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अयोध्या केस : श्रीराम जनमभूमि पुनरुत्थान समिति की दलील, अयोध्या में बाबरी मस्जिद बाबर के दौर में बनी ही नहीं

सुप्रीम कोर्ट में ब्रिटिश दौर से भी पहले 1770 में भारत भ्रमण पर आए लेखक पर्यटक ट्रैफन थेलर की डायरी वाली किताब का हवाला भी दिया

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अयोध्या केस : श्रीराम जनमभूमि पुनरुत्थान समिति की दलील, अयोध्या में बाबरी मस्जिद बाबर के दौर में बनी ही नहीं

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में सुनवाई के 14 वें दिन श्रीराम जनमभूमि पुनरुत्थान समिति की दलीलें ही होती रहीं. समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि जिस इमारत को सुन्नी वक्फ बोर्ड बाबर के दौर में बनी बाबरी मस्जिद बता रहा है दरअसल वह तो औरंगजेब के दौर में बनाई गई. इससे पहले वहां विष्णु हरि के अवतार राम का मंदिर था. मिश्रा ने ब्रिटिश दौर से भी पहले 1770 में भारत भ्रमण पर आए लेखक पर्यटक ट्रैफन थेलर की डायरी वाली किताब का हवाला भी दिया जिसमें थेलर ने वहां बमुश्किल 30-40 वर्ष पहले बनी इमारत का उल्लेख किया है जिसे तब के अयोध्या वासी मस्जिद जन्मभूमि के नाम से जानते थे. उस वक्त का अयोध्या का नक्शा भी कोर्ट के सामने रखा गया जिसमें राम जन्मस्थान और जन्मस्थान मन्दिर का उल्लेख साफ-साफ है. याचिकाकर्ता ने कहा कि यह नक्शा दो सौ साल से भी पहले हेन्स बेकर नामक अंग्रेज ने स्कंद पुराण में दिए गए वर्णन और अयोध्या की मौजूदा स्थिति का मिलान और आकलन कर बनाया था. यानी उस समय बनाए गए नक्शे में मस्जिद का नाम तक नहीं है.

मिश्रा ने इतालवी पर्यटक निकोलाई मानुची की भारतयात्रा और 1650 के आसपास आई उनकी किताब का भी हवाला दिया जिसमें मस्जिद का कहीं नाम तक नहीं है. मिश्रा ने फिरंगी पर्यटक बुकानन के यात्रा वृत्तांत पर आधारित पुस्तक का भी ज़िक्र किया. इतना ही नहीं, बाबर की अपने हाथों से लिखी रोजनामचा नुमा डायरी जिसे बाबरनामा के नाम से जाना गया उसका भी हवाला दिया गया. बाबरनामा में भी कहीं अयोध्या प्रवास, किसी मन्दिर को तोड़े जाने या वहां मस्जिद बनाने का फरमान देने का कोई जिक्र नहीं है.


मिश्रा ने कहा कि कहीं-कहीं मीर खान का नाम मस्जिद बनवाने वाले के तौर पर ज़रूर मिलता है. इसके बाद हुमायूंनामा के उस दौर के हिस्से का भी उल्लेख मिश्रा ने कोर्ट में किया. उसमें भी इस बात का कोई चर्चा नहीं मिलती कि बाबर ने मस्जिद बनवाई. आईने अकबरी का भी ज़िक्र आया. हालांकि मिश्रा का जोर इस पर ही रहा कि मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाने की कार्रवाई तो औरंगजेब के ज़माने में ही हुई.

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कोर्ट ने उनकी दलीलों के समर्थन में भूमि राजस्व के प्रमाण भी मांगे जिससे उनका दावा और तर्क साबित हो सके. मिश्रा ने दलील दी कि 1840 के आसपास अंग्रेजों ने बंगाल से देसी मुलाज़िम अवध में तैनात किए थे जिन्होंने भूमि राजस्व में मनमाने ढंग से इंदराज (दर्ज) किया था. यानी उसी वक्त से बाबरी मस्जिद नाम का ज़िक्र है, उससे पहले नहीं.  

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कोर्ट ने मिश्रा से पूछा भी था कि आप इन दलीलों से आखिर साबित क्या करना चाहते हैं तो मिश्रा ने कहा कि हम कोर्ट को सिर्फ ये बताना चाहते हैं कि मस्जिद बाबर ने नहीं बनवाई थी और सुन्नी वक्फ बोर्ड इसका निर्माण काल जब का बता रहा है उसके करीब डेढ़ सौ साल बाद मन्दिर तोड़कर बनवाई गई.  जब वक्फ बोर्ड के तर्क ही गलत तथ्यों पर आधारित हैं तो उनका मालिकाना हक का दावा कैसा? मिश्रा ने रूसी पर्यटक की किताब के हवाले से ये भी कहा कि 1650 से पहले रामजन्म स्थान के पास दो कब्रों का तो ज़िक्र किताब में आया है लेकिन मस्जिद का नहीं.

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सुनवाई का 15 वां दिन भी समिति की दलीलों का दौर चलेगा जिसमे भूराजस्व के दस्तावेज भी होंगे.

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