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आरुषि हत्याकांड से जुड़े प्रमुख तथ्य और तर्क जो कोर्ट में सामने आए

नोएडा में आरुषि और डॉ तलवार के नौकर हेमराज की हत्या सन 2008 में हुई थी, आरुषि के माता-पिता काट रहे हैं सजा

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आरुषि हत्याकांड से जुड़े प्रमुख तथ्य और तर्क जो कोर्ट में सामने आए

डॉ राजेश तलवार और उनकी पत्नी नुपुर तलवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने अारुषि और हेमराज की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा दी है (फाइल फोटो).

लखनऊ: चर्चित आरुषि और हेमराज हत्याकांड में उम्र कैद काट रहे आरुषि के माता-पिता राजेश तलवार और नुपुर तलवार की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला 12 अक्टूबर को आएगा. सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी. नोएडा में आरुषि और डॉ तलवार के नौकर हेमराज की हत्या सन 2008 में हुई थी. इस मामले में प्रमुख तथ्य कोर्ट की कार्यवाही का ब्योरा यहां दिया जा रहा है.

तलवार दंपति पर आरोप :
सेक्शन 302 आईपीसी : हत्या
सेक्शन 201 आईपीसी : सुबूत मिटाना.
सेक्शन 203 आईपीसी (सिर्फ राजेश तलवार पर) : अपराध के बारे में गलत सूचना देना
 
लोअर कोर्ट की कार्यवाही

प्रोसीक्यूशन के तर्क
इसमें कोई शक नहीं कि आरुषि और हेमराज जिस्मानी रिश्ते बना रहे थे.
आरुषि और हेमराज जिस्मानी रिश्ते बनाते वक्त मारे गए. और हत्या की वजह यही थी.
आरुषि की वेजाइना में सफेद डिस्चार्ज मिला जो जिस्मानी रिश्ते बनाना की गवाही देता है.
नतीजे में साबित होता है कि हत्या फ्लैट के अंदर हुई, जहां दोनों आरोपी तलवार दंपति मौजूद थे.
घर में किसी बाहरी के आने का कोई सुबूत नहीं.
इसलिए यह साबित करने की जिम्मेदारी तलवार दंपति की है कि यह अचानक गुस्से में हुआ कांड नहीं था.
हेमराज का खून आरुषि के बेडरूम में उसके तकिए पर मिला.
राजेश तलवार की गोल्फ स्टिक हत्या के लिए इस्तेमाल की गई.

बचाव पक्ष के तर्क
केस की बुनियाद सर्कमस्टेंशियल एविडेंस पर खड़ी की गई है, लेकिन इसमें बहुत झोल है.
अचानक गंभीर उत्तेजना और गुस्से के तर्क में दम नहीं है.
पोस्टमॉर्टम में सेक्सुअल असॉल्ट का कोई सुबूत नहीं है.
आरुषि की वेजाइना में सफेद डिस्चार्ज हॉर्मोनल चेंज्स की वजह से था.
आरुषि और हेमराज के जख़्म खुखरी जैसे दोधारी हथियार के हैं.
हेमराज के आरुषि के बेडरूम में मरने के कोई सुबूत नहीं हैं.
सीबीआई की  क्लोजर रिपोर्ट सॉफ कहती है कि आरुषि की बेडशीट और तकिए पर हेमराज का खून कतई नहीं मिला.
प्रॉसीक्यूशन की कहानी का सच्चाई से कोई वास्ता नहीं.
 
लोअर कोर्ट का ऑर्डर
आरोपियों के गुनाह के बिला शुभा मजबूत सुबूत हैं.
 26 पॉइंट आरोपियों के खिलाफ गुनाह की थ्यौरी को सही ठहराते हैं.
किसी बाहरी के घर के अंदर आने का पता नहीं चलता.
इस हालत में लड़की को देख मां-बाप उससे लिपटे नहीं यह बहुत अस्वाभाविक बिहेवियर है.
कत्ल की वजह (मोटिव ऑफ कमीशन ऑफ क्राइम ) साबित होता है.
मां-बाप बच्चों की हमेशा हिफाजत करते हैं, लेकिन मानवता का इतिहास अनहोनियों से भी भरा पड़ा है.
आरुषि के मां-बाप ने बाइबल के “टेन कमेंडमेंट” के नियम - 'दाउ शैल नॉट किल' (यानी आप हत्या नहीं कर सकते) का उल्लंघन किया है.

VIDEO : तलवार दंपति को आजीवन कारावास

(नोट : दरअसल जज ने फैसले में ऐसा इसलिए लिखा है क्योंकि जीसस क्राइस्ट से पहले इजराइल के लोगों को कुछ विशेष परिस्थितियों में मिसाल के लिए हत्या या व्यभिचार के गुनाह की सजा देने के लिए हत्या करने की छूट हासिल थी….लेकिन जीसस हत्या से सख्त नफरत करते थे….”टेन कमेंडमेंट्स का छटवां कमेंडमेंट है कि “दाउ शाल्ट नॉट किल” जिसे दाउ शैल नॉट किल भी लिखते हैं. यानी आप कत्ल नहीं कर सकते.)


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