IRS की नौकरी छोड़ राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल का सियासी सफर

IRS की नौकरी छोड़कर समाजसेवा की राह पर निकले अरविंद केजरीवाल को शुरुआत में अण्‍णा हजारे जैसे बड़े समाजसेवियों का साथ मिला था. अरविंद केजरीवाल ने ‘सूचना का अधिकार’ के लिए काफी काम किया.

IRS की नौकरी छोड़ राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल का सियासी सफर

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी में चुनौती देने वाले अरविंद केजरीवाल फरवरी 2015 में रिकार्ड बहुमत से दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री बने. दिल्‍ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्‍मीदवार जीतकर आए थे और इस जीत के मुखिया थे अरविंद केजरीवाल. देश की राजनीति में अरविंद केजरीवाल अण्‍णा आंदोलन की देन हैं. IRS की नौकरी छोड़कर समाजसेवा की राह पर निकले अरविंद केजरीवाल को शुरुआत में अण्‍णा हजारे जैसे बड़े समाजसेवियों का साथ मिला था. अरविंद केजरीवाल ने ‘सूचना का अधिकार' के लिए काफी काम किया.

अण्‍णा का आंदोलन अरविंद केजरीवाल के लिए उनके जीवन का बहुत बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. अरविंद केजरीवाल ने अपने कुछ साथियों के साथ 2 अक्टूबर 2012 को आम आदमी पार्टी बनाई. राजनीति के अखाड़े में केजरीवाल के साथ दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का भरपूर साथ मिला. मनीष सिसोदिया के विषय में एक बार अरविंद ने कहा था कि मनीष हमारे एनजीओ में साथ जुड़ने वाले कार्यकर्ता थे.

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वर्ष 2013 में हुए दिल्ली के चुनावों में आम आदमी पार्टी को 28 सीटों पर जीत मिली थी और वो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इस चुनाव में केजरीवाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित को बड़े अंतर से हराया था. कांग्रेस के समर्थन से केजरीवाल ने 49 दिनों की सरकार चलाने के बाद इस्तीफा दे दिया. एक साल बाद 2015 में फिर चुनाव हुए. इस चुनाव में केजरीवाल ने और मजबूती के साथ वापसी करते हुए 70 में से 67 सीटें जीतीं. 14 फरवरी 2015 को अरविंद केजरीवाल दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने.

16 अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार जिले में जन्‍मे अरविंद केजरीवाल तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. उनके पिता का नाम गोविंद और माता का नाम गीता है. केजरीवाल की पत्नी का नाम सुनीता है. सुनीता भी आईआरएस अधिकारी रह चुकी हैं. सुनीता ने अरविंद के मुख्यमंत्री बनने के बाद वीआरएस ले लिया है. उनके बच्चों का नाम हर्षिता और पुलकित है.

अरविंद केजरीवाल आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग किए हुए हैं. वर्ष 1992 में उनका चयन आईआरएस में हो गया. बाद में उन्‍होंने नौकरी छोड़ दी और सामाजिक कार्यों में लग गए. सरकारी कामों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केजरीवाल ने 'सूचना का अधिकार' के लिए काम किया. इसके लिए उन्‍हें वर्ष 2006 में मैग्सायसाय पुरस्कार प्राप्‍त हुआ.

अरविंद केजरीवाल नई दिल्‍ली विधानसभा से चुनाव मैदान में हैं. नई दिल्ली विधानसभा सीट (New Delhi Assembly Seat) दिल्ली के मध्य क्षेत्र में है और नई दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (New Delhi Lok Sabha Constituency) का हिस्सा है.

वर्ष 2015 के चुनाव में इस सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल ने जीत हासिल की थी. इस सीट, यानी नई दिल्ली (New Delhi Assembly Elections) सीट पर वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल ने ही जीत हासिल की थी, जबकि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस की शीला दीक्षित ने जीत हासिल की थी.

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चुनाव आयोग (Election Commission) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में कुल मतदाताओं की संख्या 1,46,92,136 है, जो कुल 2,689 स्थानों पर स्थापित किए गए कुल 13,750 मतदान केंद्रों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. राष्ट्रीय राजधानी में महिला मतदाताओं की तादाद 66,35,635 है, जबकि यहां कुल 80,55,686 पुरुष मतदाता हैं. दिल्ली में 815 मतदाता थर्ड जेंडर के हैं, जबकि अप्रवासी भारतीय (NRI) मतदाताओं की संख्या 489 है. राष्ट्रीय राजधानी में सर्विस वोटरों (Service Voters) की कुल संख्या 11,556 है, जिनमें से 9,820 पुरुष मतदाता हैं. इसके अलावा दिल्ली में 55,823 मतदाता दिव्यांग श्रेणी के भी हैं.

भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष सुनील यादव को बीजेपी ने केजरीवाल के खिलाफ उतारा है. सुनील यादव वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. सुनील यादव ने भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष के तौर पर अपनी शुरुआत की थी. सुनील यादव इससे पहले दिल्ली बीजेपी में सचिव भी रह चुके हैं. इतना ही नहीं सुनील यादव डीडीसीए से डायरेक्टर के तौर पर भी जुड़े रहे चुके हैं. वहीं अगर बात करें इस सीट से कांग्रेस प्रत्‍याशी की तो कांग्रेस ने यहां से रोमेश सभरवाल को चुनावी मैदान में उतारा है. रोमेश 40 सालों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं.