कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधियों को इजाजत मिला, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर

मशहूर वैद्य पद्मभूषण देवेंद्र त्रिगुणा ने कहा - आयुर्वेद और योग दोनों मिलकर कोरोना संक्रमण से भारत के लोगों को निजात दिला सकते हैं

कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधियों को इजाजत मिला, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर

मशहूर वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा.

नई दिल्ली:

Coronavirus: केंद्र सरकार ने मंगलवार को कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी. यानी अब आयुर्वेदिक औषधियों के जरिए कोरोना मरीज़ों का उपचार नेशनल कोविड मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का हिस्सा बन गया है. भारत के लिए इसलिए भी यह खुशी की बात है क्योंकि आयुर्वेद का उद्गम भारत में ही हुआ था. इस मौके पर मशहूर वैद्य पद्मभूषण देवेंद्र त्रिगुणा ने कहा कि ''भारत और भारत के लोगों के लिए कोविड चिकित्सा में यह बहुत बड़ी बात है. मैंने प्रधानमंत्री जी, और अलग-अलग स्तर पर हुई बैठकों में शुरू से यह कहा था कि हमारी जो आयुर्वेदिक औषधियां हैं और रसायन हैं उनका हमारे लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में फायदा होगा.''

देवेंद्र त्रिगुणा ने कहा कि ''भारत सरकार ने जो कमेटी बनाई थी उसकी रिपोर्ट कहती है कि इसका बहुत अच्छा प्रभाव है. भारत सरकार ने जो प्रोटोकॉल जारी किया है उसके मुताबिक कोरोना हो जाने और इससे ठीक हो जाने के बाद भी दोनों स्थितियों में आयुर्वेदिक औषधि का बहुत अच्छा प्रभाव है. आयुर्वेद और योग दोनों मिलकर इस बीमारी से भारत के लोगों को निजात दिला सकते हैं लेकिन यह बताना बहुत जरूरी है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से इन औषधियों को ना ले, योग्य चिकित्सक की सलाह से ही औषधि लें. च्यवनप्राश, आयुष क्वाथ, मुलेठी, काली मिर्च आदि जैसी चीजें तो बिना किसी चिकित्सक की सलाह के ले सकते हैं लेकिन कोरोना होने पर औषधि चिकित्सक की सलाह से ही लें.''
 
उन्होंने कहा कि ''हमारे ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद से आज तक 175 मनीज ठीक होकर घर जा चुके हैं और बड़ी बात यह है कि वहां काम कर रहे किसी भी व्यक्ति को कोरोना नहीं हुआ, वरना तो सब अस्पतालों में वहां के कर्मचारियों को कोरोना होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि हम उन लोगों को आयुर्वेदिक औषधियां रोजाना दे रहे हैं.''

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त्रिगुणा ने कहा कि ''जैसे भारत सरकार ने मलेरिया की दवाई पूरी दुनिया को दी हैं उसी प्रकार इन औषधियों को भी कोविड खत्म करने के लिए बाकी देशों को देना चाहिए जो पूरा विश्व हमारा कुटुंब है उसको इस बीमारी से निजात मिल सके. बिना लक्षण, हल्के लक्षण वाले लोग टेस्ट जरूर कराएं और सरकार ने जो निर्देश दिए हैं उनका पालन जरूर करें. टेस्ट कराने के बाद अगर लक्षण नहीं है या हल्के लक्षण हैं तो चिकित्सक की मदद से हम इन औषधियों को लेकर ठीक हो सकते हैं. लेकिन अगर आपको ऑक्सीजन की समस्या होती है या हालत खराब होती है तब आप हॉस्पिटल में जरूर एडमिट हों और इसमें आप नीम हकीम ना बनें और गलत दावे ना करें.''

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उन्होंने कहा कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बिना चिकित्सक की सलाह के काढ़ा, च्यवनप्राश, दूध में हल्दी ले सकते हैं. दिन की शुरुआत में चवनप्राश है और सोते वक्त हल्दी वाला दूध पीने से व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. घर-घर में गिलोय हो रही है, इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि अब बाजार में आयुर्वेदिक औषधियों की कमी हो सकती है और इस समय हो भी रही है. आज की तारीख में बाजार में च्यवनप्राश का मिल रहा है या फिर गिलोय. काली मिर्च, पिपली, मुलेठी महंगी हो गई है. अश्वगंधा का एक्सपोर्ट कई गुना बढ़ गया है. अश्वगंधा, मुलेठी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत अच्छी चीज हैं. उन्होंने कहा कि नाक के अंदर अणु तेल लगाएं, गरारे करें. अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए सभी चीजें दूसरों के मुकाबले काफी सस्ती हैं और सरल हैं.