NDTV Khabar

पंजाब में धारा 370 के लिए जश्न या प्रदर्शन पर लगी रोक, बढ़ाई गई कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा

राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पंजाब पुलिस को राज्य में गड़बड़ी पैदा करने की पाकिस्तान की किसी कोशिश को नाकाम करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
पंजाब में धारा 370 के लिए जश्न या प्रदर्शन पर लगी रोक, बढ़ाई गई कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा

खास बातें

  1. पाकिस्तान से लगी पंजाब सीमा पर बढ़ाई गई सुरक्षा
  2. राज्य में रह रहे 8000 कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश
  3. अमरिंदर सिंह ने कहा सरकार संसद के माध्यम से लाए प्रस्ताव
चंडीगढ़:

जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने संबंधी केंद्र के फैसले के बाद देश भर में कई लोगों के बीच जश्न का माहौल है वहीं पंजाब ने स तरह के जश्न और प्रदर्शन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है. राज्य में माहौल बिगाड़ने वाले किसी तरह के जश्न या प्रदर्शन पर सोमवार को रोक लगाई गई है. राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पंजाब पुलिस को राज्य में गड़बड़ी पैदा करने की पाकिस्तान की किसी कोशिश को नाकाम करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है. साथ ही उन्होंने जम्मू कश्मीर की सीमा से लगे पंजाब के जिलों में सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है. अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘पाकिस्तान इसे हल्के में नहीं लेगा और भारत के खिलाफ कुछ हरकत करेगा.' उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस को किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है. 

लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा के बाद BJP कार्यकर्ताओं ने कुछ यूं मनाया जश्न, देखें VIDEO


टिप्पणियां

कैप्टन ने अनुच्छेद 370 रद्द किये जाने संबंधी कदम के मद्देनजर राज्य में कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की है. उन्होंने पंजाब में रह रहे 8,000 कश्मीरी छात्रों के लिए सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है.  साथ ही सभी पुलिस अधीक्षकों और उपायुक्तों को इनसे मिलने तथा उनसे व्यक्तिगत रूप से बात करने को कहा है. 
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के अंदर और बाहर रह रहे लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. 

वहीं धारा 370 को लेकर उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि इसे पहले संसद में लाकर चर्चा करें. इसके बाद अगर इसे दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत मिल जाता है, तो 35 ए या 370 कुछ भी हटा या कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन इस तरह से एकतरफा बिना कश्मीरी लोगों, राजनीतिक पार्टियों से परामर्श कर या बिना संसद के माध्यम से इसका प्रस्ताव लाया जाना संविधान के खिलाफ है.  (इनपुट-एजेंसियां)
 



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement