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2जी केस में झटके के बाद केन्‍द्र ने सीनियर लॉ ऑफिसर तुषार मेहता को बनाया नया विशेष लोक अभियोजक

विशेष लोक अभियोजक रहते हुए यू.यू. ललित को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने पर उनकी जगह आनंद ग्रोवर की नियुक्ति हुई थी. वह सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय, दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

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2जी केस में झटके के बाद केन्‍द्र ने सीनियर लॉ ऑफिसर तुषार मेहता को बनाया नया विशेष लोक अभियोजक

तुषार मेहता (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. आठ फरवरी को जारी आदेश के जरिये यह नियुक्ति की.
  2. वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है.
  3. 21 दिसंबर को अदालत ने 17 आरोपियों को बरी किया था
नई दिल्ली: सरकार ने अतिरिक्त सालिसिटर जनरल तुषार मेहता को टूजी आवंटन मामलों में सीबीआई की तरफ से विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा आठ फरवरी को जारी आदेश के जरिये यह नियुक्ति की. हालांकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दो सितंबर, 2014 को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है.

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विशेष लोक अभियोजक रहते हुए यू.यू. ललित को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने पर उनकी जगह आनंद ग्रोवर की नियुक्ति हुई थी. वह सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय, दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. ललित से पहले वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. गोयल ने आरंभिक दिनों में मामले में अपनी दलीलें दी थीं, लेकिन बाद में उनकी जगह ए.के. सिंह को नियुक्त किया गया.

सिंह को कथित तौर पर टेलीफोन पर एक आरोपी को मुकदमा लड़ने की सलाह देते हुए सुने जाने पर उन्हें इस पद से हटा दिया गया. उसके बाद गोयल की वापसी हुई. 

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ललित के 13 अगस्त, 2014 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने पर मौजूदा महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल ने ग्रोवर का नाम सुझाया था. पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी और 15 अन्य आरोपियों को 2जी घोटाला मामले में 21 दिसंबर को अदालत द्वारा बरी किए जाने पर ग्रोवर को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ. विशेष अदालत ने भी ग्रोवर को फटकार लगाई थी.

न्यायालय के फैसले के बाद सीबीआई ने कहा था कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगी. विशेष अदालत द्वारा गुरुवार को कथित 2जी केस में सभी आरोपियों को बरी करने के बाद जानेमाने वकील और स्वराज अभियान के संस्थापक प्रशांत भूषण ने 2जी घोटाले के सभी आरोपियों के बरी होने को 'काफी गलत' करार दिया और कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि प्रभावशाली लोग देश की न्यायिक प्रणाली के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. 

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उन्होंने ट्वीट कर कहा, "बेनामी लाइसेंसों, पहले-आओ-पहले-पाओ प्रणाली में सांठगांठ और मामले में रिश्वत के काफी सबूत थे. शर्म आनी चाहिए."

 


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