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अयोध्या केस: SC ने पूछा- हनुमान द्वार पर क्यों बने थे 'जय विजय' द्वारपाल? राजीव धवन बोले- मुझे फोटो मैग्निफाइंग ग्लास से देखनी होंगी

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की 25वें दिन की सुनवाई जारी है. मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन अपना पक्ष रखा. जस्टिस भूषण ने पूछा, ''हनुमान द्वार पर द्वारपाल क्यों बने थे? जय विजय?''

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अयोध्या केस: SC ने पूछा- हनुमान द्वार पर क्यों बने थे 'जय विजय' द्वारपाल? राजीव धवन बोले- मुझे फोटो मैग्निफाइंग ग्लास से देखनी होंगी

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की 25वें दिन की सुनवाई जारी है. मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन अपना पक्ष रखा. जस्टिस भूषण ने पूछा, ''हनुमान द्वार पर द्वारपाल क्यों बने थे? जय विजय?'' इस पर राजीव धवन ने कहा, ''19वीं सदी के उत्तरार्ध 1873-1877 के बीच जब वहां दोनों तरह की प्रार्थनाएं हो रही थीं तब की होंगी.'' फिर जस्टिस भूषण ने कहा, ''ये तो विष्णु मंदिरों के द्वारपाल होते थे जय विजय. इन जय विजय की मूर्ति वाले कसौटी खंबों का ज़िक्र 1428 में भी मिलता है.'' इस पर धवन ने कहा, ''मुझे वो फोटो मैग्निफाइंग ग्लास यानी आतिशी शीशे से देखनी होंगी.''

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जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, ''लेकिन ये खंबों वाली दलील और चित्र मस्जिद के होने या ना होने से नहीं बल्कि वहां हिन्दू पवित्र स्थान होने की तस्दीक करते हैं.'' बहस के दौरान धवन ने कहा, ''14 खंबे चाहे ढहाए गए या मिले, इससे मन्दिर होने की पुष्टि कैसे हो सकती है कि मुस्लिम ही कहीं और से लाए हों!'' धवन ने कहा कि जिलानी बोलेंगे. जिलानी ने कहा कि हमारी तो ये दलील ही नहीं थी.


कोर्ट ने इमारत में बनी फूल और प्राणियों की आकृतियों पर सवाल पूछा तो धवन ने निर्मोही अखाड़े के लिखित बयान के हवाले से कहा- द्वार को लेकर भी बड़ा विवाद था. 13 दिसंबर 1877 में विवादित इमारत की एक बाहरी दीवार में एक दरवाज़ा सिंहद्वार बनाया गया था ताकि दोनों के लिए अलग अलग प्रवेश निकास हों.

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विवादित इमारत में आकृतियों के सवाल पर धवन ने जवाब दिया कि बाहर रामजन्मस्थान यात्रा का पत्थर लगा है. ये यात्रा 1901 में हुई थी. उन्होंने 1990 में खींची खंबों की तस्वीर लगाई है. कसौटी खंबे कहां से आए? कुछ कहते हैं नेपाल से आए, कुछ श्रीलंका से कुछ कहते हैं वहीं थे. देवताओं की आकृतियां कहीं नहीं हैं. कमल और फूल तो इस्लामिक आर्ट में भी हर कहीं हैं. कसौटी खंबे छत को सपोर्ट करने को नहीं बल्कि सजावटी हैं. सजावटी कलाकृतियों को ही हिन्दू बताया जा रहा है.

जस्टिस बोबड़े ने पूछा, ''क्या किसी मस्जिद में ऐसी कमल या ऐसी अन्य आकृतियां हैं? क्योंकि हाईकोर्ट ने भी इसको मान्यता दी है.'' इस पर धवन ने कहा, ''कुतुब मीनार के पास की मस्जिद में हैं. हम किसी और जज की मान्यता पर नहीं जा रहे. उस ज़माने में राजा, सुल्तान, नवाब का कहा ही कानून होता था. गैर कुरानिक कार्य करने वाला राजा भी गैर इस्लामिक माना जाता था. पश्चिमी दीवार पर न तो कोई आकृति थी और न ही सामने कोई कसौटी खंबा. यानी गैर इस्लामिक नमाज़ नहीं हुई.''

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फिर जस्टिस चन्द्रचूड़ ने कहा, ''समय के साथ सांस्कृतिक संगम भी तो होते हैं.'' जिस पर राजीव धवन ने कहा, ''आपकी ये बात हमारी दलील को मजबूत करती है. वहां नीचे मन्दिर था ये अलग दलील है लेकिन यहां बहस मन्दिर तोड़ने को लेकर है. सिर्फ चिह्न मिलने से देवता वहां थे इसकी पुष्टि कैसे होती है? ये तो इस पर निर्भर करता है कि अंदर प्रार्थना का तरीका कैसा है! सच्चाई यही है अंदर मस्जिद और बाहर राम चबूतरा था. अंग्रेजों ने अलग दरवाज़ा बनाकर अमन कायम रखा.''

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सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से पूछा, ''आप कब तक अपनी बहस पूरी कर लेंगे. आपको बहस करने के लिए और कितना समय चाहिए.'' साथ ही कोर्ट ने हिंदू पक्ष से भी पूछा कि उन्हें मुस्लिम पक्ष द्वारा दी गई दलील पर अपना पक्ष रखने के लिए कितना समय चाहिए. संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे CJI जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अगर एक बार सभी पक्षों कितना समय लेंगे ये बता देते है तो हमें भी पता चल जाएगा कि हमें कितना समय मिलेगा फैसला लिखने के लिए. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि वो "इस मामले में फ़ैसला चाहते है."

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