भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस भट्ट ने खुद को किया अलग, अब तक पांच जज हो चुके हैं अलग

नवलखा ने जनवरी 2018 में पुणे पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज FIR को खारिज करने की मांग की थी.

भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस भट्ट ने खुद को किया अलग, अब तक पांच जज हो चुके हैं अलग

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गौतम नवलखा की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस एस रविंद्र भट्ट ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. अब तक तीसरी बेंच ने किया सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. अब तक कुल पांच जजों ने सुनवाई से खुद को अलग किया है. शुक्रवार को दूसरी बेंच सुनवाई करेगी. शुक्रवार को ही हाईकोर्ट का सरंक्षण खत्म हो रहा है. इससे पहले CJI रंजन गोगोई और फिर तीन जजों की पीठ ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. 

13 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा और माओवादियों के साथ कथित जुड़ाव के लिए गौतम नवलखा के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने से इनकार करते हुए कहा था कि मामले में प्रथम दृष्टया तथ्य दिखता है.न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने कहा था, मामले की व्यापकता को देखते हुए हमें लगता है कि पूरी छानबीन जरूरी है. पीठ ने कहा कि यह बिना आधार और सबूत वाला मामला नहीं है. 

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पीठ ने नवलखा की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी थी, जिन्होंने जनवरी 2018 में पुणे पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज FIR  को खारिज करने की मांग की थी. एल्गार परिषद द्वारा 31 दिसंबर 2017 को पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव में कार्यक्रम के एक दिन बाद कथित रूप से हिंसा भड़क गई थी. पुलिस का आरोप है कि मामले में नवलखा और अन्य आरोपियों का माओवादियों से जुड़ाव था और वे सरकार को उखाड़ फेंकने की दिशा में काम कर रहे थे. अदालत ने कहा, अपराध भीमा-कोरेगांव हिंसा तक सीमित नहीं है  इसमें कई पहलू हैं. इसलिए हमें जांच की जरूरत लगती है.

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