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जब पूरी दुनिया थी खिलाफ, ऐसे संभाला था देश को अटल ने

वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में देश में विकास के स्वर्णिम अध्याय की शुरूआत हुई. वे देश के चारों कोनों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी अविस्मरणीय योजना के शिल्पी थे.

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जब पूरी दुनिया थी खिलाफ, ऐसे संभाला था देश को अटल ने

अटल बिहारी वाजपेयी का एम्स में निधन हो गया है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे को आगे बढ़ाते हुए 'जय जवान-जय किसान- जय विज्ञान' का नारा दिया। देश की सामरिक सुरक्षा पर उन्हें समझौता बिलकुल भी गंवारा नहीं था. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 1998 में पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण किए. इसके बाद अमेरिका सहित पूरे विश्व ने भारत पर आर्थिक लगा दिये. कई ऐसे देश जिन पर भारत निर्भर था उन्होंने अमेरिका के दबाव में भारत से मुंह मोड़ लिया. इतना ही नहीं देश के अंदर भी कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने भी इस फैसले के विरोध किया. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी  ने हर तरह के प्रतिबंध को झेला और देश को संकट से उबार लिया. उन्होंने आर्थिक संकट से निपटने के लिये विदेशों में बसे भारतीयों से मदद की अपील की तो भारतीय समुदाय देश के पीछे खड़ा हो गया और देशो को हर ओर से आर्थिक मदद मिलने लगी. उसके बाद अटल जी की सरकार का एक वोट से गिर गई और देश में लोकसभा चुनाव कराने पड़े. उस चुनाव में सुषमा स्वराज एक चुनावी एक रैली में कहा इस पूरे वाकये का जिक्र करते हुये था कि परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिया लेकिन वहां के राष्ट्रपति को यह नहीं पता था कि जब महाराणा प्रताप को धन की आवश्यकता पड़ती है तो भामाशाह थैलियां खोल देते हैं.

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वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में देश में विकास के स्वर्णिम अध्याय की शुरूआत हुई. वे देश के चारों कोनों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी अविस्मरणीय योजना के शिल्पी थे. नदियों के एकीकरण जैसे कालजयी स्वप्न के द्रष्टा थे. मानव के रूप में वे महामानव थे. सर्व शिक्षा अभियान, संरचनात्मक ढांचे के सुधार की योजना, सॉफ्टवेयर विकास के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल का निर्माण और विद्युतीकरण में गति लाने के लिए केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि योजनाओं की शुरुआत कर देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने में उनकी भूमिका काफी अनुकरणीय रही। वाजपेयी सरकार की विदेश नीति ने दुनिया में भारत को एक नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रतिष्ठित रहा. 

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अपनी ओजस्वी भाषण शैली, लेखन व विचारधारा के प्रति निष्ठा तथा ठोस फैसले लेने के लिए विख्यात वाजपेयी को कई पुरस्कारों से नवाजा गया. उन्हें 1992 में पद्म विभूषण 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में ही श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार, भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार और 2015 में उन्हें बांग्लादेश के सर्वोच्च अवार्ड फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया गया. देश के विकास में अमूल्य योगदान देने एवं अंतर्राष्ट्रीय फलक पर देश को सम्मान दिलाने के लिए वाजपेयी को 2015 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया गया. 

 



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