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Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर सवाल उठाए

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुस्लिम पक्षकारों से कहा कि एएसआई की रिपोर्ट को लेकर जो आपत्ति आप यहां उठा रहे हैं, आपने ट्रायल के दौरान तो ये बातें कही नहीं

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Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर सवाल उठाए

अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 31 वें दिन की सुनवाई हुई.

खास बातें

  1. संविधान पीठ ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि आपकी दलीलें जोरदार नहीं
  2. जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि ASI की रिपोर्ट न मानने का आधार क्या है?
  3. मुस्लिम पक्ष की ओर से एएसआई की रिपोर्ट पर मीनाक्षी अरोड़ा ने की बहस
नई दिल्ली:

अयोध्या केस (Ayodhya Case) में बुधवार को 31 वें दिन की सुनवाई हुई. अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट पर आपत्ति उठाने वाली दलील पर संविधान पीठ ने कहा कि आपकी दलीलें जोरदार नहीं हैं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट को लेकर जो आपत्ति आप यहां उठा रहे हैं आपने ट्रायल के दौरान तो ये बातें कही नहीं. इस मुद्दे पर आपकी दलीलें भी जोरदार और ठोस नहीं हैं. क्योंकि कोर्ट ऐसे मुद्दे पर जब विशेषज्ञों की कोई कमेटी बनाती है तो उसमें कोई भी कमी या गलती हो तो या तो कोर्ट उस बारे में बताए, या फिर पक्षकार बताएं. तभी विशेषज्ञ उसका जवाब दे सकते थे. इस रिपोर्ट को लेकर उस समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था. लिहाजा सीपीसी के नियम 26 के मुताबिक भी हम इसे यहां यानी पहली अपील में नहीं सुन सकते. मुस्लिम पक्षकारों की ओर से ASI की रिपोर्ट पर मीनाक्षी अरोड़ा वे आपत्तियां जता रही थीं जो ट्रायल के दौरान कोर्ट के संज्ञान में नहीं लाई गईं. अरोड़ा ने कहा कि वे गुरुवार को इसका जवाब देंगी.

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील जफरयाब जिलानी ने दलीलें दीं. उन्होंने कहा कि सन 1858 में पहली बार सिख निहंग मस्जिद वाली इमारत में जबरन घुसे और पाठ शुरू किया था. मना करने पर वे नहीं हटे तो दरोगा और पुलिस ने उनको जबरन बाहर किया. तब पहली बार कोई गैर मुस्लिम उस इमारत में उपासना के लिए दाखिल हुआ था. जिलानी की दलीलें पूरी होने के बाद भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण, यानी कि आर्कियालॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से मीनाक्षी अरोड़ा ने बहस की.


मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि मस्जिद 1528 से थी, लेकिन कई तरह के सबूत मिले हैं. सबूत मौखिक भी हैं और वैज्ञानिक भी, लेकिन उन पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि यहां मामला सामाजिक विज्ञान से भी जुड़ा है. कुछ लोगों को रामजन्म स्थान का विश्वास है लेकिन 1528 में कुछ हुआ था.अरोड़ा ने हाईकोर्ट के फैसले के हवाले से कहा- 1885 में जिला जज ने भी यह पाया था कि महंत रघुबर दास ने मंदिर बनाया था. मस्जिद ऐसी जगह पर बनाई जो हिंदुओं के लिए पवित्र थी. लेकिन 356 साल  हो गए हैं. लिहाजा अब इस मामले में कुछ करने से शांति भंग होगी. लिहाजा दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखें.

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जफरयाब जिलानी की आंखों में मोतियाबिंद होने की वजह से उन्हें देखने में दिक्कत है. लिहाजा कोर्ट में कई दस्तावेज इनकी जूनियर आकृति ने पढ़े.  उन्होंने ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत का उल्लेख करते हुए कहा कि विक्रमादित्य के बनाए मंदिर और बौद्ध मठ, स्मारक अयोध्या में थे. मंदिरों के इस शहर में सारे मंदिर हिंदुओं के नहीं थे.

मीनाक्षी अरोड़ा ने एएसआई की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्षकारों की ओर से बहस की. मीनाक्षी अरोड़ा ने ASI की रिपोर्ट और खुदाई में मिले सामान पर दलीलें दीं. उन्होंने कहा कि उन अलग-अलग यात्रियों के वर्णन में भी मंदिर, ढांचे, खंबों को लेकर कई विरोधाभास हैं. जब मस्जिद बनाई गई तो वहां खाली जगह थी. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि जीर्णोद्धार का मतलब यह भी हो सकता है कि वहां बहुत पुराना ढांचा रहा हो जहां यह मस्जिद बनाई गई.

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अरोड़ा ने कहा कि 1528 से 1992 तक मस्जिद का अस्तित्व था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इसमें दो तर्क हो सकते हैं, अव्वल तो निर्जन पड़े जीर्ण मंदिर की जगह मस्जिद बनाई गई, या फिर बिल्कुल खाली जमीन पर बनाई गई. आप इस पर अपनी बात रखें. अरोड़ा ने कहा कि हिंदुओं का दावा है कि महाराजा विक्रमादित्य के समय रामजन्म भूमि मंदिर बनाया गया था. उसमें कसौटी पत्थर के खंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां थीं. उन्हें ध्वस्त कर उसके अवशेषों के साथ मस्जिद बनाई गई. इसमे एएसआई की रिपोर्ट भी मौखिक, यात्रा वृत्तांत और खुदाई में मिली चीज़ों का रसायनिक विश्लेषण है. ASI के खुदाई में विशेषज्ञ भुवन विक्रम सिंह थे. हाईकोर्ट ने उनसे भी पूछताछ की लेकिन कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकारों को उनसे जिरह की इजाजत नहीं दी.  बाद में एएसआई रिपोर्ट को ठोस सबूत माना और फैसले में इसका जिक्र भी किया.

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हाईकोर्ट ने भी इस मामले में कुछ नहीं कहा कि मस्जिद बाबर ने बनाई या औरंगजेब ने. मैं भी इसमें नहीं पड़ूँगी. जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि ASI की रिपोर्ट न मानने का आधार क्या है? जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि मंदिरों के जीर्णोद्धार की भी परंपरा रही है. पुराने जीर्ण मंदिरों को उसी स्थान पर सिरे से बनाया जाता है. क्या जीर्ण मंदिर की जगह पर बनाई मस्जिद? ये तो हिन्दू पक्ष को बताना पड़ेगा कि वहां मंदिर था. वो सबूत दें. किसी यात्री के वृतांत से यह कैसे साबित होगा कि उसे किसी ने बताया था कि वहां एक मंदिर था.

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मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि रिपोर्ट पर दस्तखत नहीं हैं. सीजेआई ने कहा कि हालांकि वह रिपोर्ट कोर्ट का रिकॉर्ड बन गई थी, उस पर तो नाम छपे हैं. आपकी आपत्ति उसके लेखक को लेकर है. आप रिपोर्ट के दसवें चैप्टर को लेकर दलील देना चाहती हैं तो दें. जस्टिस भूषण ने कहा कि उस रिपोर्ट पर हरि मांझी और बीआर मणि के नाम छपे हैं, क्योंकि रिपोर्ट पर उनके दस्तखत हैं. ये तो ASI ने नाम छापकर मान लिया है कि यह साझा रिपोर्ट है. चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने रिपोर्ट के दसवें अध्याय, जिसमें रिपोर्ट का निष्कर्ष है, को लेकर आपकी इस आपत्ति का संज्ञान लिया है. हम देखेंगे कि रिपोर्ट के साथ कोई फारवर्ड लेटर था या नहीं. अब आप अगला पॉइंट बताएं.

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हिन्दू पक्षकारों ने यह नहीं बताया कि वहां मंदिर किसने और किस काल में बनाया? विक्रमादित्य तो कई राजाओं की पदवी रही, लिहाज़ा ये दावा ठोस नहीं है. 85 खंभे की बात कही गई जिनमें से एएसआई ने 50 को ही देखा और 12 को पूरी तरह एक्सपोज़ किया. बाकी को थोड़ा बहुत देखकर छोड़ दिया था. खुदाई के दौरान ज़मीन के भीतर से मिले सबूत का कालखंड निर्णय जरूरी है जिससे निर्माण काल का पता चलता है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हालांकि यहां इसकी क्या अहमियत होगी? अरोड़ा ने कहा कि हो सकता है नीचे कोई मंदिर जैसा ढांचा हो, लेकिन उसे तोड़कर ही मस्जिद बनाई गई इसका कोई सबूत नहीं है.

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जस्टिस बोबड़े ने कहा, लेकिन नीचे मंदिर का ढांचा तो मिला है. उसके निर्माण के कालखंड की अहमियत उतनी नहीं है. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि वहां खुदाई की जगह पश्चिमी छोर पर 50 मीटर लंबी मोटी दीवार मिली. वह ईदगाह की दीवार होगी. ईदगाह बस्ती के बाहर होती थी, जहां मुस्लिम बड़ी तादाद में ईद बकरीद की नमाज़ अदा करते थे. जस्टिस भूषण ने कहा कि आपकी दलीलों में ईदगाह का कहीं ज़िक्र नहीं है जैसा कि हिन्दू मंदिर होने की प्लीडिंग देते रहे हैं.

मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व रिपोर्ट में कहा गया है कि खंभे अलग-अलग समय के हैं. कोई 6AD और कोई 7AD का है. कोई बड़ा और छोटा तथा अलग-अलग दूरी पर स्थित हैं. ऐसे में खुदाई के बाद जिन खंभों की बात की जा रही है वह मंदिर के थे, यह स्पष्ट नहीं है. चीफ जस्टिस ने कहा कि आप जो भी दलीलें दे रहीं हैं वो आपके दावे से संबंधित हैं, क्या इनका औचित्य है? अरोड़ा ने कहा कि मेरा तात्पर्य यह है कि रिपोर्ट सही नहीं है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप क्यों पुरातत्व विशेषज्ञों की राय को नकार रहीं हैं, जबकि उन्होंने अदालत के आदेश पर प्रक्रिया के अनुरूप काम किया.

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