बिहार चुनाव: तेजस्वी यादव के दावे से घबराई BJP ने नीतीश कुमार को तीसरे दिन ही दिखाया आईना

Bihar Assembly Elections 2020: बीजेपी ने नीतीश कुमार को उस बयान पर भी चुप करा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य लैंडलॉक स्टेट है, इस वजह से यहां उद्योग-धंधे नहीं लग सकते.

बिहार चुनाव: तेजस्वी यादव के दावे से घबराई BJP ने नीतीश कुमार को तीसरे दिन ही दिखाया आईना

बिहार विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का संकल्प पत्र जारी करते बीजेपी के नेतागण.

नई दिल्ली:

बिहार विधान सभा चुनावों (Bihar Assembly Elections) में रोजगार का मुद्दा गरमाया हुआ है. जब राजद नेता और विपक्षी महागठबंधन के सीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने नई कैबिनेट की पहली मीटिंग में 10 लाख सरकारी नौकरी पर मुहर लगाने का वादा किया तो सभी सियासी दलों में हड़कंप मच गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले तेजस्वी को अनुभवहीन और कुछ भी कहने वाला बताया. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को क,ख,ग, घ भी नहीं पता है लेकिन कुछ से कुछ अनर्गल बात करते रहते हैं. जब उन्हें लगा कि उनके तीर काम नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने भरी जनसभा में मंगलवार (20 अक्टूबर) को तंज कसा कि पैसा कहाँ से लाओगे.. जेल से या नक़ली नोट छापोगे?

इसके अगले दिन बुधवार (21 अक्टूबर) को उनके सहयोगी उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने भी नीतीश कुमार के सुर में सुर मिलाया. मोदी ने ट्वीट कर पूछा, "10 लाख नौकरी देने की ढपोरशंखी घोषणाओं के लिए अतिरिक्त 58 हजार करोड़ कहां से लाएगा विपक्ष? वर्तमान कर्मियों के वेतन में 52,734 करोड़ का व्यय, 10 लाख और बहाली हो तो वेतन पर होगा 1 लाख 11 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च." उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी राजद विकास के सारे काम को बंद करना चाह रहा है.

10 लाख जॉब पर नीतीश का तंज- 'पैसा कहाँ से लाओगे..जेल से? पर तेजस्वी का जवाब

बीजेपी नेता ने तो यहां तक कहा और सोशल मीडिया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा कि जब विपक्ष वेतन पर ही बजट का अधिकांश भाग खर्च करेगा तो फिर पेंशन, छात्रवृति, साइकिल, पोशाक, मध्यान्ह भोजन, कृषि अनुदान, फसल सहायता, पुल-पुलिया व सड़क निर्माण, बिजली-पानी आदि तमाम योजनाओं के लिए पैसे कहां से लाएगा? उन्होंने लिखा कि बजट का वर्तमान आकार 2,11 761 करोड़ का है. ऐसे में अगर 10 लाख नए रोजगार पर वेतन पर ही 1.11 लाख करोड़ खर्च होगा तो ब्याज चुकाने, पुराने कर्ज का भुगतान करने समेत अन्य खर्चे कहां से आएगा?

इतने पर भी जब भाजपा को लगा कि तेजस्वी का दांव राज्य के युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है और उनकी जनसभाओं में भारी भीड़ उमड़ रही है तो इसके अगले दिन यानी गुरुवार (22 अक्टूबर) को भाजपा को अपने चुनावी घोषणा पत्र, जिसे वह संकल्प पत्र कहती है, में 19 लाख नौकरियां और रोजगार देने का ऐलान करना पड़ा. हालांकि, भाजपा मात्र चार लाख लोगों को नौकरी और बाक़ी पंद्रह लाख लोगों को रोजगार देने की बात कर रही है जबकि तेजस्वी ने 10 लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने का वादा किया है. 

नीतीश ने तेजस्वी से पूछा- नौकरी दीजिएगा तो तनख्वाह का पैसा जेल से आएगा, या नकली नोट छापिएगा?

भाजपा ने संकल्प पत्र जारी करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सामने ला खड़ा किया. शायद देश के खजाना मंत्री को सामने लाकर बीजेपी संदेश देना चाहती थी कि पैसे की कमी हुई तो केंद्र सरकार साथ है. हालांकि, पीएम मोदी द्वारा पिछले विधान सभा चुनाव में किए गए वादे के अनुसार बिहार को अभी तक सवा लाख करोड़ का पैकेज मिलना बाकी है.

बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में पांच सूत्र, 1 लक्ष्य और 11 संकल्पों की घोषणा की. इसके तहत 3 लाख नई नौकरियां शिक्षा क्षेत्र में, एक लाख नौकरियां हेल्थ सेक्टर में देने का प्रस्ताव है, जिसमें 50 हजार पारा मेडिकल और 10 हजार डॉक्टर्स की बहाली शामिल है. बीजेपी ने बिहार को अगले पांच सालों में आईटी हब बनाने की बात कही है, इसके जरिए पांच लाख लोगों को नौकरी व रोजगार देने की बात कही गई है. बीजेपी के संकल्प पत्र के मुताबिक 10 लाख अन्य नौकरियां व रोजगार कृषि क्षेत्र में कृषि उत्पाद का हब बनाकर सृजित की जाएंगी.

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अब सवाल उठता है कि जो बीजेपी कल तक तेजस्वी के 10 लाख नौकरी के वादे को डपोरशंखी और हकीकत से दूर बता रही थी, और कह रही थी कि राज्य का बजट आकार से वह बाहर है, वही अब तेजस्वी के दावे से लगभग दोगुनी नौकरियों का दावा कैसे करने लगी? क्या बीजेपी ने तेजस्वी के दबाव में अपने स्टैंड और अपने गठबंधन के मुख्यमंत्री के वक्तव्य से यू-टर्न ले लिया है या फिर यह बीजेपी की एक सोची समझी चाल है, जिसके जरिए वो नीतीश कुमार को बैकफुट पर लाना चाहती है?

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बीजेपी ने नीतीश कुमार को उस बयान पर भी चुप्प करा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य लैंडलॉक स्टेट है, इस वजह से यहां उद्योग-धंधे नहीं लग सकते. अब बीजेपी ने यहां आईटी हब और एग्रीकचल्चर हब बनाने का ऐलान कैसे कर दिया? क्या बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र के जरिए नीतीश कुमार को आईना दिखाया है कि चाहत हो तो विकास के पहिए नहीं थम सकते. इसके जरिए बीजेपी कहीं नीतीश को कमजोर और थकाऊ सीएम साबित करने की फिराक में तो नहीं? ये अलग बात है कि बीजेपी नेता ये कहते नहीं अघा रहे कि सीटें चाहे जितनी भी आए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे.

वीडियो: बिहार के लिए BJP का घोषणा पत्र, पार्टी ने लिए '11 संकल्प'

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