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अरावली में निर्माण मामले पर SC ने हरियाणा से कहा: आप सुप्रीम नहीं हैं, ऐसी हिमाकत करेंगे तो अवमानना चलेगा

अरावली में निर्माण को मंज़ूरी के मामले में हरियाणा सरकार को चेताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेशों के खिलाफ नया कानून लागू करने की कोशिश ना करें.

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अरावली में निर्माण मामले पर SC ने हरियाणा से कहा: आप सुप्रीम नहीं हैं, ऐसी हिमाकत करेंगे तो अवमानना चलेगा

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

अरावली में निर्माण को मंज़ूरी के मामले में हरियाणा सरकार को चेताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेशों के खिलाफ नया कानून लागू करने की कोशिश ना करें. अगर ऐसी हिमाकत करेंगे, तो आपके खिलाफ अवमानना का मामला चलेगा. जस्टिस अरुण मिश्र की अगुआई वाली बेंच ने हरियाणा सरकार को कहा कि आप सुप्रीम नहीं हैं. कानून का शासन ही सर्वोपरि है. दरअसल, इस कानून के ज़रिए हरियाणा सरकार अरावली और नीलगिरी की पहाड़ियों में वन नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माण को मान्यता देने का रास्ता साफ कर रही है.

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मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस नए कानून के जरिए आप अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम जानते है कि हरियाणा सरकार की क्या मंशा है. लेकिन कोई भी कानून से ऊपर नही हो सकता है. यह गम्भीर मामला है. 


इससे पहले हरियाणा सरकार के कदम से हरियाणा में अरावली और शिवालिक की पहाडियों में पेड़ भी काटने और भवन निर्माण भी होने का रास्ता साफ हो गया था. हरियाणा विधानसभा में बुधवार को विपक्ष के विरोध के बावजूद पंजाब भूमि परिरक्षण अधिनियम-1900 में संशोधन किया गया और इस संबंध में संशोधन विधेयक-2019 को पारित कर दिया गया. हरियाणा विधानसभा में भूमि परिरक्षण अधिनियम संशोधन विधेयक पारित किया गया. 

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इसके तहत अधिनियम की धारा, 2,3,4 और 5 में बदलाव किया गया है. इससे हरियाणा की अरावली और शिवालिक की पहाड़ियों से लगते क्षेत्रों में अब तक प्रतिबंधित निर्माण और पेड़ कटाई के रास्ते खुल जाएंगे. राज्य के वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने विधानसभा में यह संशोधन विधेयक रखा. विधेयक का कांग्रेस और इनेलो के विधायकों ने पुरजोर विरोध किया, लेकिन इसे दरकिनार कर सत्‍ताधारी धारी दल भाजपा ने इसे पारित करा लिया.

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विधेयक का विरोध करते हुए इनेलो विधायक परमिंद्र सिंह ढुल ने कहा कि इससे अरावली की हरियाली नष्ट हो जाएगी. इससे रेगीस्तान की तरफ से आने वाली धूल भरी आंधियों से दिल्ली सहित गुरुग्राम, फरीदाबाद और नोएडा का बचाव करना मुश्किल हो जाएगा. बेशक राज्य सरकार ने यह संशोधन विधेयक फरीदाबाद के कांत एन्क्लेव को राहत दिलाने के परिदृश्य में सदन में रखा मगर अब इसके प्रस्ताव से फरीदाबाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के सेक्टर-21 सी पार्ट तीन सहित 44,45 और 46 के उन आवंटियों को भी राहत मिल गई. ये आवंटी प्लाट आवंटन के बावजूद प्रतिबंधित वन क्षेत्र के दायरे में आने के कारण रिहायशी सुविधा से वंचित थे.

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इतना ही नहीं फरीदाबाद और गुरुग्राम सहित अन्य वन क्षेत्रों के तहत प्रतिबंधित मार्गों पर जमीन के भाव संशोधन विधेयक का प्रारूप तैयार करने के बाद से ही बढ़ने लगे हैं. मंदी के दौर में भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में जमकर खरीद-फरोख्त हो रही है. 



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