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अयोध्या मामले पर SC बोला- पक्ष चाहें तो वह मध्यस्थता के जरिए मामला सुलझा सकते हैं

पीठ ने कहा कि भूमि विवाद मामले में रोजाना के आधार पर कार्यवाही बहुत आगे पहुंच गई है और यह जारी रहेगी.

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अयोध्या मामले पर SC बोला- पक्ष चाहें तो वह मध्यस्थता के जरिए मामला सुलझा सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. अयोध्या मामले में 26वें दिन की सुनवाई हुई
  2. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का बड़ा बयान आया
  3. 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी होने की उम्मीद
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राम-जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले से संबद्ध पक्ष यदि इसे मध्यस्थता के जरिए सुलझाना चाहते हैं, तो वे अब भी ऐसा कर सकते हैं. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला का पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि कुछ पक्षों ने उन्हें मध्यस्थता प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए पत्र लिखा है. कलीफुल्ला ने मामले में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की अगुवाई की थी. 

पीठ ने कहा कि भूमि विवाद मामले में रोजाना के आधार पर कार्यवाही बहुत आगे पहुंच गई है और यह जारी रहेगी. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि न्यायमूर्ति कलीफुल्ला की अगुवाई में मध्यस्थता प्रक्रिया अब भी जारी रह सकती है और उसकी कार्यवाही गोपनीय रखी जाएगी. साथ ही कोर्ट ने कहा कि सुनवाई काफी आगे तक बढ़ चुकी है इसलिए सुनवाई भी चलेगी.

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वहीं दूसरी ओर सीजेआई रंजन गोगोई का बड़ा बयान आया है. उन्होंने कहा है कि सभी को संयुक्त प्रयास करना होगा और पक्षकार समझौता कर अदालत को बताए. इस केस की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद भी जताई. 27 सितंबर तक मुस्लिम पक्षकार अपनी बहस पूरी कर लेंगे. मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से राजीव धवन ने कहा, ''अगले हफ़्ते तक हम अपनी बहस पूरी कर लेंगे.'' इस पर CJI ने कहा, ''आप अपनी बहस इस महीने तक पूरी कर लेंगे.'' इस पर रामलला विराजमान ने कहा कि उन्हें जवाब देने के लिए 2 दिनों का वक्त चहिये.

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CJI ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि हम अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर लेंगे. इसके लिए हम सभी को संयुक्त प्रयास करना होगा. इसके बाद जजमेंट लिखने के लिए जजों को चार हफ्तों का वक्त मिलेगा.'' सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''अगर पक्षकार इस मामले को मध्यस्थता समेत अन्य तरीके से सैटल करना चाहते हैं तो कर सकते हैं. पक्षकार समझौता कर अदालत को बताएं.'' साथ ही कहा कि 17 नवंबर तक फैसला आएगा. बताते चले कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई इसी दिन रिटायर भी होंगे.

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