BJP MP निशिकांत दुबे का पैर धोकर कार्यकर्ता ने पीया पानी, विवाद पर बोले- कृष्ण ने भी धोया था

झारखंड से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे कार्यकर्ता से पैर धुलवाने पर विवाद में घिरे तो बोले- क्या कृष्ण ने नहीं धोया था.

BJP MP निशिकांत दुबे का पैर धोकर कार्यकर्ता ने पीया  पानी, विवाद पर बोले- कृष्ण ने भी धोया था

झारखंड के गोड्डा से बीजेपी विधायक निशिकांत दुबे का बीजेपी कार्यकर्ता ने पैर धोकर पानी पीया.

नई दिल्ली:

झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीर से खूब ट्रोल हुए. वीडियो में पार्टी का एक कार्यकर्ता उनका पैर धोकर पानी पीता दिख रहा है. खुद सांसद ने ही यह तस्वीर अपने फेसबुक पर लगाई थी. कार्यकर्ता से पैर धुलवाने को लेकर विवाद पैदा हुआ तो भी बीजेपी सांसद ने इसमें कुछ भी गलत न बताते हुए कहा कि मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. दरअसल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे रविववार(16 सितंबर) को कनभारा पुल के शिलान्यास समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे. इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ता पंकज शाह ने कहा कि सांसद ने पुल का तोहफा देकर जनता पर बहुत उपकार किया है. इस नाते कसम के मुताबिक उनके चरण धोकर पीने का मन कर रहा है. फिर कार्यकर्ता ने थाली और पानी मंगाकर सांसद का पैर धोना शुरू कर दिया. सांसद निशिकांत दुबे ने भी बिना किसी एतराज के पैर धोने के लिए आगे बढ़ा दिया. इतना ही नहीं कार्यकर्ता ने पैर धोने के बाद पानी भी पी लिया. 

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इस वाकये की तस्वीर खुद सांसद ने अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट करते हुए लिखा-आज मैं अपने आप को बहुत छोटा कायकर्ता समझ रहा हूं. भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह जी ने पुल की ख़ुशी में हज़ारों के सामने पैर धोया व उसको अपने वादे पुल की ख़ुशी में शामिल किया,काश यह मौक़ा मुझे एक दिन माता पिता के बाद मिले, मैं भी कार्यकर्ता ख़ासकर पवन जी का चरणामृत पीयूं.जय भाजपा जय भारत. कार्यकर्ता से पैर धुलवाने के इस मामले में लोगों ने सांसद को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया. 
 


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सांसद ने दी सफाई
जब कार्यकर्ता से पैर धुलवाने की तस्वीर पर विवाद मचा तो बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने फेसबुक पर सफाई दी. उन्होंने पोस्ट में लिखा-अपनों में श्रेष्ठता बांटी नही जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ? उन्होंने जनता के सामने क़सम खाया था,उनको ठेस ना पहुंचे सम्मान किये. पैर धोना तो झारखंड मेंअतिथि के लिए होता ही है, सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएं क्या यह नहीं करती हैं? इसे राजनीतिक रंग क्यूं दे रहे है. पैर अतिथि का धोना गलत है, अपने पुरखो से पूछिए ,महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोया था? लानत है घटिया मानसिकता पर.

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