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पेट्रोल की कीमतों पर जेटली का राहुल गांधी को जवाब, ट्वीट कर देने से कम नहीं होंगे तेल के दाम

पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर विपक्ष को आड़े हाथों लिया.

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पेट्रोल की कीमतों पर जेटली का राहुल गांधी को जवाब, ट्वीट कर देने से कम नहीं होंगे तेल के दाम

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल की कीमतों पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. पेट्रोल की कीमतों पर जेटली का राहुल गांधी पर निशाना
  2. उन्होंने कांग्रेस के सहयोगी दलों को भी घेरा
  3. जेटली ने फेसबुक पोस्ट लिखकर साधा निशाना
नई दिल्ली:

पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर विपक्ष को आड़े हाथों लिया. गैर-भाजपा शासित राज्यों के पेट्रोल-डीजल पर कर राहत देने से इनकार के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके ‘असंतुष्ट सहयोगियों’ की मंशा पर सवाल उठाया. जेटली ने कहा कि जब आम आदमी को राहत देने की बात आती है तो लगता है राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल केवल ट्वीट करने और टेलीविजन ‘बाइट’ देने के लिए ही प्रतिबद्ध हैं. जेटली ने फेसबुक पर ‘तेल की कीमतें और विपक्ष का पाखंड’ शीर्षक से एक लेख लिखा है. केन्द्र सरकार के पेट्रोल-डीजल के दाम में 2.50 रुपये प्रति लीटर कटौती को ‘खराब आर्थिक प्रबंधन’ बताने वाले विपक्ष की आलोचना करते हुये जेटली ने कहा कि यह उसके (विपक्ष के) पहले के रुख के ऊलट है. उन्होंने कहा कि जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो राज्यों को अतिरिक्त कर राजस्व प्राप्त होता है क्योंकि राज्यों में कर मूल्यानुसार लिया जाता है. 

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उन्होंने कहा, ‘‘अब ऐसी स्थिति है, जहां कई गैर-भाजपा और गैर-राजग शासित राज्यों ने कर में कटौती कर ग्राहकों को लाभ नहीं पहुंचाया है. लोग इसका क्या निष्कर्ष निकालेंगे?’’ जेटली ने कहा, ‘‘क्या राहुल गांधी और उनके अनिच्छुक सहयोगी जब जनता को राहत देने की बात आती है तो केवल टीवी पर बयान देने और ट्वीट करने के लिए प्रतिबद्ध हैं?’’ उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों की चुनौती काफी गंभीर है और विपक्ष के कुछ नेताओं के बयानों या ट्वीटों से इसका समाधान नहीं हो सकता है. वित्त मंत्री जेटली ने कहा, ‘‘गैर-भाजपा शासित राज्यों को जनता यह स्पष्ट बताना चाहिए कि 2017 और 2018 दोनों समय में उन्होंने जनता को किसी भी तरह की राहत देने से मना कर दिया था, जबकि उनका राजस्व संग्रह ऊंचा था. उन्हें जनता से इसे छिपाना नहीं चाहिए. वे ट्वीट करते हैं और टीवी पर बयान देते हैं लेकिन जब कदम उठाने की बारी आती है तो वह नजरें फेर लेते हैं.’’ 

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केन्द्र सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ढाई रुपये लीटर कटौती की घोषणा की है. इसमें डेढ़ रुपये उत्पाद शुल्क कटौती से और एक रुपये का बोझ पेट्रोलियम विपणन कंपनियों पर डाला गया. केंद्र सरकार की घोषणा के बाद भाजपा शासित गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, असम, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश ने राज्यों में लगने वाले वैट में भी ढाई रुपये प्रति लीटर कटौती कर दी. जबकि केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों ने कर में कटौती से इनकार किया. जेटली ने कहा कि वेनेजुएला और लीबिया के राजनीतिक संकट ने तेल उत्पादन करने वाले देशों पर विपरीत प्रभाव डाला है, वहीं ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चिता है. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रा भी प्रभावित हुई है. जेटली ने कहा, ‘‘भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े वृहद आर्थिक आंकड़े मसलन राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा भंडार इत्यादि के हालात स्थिर हैं. कर संग्रहण बढ़ रहा है.’’ हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का उल्टा असर चालू खाते के घाटे पर पड़ा है. इससे मुद्रा प्रभावित हुई है. इसके अलावा डॉलर के मजबूत होने से भी अन्य विदेशी मुद्राएं प्रभावित हुई हैं. 

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उन्होंने कहा, ‘‘इन दोनों बातों का असर ग्राहक को मिलने वाले ईंधन की लागत पर पड़ता है.’’ पिछले चार साल में कच्चे तेल की कीमत नई ऊंचाई पर पहुंच गई है. जेटली ने कहा कि कोई भी सरकार अपने लोगों (जनता) के प्रति असंवेदनशील नहीं हो सकती है. उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में भी पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क पर दो रुपये की कटौती की थी. उन्होंने कहा तब भी राज्य सरकारों से वैट में कटौती को कहा गया. उस समय भी ज्यादातर भाजपा-राजग शासित राज्यों ने कटौती की, जबकि अन्य पार्टियों के शासन वाले राज्यों ने कटौती से इनकार कर दिया. जेटली ने कहा असाधारण परिस्थितियों में किसी अर्थव्यवस्था की राहत देने की क्षमता उसकी वित्तीय मजबूती पर निर्भर करती है.
(इनपुट भाषा से)



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