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नसीरुद्दीन शाह को मैं पूरे परिवार सहित भय मुक्त पतंजलि में रखने को तैयार हूं : बाबा रामदेव

पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने कहा है कि योग गुरु रामदेव को दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग़ जाने की इजाज़त नहीं दी है. उन्होंने कहा कि योग गुरु रामदेव शाहीन बाग़ जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जैसे ही इजाज़त मिलेगी वे जाएंगे.

नसीरुद्दीन शाह को मैं पूरे परिवार सहित भय मुक्त पतंजलि में रखने को तैयार हूं : बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने एनडीटीवी के शो 'मुकाबला' में खास बातचीत की है.

नई दिल्ली: पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने कहा है कि योग गुरु रामदेव को दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग़ जाने की इजाज़त नहीं दी है. उन्होंने कहा कि योग गुरु रामदेव शाहीन बाग़ जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जैसे ही इजाज़त मिलेगी वे जाएंगे. इससे पहले योग गुरु रामदेव ने NDTV इंडिया के मुक़ाबला कार्यक्रम में कहा था कि वो शनिवार को शाहीन बाग़ जाएंगे. नागरिकता क़ानून का समर्थन करते हुए भी उन्होंने साफ़ किया कि भारत से किसी मुसलमान को निकाला नहीं जा सकता. साथ ही उन्होंने कहा कि वे किसी के पक्ष और विपक्ष में नही हैं और अपनी बात रखेंगे. योगगुरु बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने शुक्रवार को एनडीटीवी के शो 'मुकाबला' में खास बातचीत की. इस दौरान नागरिकता संशोधन कानून (CAA), जम्मू कश्मीर में इंटरनेट और फोन कॉलिंग प्रतिबंध, जेएनयू सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी.

बाबा रामदेव ने कहीं 20 बड़ी बातें

  1. यह देश जितना BJP और नरेंद्र मोदी का है, उतना ही विपक्ष का भी, ऐसे आंदोलन से विदेश में देश की बदनामी होती है. 

  2. सड़क के ऊपर धरना प्रदर्शन ठीक नहीं है. जितना हिन्दू को रहने का अधिकार है उतना ही मुस्लिमों को भी इस देश में रहने का अधिकार है. उन्हें डर क्यों है? देश में काल्पनिक भय तैयार किया जा रहा है.''

  3. आंदोलन के मुद्दे न्यायपूर्ण और संवैधानिक होने चाहिए. क्या हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के लिए बना है या फिर बाहर के लिए लोगों के लिए. 

  4. मैं तो कहता हूं कि एक भी बाहर का नागरिक बुलाने की जरूरत नहीं, अपने यहां पर्याप्त है और उनके ऊपर नियंत्रण करें. बाहरी जो लोग प्रताड़ित होते है तो वहां कहां जाएंगे?'

  5. इसे (CAA) पॉलिटिसाइज (राजनीति के बारे में कहना) किया जा रहा है. मैं भाईचारा मानने वाला आदमी हूं. 

  6. कुछ लोग हिंदुओं में भी सिरफिरे हैं, जो आपस में नफरत है जो आपस में झगड़े कराते हैं, कुछ मुस्लिम में भी ऐसे हैं. हमारे मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन बाकी हम एक हैं. 

  7. कर्म को धर्म को मानता हूं. एक बात के लिए एनडीटीवी की तारीफ करता हूं. एनडीटीवी कोई अंधविश्वास नहीं फैलाता इस बात के लिए बधाई देता हूं.

  8. देश के मुसलमानों को कोई भी बाहर नहीं कर सकता. देश में अवैध नागरिक नहीं आनी चाहिए. यदि यहां अवैध नागरिक है और अवैध गतिविधि कर रहा है तो उसको पकड़कर जेल में डालना चाहिए. 

  9. यदि अवैध नागरिक की संख्या अधिक होगी तो लाखों-करोड़ों लोगों को रखेंगे कहां? शरणार्थी कैंप में अगर उन्हें रखा गया तो उन्हें खिलाएगा कौन. आगे से अवैध नागरिक न आए, इसके लिए कानून बनाने की जरूरत है. 

  10. प्रदर्शन करने वाले हिंसक, भारत की बर्बादी के नारे और भारत विरोधी आजादी के नारे लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. 

  11. आजादी का मतलब पहनने, खाने-पीने आदि में कोई दिक्कत नहीं. आजादी से दूसरों की आजादी बाधित नहीं होनी चाहिए. मैं असर-कारी होकर भी अ-सरकारी हूं.'

  12. मैंने 2 लाख लोगों को रोजगार दिया, करीब 5 लाख किसान मेरे साथ जुड़े हैं, और 5 लाख लोगों को रोजगार देने की योजना अभी भी है. मेरी कोई लग्जरी लाइफ नहीं और कोई वाइफ नहीं.'

  13. यदि मैं इस देश में आर्थिक प्रगति कर रहा हूं तो इससे देश का ही हित है. इससे अर्थव्यवस्था में देश को मदद ही मिल रही है. हमने विदेशी ब्रांड के सामने देशी ब्रांड खड़ा करके अच्छा ही किया. 

  14. मैं FDI का विरोधी था और रहूंगा. मैं किसी सरकार का एजेंट नहीं. देश का पैसा बाहर नहीं जाना चाहिए. अपना देश नेचुरल रिसोर्जेस से भरा पड़ा हुआ है, उसका दोहन नहीं होना चाहिए और भ्रष्टाचार या घोटाला नहीं होना चाहिए. 

  15. आज जितनी हम अर्थव्यवस्था में बैठे हैं उससे 5 गुनी ज्यादा हो सकती है मात्र 10 सालों में. देश में बिजनेस की रिस्पेक्ट होनी चाहिए. अर्थव्यस्था पर में सरकार को प्रजेंटेशन को दूंगा.'

  16. नसीरुद्दीन शाह को मैं पूरे परिवार सहित भय मुक्त पतंजलि में रखने को तैयार हूं. वो अपनी फिल्म शूटिंग के लिए जाएं और वापस पतंजलि में आकर रहें.

  17. जम्मू-कश्मीर में अब तक कितने लोगों की शहादत हो चुकी है. वहां लोग एक-दूसरे को मार रहे हैं. रोज पत्थरबाजी और आंतकी गतिविधियां हो रही है. 

  18. किस तरह से वहां (जम्मू-कश्मीर) हजारों कश्मीरों पंडितों को निकाल दिया गया था, तो क्या यह डेमोक्रेसी थी. वहां पर कुछ समय के लिए तकलीफे झेली जा सकती हैं, लेकिन लंबे समय के लिए नहीं होनी चाहिए.'