जयललिता की हालत इतनी ठीक थी कि उन्होंने कहा 'यहां इन्चार्ज मैं हूं' : अपोलो अस्पताल

जयललिता की हालत इतनी ठीक थी कि उन्होंने कहा 'यहां इन्चार्ज मैं हूं' : अपोलो अस्पताल

पिछले साल दिसंबर के महीने में जयललिता का निधन हो गया था

खास बातें

  • जयललिता के निधन को लेकर संशय को अपोलो अस्पताल ने दूर किया
  • अपोलो अस्पताल ने कहा कि अचानक उनकी हालत खराब हुई थी
  • जयललिता को कार्डियक अरेस्ट आया था जिसके बाद उनका निधन हुआ
चेन्नई:

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के पीछे की वजहों को साफ करने के लिए चेन्नई के अपोलो अस्पताल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया है. डॉक्टरों ने जानकारी दी है कि जयललिता की मौत गंभीर इंफेक्शन से हुई थी और उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था.

जयललिता के निधन को लेकर फैल रही अफवाहों को शांत करने के लिए इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आयोजित किया गया जिसमें डॉक्टरों ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट आने के एक हफ्ते पहले तक जयललिता इशारों से बात करने लगी थीं और अपनी बात समझाने की कोशिश भी करने लगी थीं. अंतिम हफ्तों में उन्हें देखने आए ब्रिटिश डॉक्टर रिचर्ड बेल ने कहा कि 'उनके अंगों में इन्फेक्शन हो गया था जिसकी वजह से उनका निधन हुआ.'

डॉक्टरों का कहना है कि तीन महीने अस्पताल में रहने के बाद 5 दिसंबर को जयललिता को अचानक कार्डियक अरेस्ट आया. उनकी इस हालत का किसी को अंदाज़ा नहीं था. डॉ बेल का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था. शुरूआती इन्फेक्शन के बाद उनकी की हालत सुधर रही थी, वह होश में थी और इशारों में बात भी कर रही थीं. डॉ बेल ने कहा कि उनकी हालत इतनी ठीक थी कि जब मैंने उनसे कहा कि मैं यहां का इन्चार्ज हूं तो उन्होंने कहा 'नहीं, इन्चार्ज मैं हूं.'

बता दें कि जयललिता के अस्पताल में रहने के दौरान उनकी असल हालत को लेकर काफी कयास लगाए जा रहे थे. विरोधी पार्टियों समेत कई लोगों ने ऐसे आरोप लगाए गए कि जयललिता की असल हालत लोगों को बताई नहीं जा रही है. यह आरोप इसलिए भी लग रहे थे क्योंकि शशिकला समेत कुछ ही लोगों को जयललिता से मिलने की अनुमति थी. इसके अलावा दस्तावेज़ों पर लिए गए जयललिता के अंगूठे के निशान ने भी लोगों के मन में उनके जीवित रहने, न रहने को लेकर शक पैदा कर दिया था. डीएमके ने यह भी कहा कि जयललिता की हालत अगर ठीक है तो उनकी एक तस्वीर खींचकर क्यों न जनता को दिखाई जाए. इन सवालों का जवाब देते हुए डॉक्टरों ने ज़ोर देते हुए कहा कि 'जो लोग बीमार होते हैं, उनकी तस्वीर लेना उचित नहीं है, इसे दख़लअंदाज़ी कहा जाता है.'

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