के शपथ लेते ही अपना दल' का झगड़ा उजागर, सांसद हरिवंश बोले-पार्टी से राय नहीं ली गई

अनुप्रिया पटेल के शपथ लेते ही अपना दल' का झगड़ा उजागर, सांसद हरिवंश बोले-पार्टी से राय नहीं ली गई

अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से सांसद हैं।

खास बातें

  • अनुप्रिया को एक साल पहले पार्टी से निष्‍कासित किया गया है : हरिवंश
  • कहा-बीजेपी ने इस बारे में पार्टी अध्‍यक्ष कृष्‍णा पटेल को खबर तक नहीं दी
  • अनुप्रिया का जवाब, 'हरिवंश की महत्वाकांक्षा बढ़ गई है थोड़ा धैर्य रखें'
नई दिल्ली:

अपना दल की अनुप्रिया पटेल मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार में राज्य मंत्री बन गई, लेकिन उनकी ही पार्टी के दूसरे सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने दावा किया कि बीजेपी ने इस बारे में उनकी पार्टी से राय नहीं ली। यही नहीं, हरिवंश सिंह की मानें तो अपना दल ने अनुप्रिया पटेल को एक साल पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

मिर्ज़ापुर से अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल ने शपथ ली और पार्टी में विवाद शुरू हो गया। पार्टी के दूसरे सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने इसे 'पीठ पर छुरा घोंपने' की कार्रवाई करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने इस बारे में पार्टी अध्यक्ष कृष्णा पटेल को ख़बर तक नहीं दी। प्रतापगढ़ से पार्टी के सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने कहा कि हम NDA परिवार के सदस्य हैं लेकिन पार्टी अध्यक्ष कृष्णा पटेल की राय लेने की बात तो दूर, उन्हें फोन तक नही किया गया। क्या परिवार में ऐसा होता है।

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 कुंवर हरिवंश सिंह अपने साथ वह चिट्ठी भी लेकर आए जिसके मुताबिक साल भर पहले ही अनुप्रिया पटेल को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और निर्वाचन आयोग तक को इस बारे में कृष्णा पटेल की ओर से चिट्ठी लिखी गई है। हरिवंश ने कहा कि अपना दल की पार्टी अध्यक्ष इसे पीठ में छुरा घोंपने वाली कार्रवाई कह रही है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इन आरोपों से पूरी तरह इनकार किया। अनुप्रिया के मुताबिक आज वे जो कुछ भी हैं, अपने पिता के त्याग और मां के आशीर्वाद की वजह से हैं। यही नहीं, उन्होंने उल्टे हरिवंश सिंह पर आरोप मढ़ दिया। केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि हरिवंश दो साल पहले पार्टी में शामिल हुए हैं। उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा ज्यादा हो गई है। ये गलत नही है लेकिन थोड़ा धैर्य रखें। अनुप्रिया कुछ भी दावा करें लेकिन ये हकीकत है कि अपना दल में कुर्मी वोटों को लेकर फूट तो पड़ ही चुकी है।