Khabar logo, NDTV Khabar, NDTV India

सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी ने साधा नरेंद्र मोदी पर निशाना

ईमेल करें
टिप्पणियां
सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी ने साधा नरेंद्र मोदी पर निशाना
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा निशाना साधा और आरोप लगाया कि राजग सरकार की 'तानाशाही' प्रवृतियां हैं।

पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की आज यहां आयोजित बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पर अपनी कैबिनेट के सदस्यों और बीजेपी के नेताओं के भड़काऊ भाषणों और बयानों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और साथ ही यह भी कहा कि यह लोकसभा चुनाव के दौरान अपनायी गई 'ध्रुवीकरण की रणनीति' का विस्तार है।

कांग्रेस के घटते जनाधार पर रोक लगाने और लोकसभा चुनाव से शुरू हुए पराजय के सिलसिले को रोकने के मुद्दे को लेकर पार्टी के जूझने के बीच सोनिया गांधी ने बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से जनता तक पहुंचने के रास्ते और उपायों के बारे में सुझाव देने को कहा।

यह बैठक भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और किसानों से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए हुई थी।

अध्यादेश के मुद्दे पर सोनिया ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। भाजपा सरकार ने अपने सात महीने के कार्यकाल के दौरान दस अध्यादेश जारी करवाए हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इस जल्दबाजी  (अध्यादेश लाने की) के पीछे कोई छिपा हुआ मकसद है।

पार्टी मुख्यालय में करीब चार घंटे चली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में संगठन पर नए सिरे से विचार करने की बात हुई है। विचार हुआ कि आने वाले दिनों में अध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल से तीन साल किया जाए। हालांकि इससे बड़ा कोई और बदलाव कांग्रेस की नीतियों में नहीं दिख रहा है।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी को लेकर किसी बड़े एलान की उम्मीद भी गलत साबित हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बैठक के बाद साफ शब्दों में कहा कि इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।

हालांकि संगठन के भीतर भी कांग्रेस कई बदलावों की सोच रही है। इसके लिए वह अपने संविधान में भी संशोधन करेगी। अध्यक्ष, महासचिव और दूसरे सांगठनिक ओहदों का कार्यकाल पांच साल से घटा कर तीन साल किया जा सकता है।

लेकिन यह साफ़ है कि न संगठन के स्तर पर कांग्रेस सोनिया- राहुल की पकड़ से दूर जा रही है और न विचार के स्तर पर वो कोई नई बात सोच पा रही है। कार्यसमिति में फ़ैसला हुआ कि पार्टी भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का विरोध करेगी, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों के लिए 50% आरक्षण मांगेगी, बड़े पैमाने पर जन संपर्क अभियान चलाएगी और पार्टी के अलग-अलग विंग के लिए अलग-अलग सदस्यता की ज़रूरत ख़त्म करेगी।


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement

 
 

Advertisement