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कर्नाटक विधानसभा चुनाव : भाजपा का 'मिशन 150' का लक्ष्य, येदुरप्पा करेंगे पूरे राज्य का दौरा

गौरतलब है कि कर्नाटक में दुरूह दिख रहे आंतरिक संकट को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने साध लिया है. प्रदेश कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में किसी तरह की राजनीतिक समस्या पेश नहीं आना पार्टी के लिये बड़ी राहत की बात है.

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव : भाजपा का 'मिशन 150' का लक्ष्य, येदुरप्पा करेंगे पूरे राज्य का दौरा

केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि येद्दयुरप्पा प्रदेश में पार्टी का चेहरा हैं. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. कर्नाटक चुनाव के लिए भाजपा ने कमर कसी
  2. येदुरप्पा होंगे पार्टी का चेहरा
  3. भाजपा का है मिशन-150 का लक्ष्य
नई दिल्ली: मोदी के विकास के मंत्र और 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे के साथ भाजपा ने कर्नाटक में 224 विधानसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव के संबंध में 'मिशन 150' हासिल करने के लिए कमर कस ली है. राज्य में कांग्रेस सरकार की ओर से किसान फसल कर्ज माफी योजना की घोषणा के बाद भाजपा येदियुरप्पा के नेतृत्व में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयासों में जुटी हुई है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्र में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का सुशासन एवं विकास का मॉडल सबके सामने है. हम कर्नाटक को एक बार फिर कांग्रेस मुक्त बनायेंगे और लोग हमारे सुशासन को समर्थन देंगे.'  उन्होंने कहा कि पूरे देश में नरेंद्र मोदी को जनादेश मिला है. ऐसे में निश्चित तौर पर भाजपा विकास और सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ कर्नाटक में सरकार बनाएगी. 

गौरतलब है कि कर्नाटक में दुरूह दिख रहे आंतरिक संकट को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने साध लिया है. प्रदेश कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में किसी तरह की राजनीतिक समस्या पेश नहीं आना पार्टी के लिये बड़ी राहत की बात है जो मिशन 150 के संकल्प के साथ खत्म हो गई. राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की राह पर चलते हुए प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येद्दयुरप्पा ने कर्नाटक के हर जिले में रुकने के लिए कार्यक्रम तय कर लिया है. यह दौरा लगातार 45 दिनों तक चलेगा.

केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि येद्दयुरप्पा प्रदेश में पार्टी का चेहरा हैं और उन्हें कमजोर करने की किसी की भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसी खातिर कुछ लोगों पर सख्त कार्रवाई भी हुई थी. येद्दयुरप्पा के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे ईश्वरप्पा और संगठन मंत्री बीएल संतोष के नजदीकियों की जिम्मेदारी छीनी गई थी. लेकिन शाह चाहते हैं कि चुनाव तक पार्टी में कोई खेमा न दिखे. इस लिहाज से कार्यकारिणी बैठक अहम थी.

 

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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