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रेगिस्‍तान में थार मरुस्‍थल के बीच देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क बटोर रहा सुर्खियां

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भड़ला में बन रहा सोलर पार्क स्‍वच्‍छ ऊर्जा की दिशा में भारत का सबसे बड़ा प्रयास है.

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रेगिस्‍तान में थार मरुस्‍थल के बीच देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क बटोर रहा सुर्खियां

भड़ला सोलर पार्क

खास बातें

  1. 1000 से ज़्यादा इंजीनियर, तकनीशियन और मजदूर 24 घंटे यहां काम करते हैं
  2. 400 किलोवाट के ग्रिड सब स्‍टेशन से ऊर्जा पूरे राज्य में पहुंचाई जाती है
  3. जब यह पूरी तरह से चालू हो जायेगा तो इसमें 2255 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा
रेगिस्तान के बीच में भड़ला एक ऐसी जगह है जिसका नाम कम ही लोगों ने सुना होगा. यहां पर्यटक नहीं जाते और कम बारिश के चलते खेती भी ना के बराबर है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भड़ला को लेकर चर्चा है क्योंकि यहां हाल ही में ऑक्शन हुआ 250 मेगावाट का सोलर पावर प्रोजेक्ट सबसे कम दामों में बिका. दक्षिण अफ्रीका की फेलन एनर्जी ने यहाँ ऑक्शन 2.62 रुपये प्रति किलोवाट की देर पर जीता जोकि कोयले से भी कम है

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भड़ला में बन रहा सोलर पार्क स्‍वच्‍छ ऊर्जा की दिशा में भारत का सबसे बड़ा प्रयास है. यह देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क है. 10 हज़ार एकड़ यानी 40 वर्ग किमी रेगिस्तान के बीच में फैली ये बंजर भूमि अब सौर ऊर्जा की खान है. यहां से दूर-दूर तक जहां तक नज़र पहुंचती है, सिर्फ सूरज की रौशनी को क़ैद करने वाले सोलर पैनल दिखाई देते हैं. रेगिस्तान में बिछे ये सोलर पैनल भड़ला सोलर पार्क का हिस्सा है. देश का यह सबसे बड़ा सोलर पार्क जब पूरी तरह से चालू हो जायेगा तो इसमें 2255 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा फिलहाल यहां सूरज की रौशनी से 480 मेगावाट  बिजली तैयार हो रही है

1000 से ज़्यादा इंजीनियर, तकनीशियन और मजदूर 24 घंटे यहां काम करते हैं. 11 सोलर प्‍लांट ने बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है. सभी जगह से बिजली एक ग्रिड पर आती है, और फिर इससे एकत्र होकर एक 400 किलोवाट के ग्रिड सब स्‍टेशन से ऊर्जा पूरे राज्य में पहुंचाई जाती है. यहां संभावनाएं बहुत हैं. इसको देखते हुए एक ग्रीन कॉरीडोर तैयार किया जा रहा है ताकि यहां से बिजली उन राज्‍यों तक पहुंचे जहां जरूरत है.  

लेकिन स्थानीय लोगों के लिए इस मरू प्रदेश में भड़ला ने आजीविका के साधन उपलब्ध करवाए हैं. "पहले यहाँ पशुपालन के अलावा कोई आजीविका का साधन नहीं था, अब यहाँ लेबर, सेक्‍योरिटी गार्ड, और जो पढ़े लिखे है उन सबको नौकरियां मिल रही है.''  ऐसा कहा प्रवीण सिंह राठौर ने जो पास के नागौर ज़िले से हैं और विक्रम सोलर में मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं.  

ऐसा ही एक उदाहरण है 26 साल का रोहिताश. यह पिछड़े हुए बिश्नोई समुदाय से है.  लेकिन सोलर में अवसर देखते हुए रोहिताश ने पास के एक कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. अब वो विक्रम सोलर में नौकरी करता है और 40 हजार रुपये रुपये महीना कमाता है. इस मसले पर रोहिताश बिश्‍नोई का कहना है," पश्चिमी राजस्थान में पहले लोग या तो सरकारी नौकरी की तरफ जाते थे या फिर पुलिस में भर्ती होने की कोशिश करते थे, अब मेरे सामने मैंने देखा है की पिछले 4  साल में 100 से ज़्यादा युवाओं ने टेक्निकल कोर्स में दाखिला लिया है और यहां से लोकल 40 इंजीनियर इस सोलर पार्क में अलग अलग प्लांट में नौकरी कर रहे हैं.


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