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बैंकों के 25 करोड़ रुपये से अधिक राशि के 2043 कर्जदारों पर 6 लाख करोड़ बकाया

वित्त मंत्री ने कहा- बैंकों द्वारा पारदर्शी पहचान के परिणामस्वरूप दबावग्रस्त खातों को एनपीए के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया

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बैंकों के 25 करोड़ रुपये से अधिक राशि के 2043 कर्जदारों पर 6 लाख करोड़ बकाया

वित्त मंत्री पियूष गोयल.

नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर 2018 तक देश में बैंकों के 2043 कर्जदार ऐसे थे जिन पर सरकारी क्षेत्र के बैंकों की 25 करोड़ रुपये से अधिक की गैर निष्पादक आस्तियां (एनपीए) बकाया थीं. इन कर्जदारों पर बकाया राशि कुल 6,84,824 करोड़ रुपये है.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी देते हुए बताया कि आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक सरकारी क्षेत्र के बैंकों की दबावग्रस्त संपत्तियों में अचानक हुई वृद्धि के कारणों में अन्य बातों के अलावा आक्रामक उधार पद्धति, इरादतन चूक या ऋण धोखाधड़ी और कुछ मामलों में भ्रष्टाचार तथा आर्थिक मंदी है.

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गोयल ने बताया कि संपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (एक्यूआर) से एनपीए में बढ़ोतरी का पता चलने के बाद बैंकों द्वारा पारदर्शी पहचान के परिणामस्वरूप दबावग्रस्त खातों को एनपीए के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया. इसके अलावा दबावग्रस्त ऋणों से हुई अनुमानित हानि के आकलन के प्रावधान करते हुए वित्तीय वर्ष 2017-18 में दबावग्रस्त ऋणों की पुनर्संरचना संबंधी सभी योजनाओं को वापस भी ले लिया गया.


उन्होंने आरबीआई के आंकड़ों के हवाले से बताया कि सरकारी बैंकों का 31 मार्च 2015 तक एनपीए 2,79,016 करोड़ रुपये था जो पिछले साल 31 मार्च को बढ़कर 8,95,601 करोड़ रुपये हो गया. एनपीए की वसूली और भुगतान के लिए शुरु की गई समाधान योजना के परिणामस्वरूप यह घटकर 8,64,433 करोड़ रुपये रह गया.
(इनपुट भाषा से)


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