सैफ अली खान ने 'इंडिया की अवधारणा' को लेकर दिया बयान तो BJP की मीनाक्षी लेखी ने उनके बेटे तैमूर को लेकर कही ये बात

सैफ अली खान ने अपनी फिल्म 'तानाजी' को लेकर दिए गए एक इंटरव्यू में कहा है, 'मुझे नहीं लगता कि यह इतिहास है. मुझे नहीं लगता कि अंग्रेजों से पहले इंडिया की कोई अवधारणा थी.'

सैफ अली खान ने 'इंडिया की अवधारणा' को लेकर दिया बयान तो BJP की मीनाक्षी लेखी ने उनके बेटे तैमूर को लेकर कही ये बात

भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी.

लखनऊ:

भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने अभिनेता सैफ अली खान पर उनके भारतीय इतिहास पर की गई टिप्पणी को लेकर निशाना साधा है. इसके लिए लेखी ने सैफ अली खान के तीन साल के बेटे तैमूर के नाम का जिक्र किया है. 17 वीं सदी के महाराष्ट्रीयन सैन्य नेता की कहानी बताने वाली उनकी फिल्म 'तानाजी' के राजनीतिक संदर्भ में एक साक्षात्कार में एक सवाल के जवाब में, सैफ अली खान ने कहा था, 'मुझे नहीं लगता कि यह इतिहास है. मुझे नहीं लगता कि अंग्रेजों से पहले इंडिया की कोई अवधारणा थी.'

मीनाक्षी लेखी ने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'तुर्क भी तैमूर को क्रूर मानते थे. लेकिन कुछ लोग अपने बच्चों का नाम तैमूर के नाम पर रखते हैं.' यह पहली बार नहीं है कि सैफ अली खान और करीना कपूर के बेटे तैमूर के नाम को लेकर सवाल उठाए गए हैं. पहले भी इसको लेकर कई बार दक्षिणपंथी विचारधारा को मानने वाले लोगों ने ट्रोल किया है. 

इसके बाद सैफ अली खान ने कहा था, 'मुझे और मेरी पत्नी को यह नाम और इसका अर्थ पसंद है. मैं तुर्की शासक की विरासत से अवगत हूं-वह तैमूर था, मेरा बेटा तैमूर है, जो एक प्राचीन फारसी नाम है जिसका अर्थ है लोहा.' सैफ अली खान ने 2017 में मुंबई के अंग्रेजी अखबार मिरर से बातचीत में यह कहा था.

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वहीं, मीनाक्षी लेखी हालही माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला के द्वारा सीएए पर बयान देने को लेकर उन पर निशाना साधा था. लेखी ने कहा था कि पढ़े-लिखे लोगों को शिक्षित करने की आवश्यकता है. नडेला ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को भारत के लिए गलत बताया है, जिसके बाद भाजपा नेता ने प्रतिक्रिया दी है.

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लेखी ने इसे "साक्षर लोगों को शिक्षित होने की जरूरत" का एक सटीक उदाहरण बताते हुए ट्वीट किया, "सीएए को लाने का उद्देश्य बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए सताए हुए अल्पसंख्यकों को अवसर प्रदान करना है.'साथ ही उन्होंने कहा, 'कैसा हो यदि अमेरिका में यह अवसर यजीदियों के बजाय सीरियाई मुसलमानों को दिया जाए?'