बिहार के चुनावी मैदान में इस बार नहीं है बड़े नेताओं की गूंज, कुमार विश्वास ने कहा- 'चुनाव-विश्लेषक चौंक सकते हैं...'

कुमार विश्वास ने एक ट्वीट में लिखा, 'रामविलास जी, लालू जी, शरद यादव व रघुवंश बाबू जैसे पारंपरिक महारथियों की अनुपस्थिति में लड़ी जा रही पाटलिपुत्र की लड़ाई को एकतरफा समझ रहे चुनाव-विश्लेषक चौंक सकते है! मुखर युवा व ख़ामोश महिलाएँ निर्णायक हो सकती हैं! सीधा-साधा संवाद मतपेटी की कुंजी है,शेष तो जनता-जनार्दन ही जाने.'

बिहार के चुनावी मैदान में इस बार नहीं है बड़े नेताओं की गूंज, कुमार विश्वास ने कहा- 'चुनाव-विश्लेषक चौंक सकते हैं...'

बिहार चुनाव के नतीजों को लेकर कुमार विश्वास ने की टिप्पणी. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Elections 2020) के लिए वोटिंग शुरू होने में महज दो दिन बचे हैं. इस बार के चुनावों में राजनीतिक परिदृश्य काफी बदला हुआ है. बिहार के कई बड़े नेता इस बार चुनावी परिदृश्य में नहीं हैं. ऐसे में इसे लेकर कुमार विश्वास (Kumar Vishvas) ने टिप्पणी की है. उन्होंने यह भी कहा कि इस बारी के चुनावों में कौन निर्णायक वोटर बनकर उभर सकता है.

कुमार विश्वास ने एक ट्वीट में लिखा, 'रामविलास जी, लालू जी, शरद यादव व रघुवंश बाबू जैसे पारंपरिक महारथियों की अनुपस्थिति में लड़ी जा रही पाटलिपुत्र की लड़ाई को एकतरफा समझ रहे चुनाव-विश्लेषक चौंक सकते है! मुखर युवा व ख़ामोश महिलाएँ निर्णायक हो सकती हैं! सीधा-साधा संवाद मतपेटी की कुंजी है,शेष तो जनता-जनार्दन ही जाने.'

बता दें कि इस बार के चुनावों में एनडीए से दिवंगत नेता रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी अलग हो चुकी है और उनके बेटे चिराग पासवान पार्टी का चुनावी मैदान में नेतृत्व कर रहे हैं. हालांकि, एलजेपी केंद्र की मोदी सरकार में सत्ता साझा कर रही है. रामविलास पासवान का इसी महीने निधन हो चुका है. उनके अंतिम संस्कार और बाकी विधि-विधान करने के बीच ही चिराग पासवान ने चुनावी तैयारियां की हैं. उनके निशाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बने हुए हैं. 

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वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव जेल में हैं. उनके बेटे तेजस्वी यादव ने चुनावों की कमान संभाली है. तेजस्वी लगातार नीतीश कुमार पर हमले कर रहे हैं और बिहार में बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे उठा रहे हैं. 

बिहार की राजनीति में बड़ा नाम रहे आरजेडी के पूर्व नेता रघुवंश बाबू का भी इसी महीने निधन हुआ है. उन्होंने इलाज के दौरान, अपने निधन से कुछ दिन पहले ही पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया था. वहीं, लोकतांत्रिक जनता दल के अध्यक्ष शरद यादव की तबियत भी खराब चल रही है. लगभग एक महीने पहले उन्हें अचानक तबियत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 

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