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Exclusive: महाराष्ट्र अरहर खरीद घोटाला- टोकन में गड़बड़ी कर रहे हैं व्यापारी, अधिकारियों की मिलीभगत से बेच रहे हैं अपना माल

इस साल देश में अरहर की बम्पर फसल हुई है. देश के कुल अरहर उत्पाद में से सर्वाधिक 20 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का रिकॉर्ड उत्पादन महाराष्ट्र में हुआ है, जिस से राज्य सरकार के सामने किसानों का उत्पाद सही समय पर खरीदने की एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है. 

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Exclusive: महाराष्ट्र अरहर खरीद घोटाला- टोकन में गड़बड़ी कर रहे हैं व्यापारी, अधिकारियों की मिलीभगत से बेच रहे हैं अपना माल

आढ़ती और सरकारी अधिकारी मिलकर अरहर खरीद में किसानों और सरकार को चूना लगा रहे हैं

खास बातें

  1. किसान को मिले टोकन में संख्या बदल कर की जा रही है गड़बड़ी
  2. एक ही टोकन का सरकारी खरीद केंद्र पर हो रहा है कई बार इस्तेमाल
  3. व्यापारी 1 क्विंटल अरहर पर कमा रहे हैं 2 हजार रुपये तक का मुनाफा
मुंबई:

इस साल देश में अरहर की बम्पर फसल हुई है. देश के कुल अरहर उत्पाद में से सर्वाधिक 20 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का रिकॉर्ड उत्पादन महाराष्ट्र में हुआ है, जिस से राज्य सरकार के सामने किसानों का उत्पाद सही समय पर खरीदने की एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है. 

सरकार ने अरहर का एमएसपी 5050 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है और राज्य में अरहर की खरीद सरकारी एजेंसी नैफेड के जरिए की जा रही है. यह कीमत अबतक की सबसे ज्यादा बताई जा रही है. खास बात यह है कि अरहर की इस बढ़ती कीमत का फायदा किसानों को नहीं बल्कि कारोबारियों को हो रहा है. व्यापारी अपने स्टॉक में मौजूद अरहर सरकार के मत्थे मढ़ कर मुनाफ़ा कमाने की जुगत में दिख रहे हैं. यह सारा खेल व्यापारी, सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर खेल रहे हैं और किसान हर बार की तरह इस बार भी ठगा सा महसूस कर रहा है. 

 
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विदर्भ के अकोला ज़िले के मनबदा गांव के संतोष जानराव पार्थीकर किसान के जमीन कार्ड में उनकी 40 आर. जमीन पर अरहर की खेती करने का दावा किया गया. संतोष जानराव पार्थीकर के नाम से तेल्हारा की कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) में 82 बैग में कुल 41 क्विंटल अरहर सरकार को बेचने की रजिस्ट्री कराई गई. उन्हें 1082 नम्बर का टोकन दिया गया.
 
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जबकि, 26 फरवरी, 2017 को तेल्हारा की मंडी से जारी 1082 नंबर का टोकन बता रहा है कि संतोष जानराव किसान से सरकार ने 182 बैग मतलब 91 क्विंटल अरहर ली, जो कि पहले के मुकाबले 50 क्विंटल ज्यादा है. रसीद को गौर से देखने से आसानी से पता चल रहा है कि 50 क्विंटल अरहर कहां से संतोष जानराव नाम पर चढ़ी होगी? रसीद पर 82 बैग के आगे 1 अंक जोड़कर 182 बैग लिखा गया है. 

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ऊपरी तौर पर यह बात बहुत मामूली लगे. लेकिन इस से कुछ बुनियादी सवाल पैदा हो रहे हैं, मसलन, क्या 40 आर. की खेती में 41 क्विंटल अरहर पैदा हो सकती है, जिस ट्रैक्टर-ट्रॉली (MH 30-3332) से 41 क्विंटल अरहर तेल्हारा मंडी में लाई गई क्या एक ट्राली इतनी अरहर एक बार में ढो सकती है, ट्रॉली से एक बार में अगर 41 क्विंटल अरहर ढोना मुश्किल है तो 91 क्विंटल अरहर उसी ट्रॉली से एक ही समय में तेल्हारा की मंडी में कैसे पहुंची?

मामले का खुलासा होने पर तेल्हारा मंडी पहुंचे अकोट के उपजिलाधिकारी उदय राजपूत से हमारे संवाददाता धनंजय साबले ने जब संपर्क किया तो उन्होंने अरहर की खरीद में धांधली होने की बात को स्वीकार किया. उन्होंने बताया कि टोकन में धांधली होने की शिकायत उन्हें किसानों से प्राप्त हुई है. टोकन रजिस्टर और प्राप्त टोकन के अध्ययन के बाद यह सामने आया है कि एक ही टोकन पर एक से ज्यादा बार माल खरीदा गया है. ज़िलाधिकारी को यह सूचीत किया जाएगा और आगे की कार्रवाई होगी.

दरअसल, इस गड़बड़झाले के पीछे है अरहर को मिला सरकारी मूल्य. अरहर की बम्पर फसल आने की खबरें मिलते ही व्यापारियों ने किसानों से औने-पौने दाम में अरहर खरीदी. व्यापारी अब उसी फसल को 5050 रुपए प्रति क्विंटल के सरकारी दाम पर सरकार को बेचने की जुगत में लग गए. 


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ऐसे में व्यापारी, सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों के नाम पर अपने गोदाम में रखी सस्ती अरहर सरकार के मत्थे मढ़ रहे हैं. संतोष जानराव पार्थीकर के टोकन पर एक अंक बढ़ाकर ढाई लाख रुपए से ज्यादा की कमाई का अंदेशा जताया जा रहा है. राज्यभर में जारी अरहर खरीद को ध्यान में रख एक अंदाज़ लगाया जा रहा है कि यह गड़बड़झाला 400 करोड़ रुपए का हो सकता है. 

गौरतलब है कि सोमवार को अरहर खरीद संकट से निबटने के लिए नई दिल्ली पहुंचे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र सरकार से खरीद का समय बढ़ाने की मंजूरी ले ली. अब राज्य सरकार नाफेड के जरिए 31 मई तक अतिरिक्त एक लाख टन अरहर खरीद सकेगी. अभी तक सरकारी खरीद की मियाद 22 अप्रैल तक  ही थी. लेकिन, इस खरीद में भी अगर तेल्हारा मंडी की तरह किसानों की ठगी बरकरार रही तो सरकारी कोशिश का फायदा व्यापारी और अधिकारी ही ले उड़ेंगे. किसान के पल्ले वही कोरे आश्वासन ही आएंगे. 



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