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मुफ्त यात्रा योजना को लेकर केजरीवाल सरकार की मंशा पर उठे सवाल, केंद्र को प्रस्ताव ही नहीं भेजा

अरविंद केजरीवाल सरकार भले ही मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना को लेकर बीजेपी पर राजनीति करने और इसमें रोड़ा अटकाने का आरोप लगा रही हो, लेकिन अब दिल्ली सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं.

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मुफ्त यात्रा योजना को लेकर केजरीवाल सरकार की मंशा पर उठे सवाल, केंद्र को प्रस्ताव ही नहीं भेजा

केंद्र सरकार ने कहा है कि दिल्ली सरकार की तरफ से उन्हें मुफ्त यात्रा से संबंधित कोई प्रस्ताव नहीं मिला है.

खास बातें

  1. मेट्रो में मुफ्त यात्रा योजना पर सियासत जारी
  2. सरकार ने कहा, हमें कोई प्रस्ताव ही नहीं मिला
  3. केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने दिया लिखित जवाब
नई दिल्ली :

अरविंद केजरीवाल सरकार भले ही मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना को लेकर बीजेपी पर राजनीति करने और इसमें रोड़ा अटकाने का आरोप लगा रही हो, लेकिन अब दिल्ली सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं. दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय के सवाल के जबाब में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने कहा, 'केंद्र सरकार को दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है'. सौगत रॉय ने यह भी पूछा कि क्या दिल्ली सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को ऐसा कोई प्रस्ताव मिला है और यदि मिला है तो इस संबंध में अबतक क्या कदम उठाए गए हैं. इस सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने साफ-साफ कहा कि उन्हें ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. 

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आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना की घोषणा की थी. इसके बाद से ही इस मामले पर सियासत जारी है. पिछले दिनों दिल्ली मेट्रो के पूर्व प्रमुख और मेट्रो मैन के नाम से मशहूर ई. श्रीधरन (E. Sreedharan) ने अरविंद केजरीवाल सरकार की महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त यात्रा की योजना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. 10 जून को लिखी गई चिट्ठी में  श्रीधरन ने पीएम मोदी से कहा था, 'दिल्ली सरकार के प्रस्ताव पर सहमत न हों. जब मेट्रो शुरू हुई थी तब यह निर्णय लिया गया था कि किसी को भी यात्रा के लिए मेट्रो में रियायत नहीं दी जाएगी. इस फैसले का स्वागत खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था और उन्होंने खुद टिकट लेकर दिसंबर 2002 में शाहदरा से कश्मीरी गेट तक पहली यात्रा की थी.

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दिल्ली मेट्रो केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार का जॉइंट वेंचर है. कोई एक हिस्सेदार समाज के किसी एक हिस्से को रियायत देने का एकतरफा निर्णय नहीं ले सकता है'. ई. श्रीधरन (E. Sreedharan) ने पत्र में लिखा था, 'मेट्रो का अपना स्टाफ यहां तक कि मैनेजिंग डायरेक्टर भी जब यात्रा करते हैं तो टिकट खरीदते हैं. इस योजना को लागू करने में 1000 करोड़ रुपये सालाना का खर्चा आएगा और यह बढ़ता ही जाएगा, क्योंकि मेट्रो बढ़ेगी और किराए बढ़ेंगे. समाज के एक हिस्से को रियायत दी जाएगी तो बाद में दूसरे इससे भी रियायत देने की मांग करेंगे जैसे कि छात्र, विकलांग, वरिष्ठ नागरिक आदि. जो कि इस रियायत के ज़्यादा हकदार हैं. यह बीमारी देश की दूसरी मेट्रो में भी फैलती जाएगी. इस कदम से दिल्ली मेट्रो अक्षम और कंगाल हो जाएगी. अगर दिल्ली सरकार महिला यात्रियों की मदद करना ही चाहती है तो उनके खातों में सीधा पैसा डाल दे. 

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