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जम्‍मू-कश्‍मीर में आर्टिकल 35A का मामला: केंद्र सरकार ने SC में कहा, इस मुद्दे पर दाखिल नहीं करेंगे कोई जवाब

जम्मू कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले आर्टिकल 35A मामले की सनुवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो इस मुद्दे पर कोई जवाब दाखिल नहीं करेंगे.

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जम्‍मू-कश्‍मीर में आर्टिकल 35A का मामला: केंद्र सरकार ने SC में कहा, इस मुद्दे पर दाखिल नहीं करेंगे कोई जवाब

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. वह सिर्फ संवैधानिक मुद्दों पर बहस करेंगे
  2. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि ये संवेदनशील मामला है
  3. कोर्ट को फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं करना चाहिए
नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले आर्टिकल 35A मामले की सनुवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो इस मुद्दे पर कोई जवाब दाखिल नहीं करेंगे. वह सिर्फ संवैधानिक मुद्दों पर बहस करेंगे. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि ये संवेदनशील मामला है. इंटरलोकुटर दस बार वहां जा चुके हैं. सभी हितधारकों से बात कर रहे हैं  और कोर्ट को फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं करना चाहिए. उन्‍हें इंटरलोकुटर की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए. 

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 6 अगस्त तक सारी कार्रवाई पूरी करने को कहा है. कोर्ट इस मामले की सुनवाई 16 अगस्त को करेगा. सुप्रीम कोर्ट तभी तय करेगा कि मामले को संविधान पीठ को भेजा जाए. कोर्ट में जम्मू एवं कश्मीर राज्य को मिले विशेष दर्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. कई याचिकाओं में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-35ए को असंवैधानिक करार देने की गुहार की गई है. 

दरअसल, इससे पहले जम्मू-कश्‍मीर के स्थायी निवासियों के विशेषाधिकार से संबंधित अनुच्छेद 35 ए को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताई थी और केंद्र से उसका पक्ष पूछा था. इससे पहले कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई संवैधानिक की पीठ द्वारा किये जाने का समर्थन किया था, यदि यह अनुच्छेद संविधान के अधिकार क्षेत्र से बाहर है या इसमें कोई प्रक्रियागत खामी है. कोर्ट ने कहा था कि तीन न्यायाधीशों की पीठ मामले की सुनवाई करेगी और फिर इसे पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजेगी.

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कोर्ट चारू वली खन्ना की ओर से संविधान के अनुच्छेद 35ए और जम्मू-कश्मीर के संविधान के प्रावधान छह को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है दोनों प्रावधान जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासियों से जुड़े हुए हैं. याचिका में कुछ विशेष प्रावधानों को चुनौती दी गयी है- राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति से विवाह करने वाली महिला को संपत्ति का अधिकार नहीं मिलना. इस प्रावधान के तहत राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति से विवाह करने वाली महिला का संपत्ति पर अधिकार समाप्त हो जाता है और उसके बेटे को भी संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता. संविधान में 1954 में राष्ट्रपति आदेश से जोड़ा गया अनुच्छेद 35ए जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासियों को विशेषाधिकार और सुविधाएं देता है.

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पूर्व सैनिक सहित तीन लोगों की ओर से दायर इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में दायर इसी तरह की याचिका के साथ जोड़ दिया है. इनमें विभाजन के बाज कश्मीर में बसे लोग शामिल हैं. याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद-35ए और जम्मू एवं कश्मीर संविधान के खंड-छह विभाजन के बाद पश्चिम पाकिस्तान से कश्मीर में आए लोगों के साथ भेदभावपूर्ण है.  उनका कहना है कि वे तीसरी पीढ़ी के लोग है लेकिन अब तक उन्हें जम्मू एवं कश्मीर के वांशिदें को मिलने वाला लाभ नहीं मिल रहा है. 

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1954 में राष्‍ट्रपति आदेश पर अनुच्‍छेद 35 ए को संविधान में शामिल किया गया था जिसके अनुसार जम्‍मू कश्‍मीर के निवासियों को विशेषाधिकार दिया गया था.

 


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