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जब लिंगायत धर्मगुरु पर भड़क गए येदियुरप्पा, 'आपकी मांगों के हिसाब से काम नहीं कर सकता...'

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने मंगलवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आपा खो दिया, और स्टेज से उठकर चल दिए. वह मंच से लगभग उतर ही गए थे, जब लिंगायत धर्मगुरु वचनानंद स्वामी ने उनसे रुकने का आग्रह नहीं किया.

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जब लिंगायत धर्मगुरु पर भड़क गए येदियुरप्पा, 'आपकी मांगों के हिसाब से काम नहीं कर सकता...'

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा आपा खोकर स्टेज से उठकर चल दिए

खास बातें

  1. लिंगायत धर्मगुरु पर भड़क गए येदियुरप्पा
  2. सार्वजनिक कार्यक्रम में खो दिया आपा
  3. BJP विधायक को कैबिनेट मंत्रिपद दिए जाने की सिफारिश कर रहे थे
नई दिल्ली:

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने मंगलवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आपा खो दिया, और स्टेज से उठकर चल दिए. वह मंच से लगभग उतर ही गए थे, जब लिंगायत धर्मगुरु वचनानंद स्वामी ने उनसे रुकने का आग्रह नहीं किया. मुख्यमंत्री इसलिए नाराज़ हुए थे, क्योंकि धर्मगुरु एक धार्मिक रैली के दौरान एक BJP विधायक को कैबिनेट मंत्रिपद दिए जाने की सिफारिश कर रहे थे.

दावणगेरे में आयोजित लिंगायत रैली में वचनानंद स्वामी ने कहा, "मुख्यमंत्री जी, आप मेरे साथ हैं... मैं आपसे कहना चाहता हूं, मुरुगेश निरानी की अनदेखी मत कीजिए... अगर आप अब उनका ध्यान नहीं रखेंगे, तो आप पूरे समुदाय का समर्थन खो देंगे..."

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मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा यह सुनते ही बेहद गंभीर चेहरा लिए उठ खड़े हुए, और गुस्साकर बोले, "मैं यह सब सुनने के लिए यहां नहीं आया हूं... मैं आपकी मांगों के हिसाब से काम नहीं कर सकता हूं... मैं जा रहा हूं..."

उन्होंने धर्मगुरु के पांव छुए और जाने लगे, तभी वचनानंद स्वामी ने उनसे रुकने का आग्रह किया. अंततः मुख्यमंत्री वापस आकर अपनी जगह बैठ गए. उस समय कर्नाटक के गृहमंत्री बसवराज बोम्मई तथा अन्य BJP नेता भी मंच पर मौजूद थे.

बाद में, रैली को संबोधित करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने की पेशकश भी की. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वह उन 17 बागी विधायकों का 'ध्यान रखने के लिए' मजबूर थे, जिन्होंने उन्हें मुख्यमंत्री बनवाने के लिए अपनी पार्टियां छोड़ दीं. उन्होंने कहा, "मैं धर्मगुरु से आग्रह करता हूं, मेरी स्थिति को समझें... 17 विधायकों ने विधायकों और मंत्रियों के तौर पर इस्तीफा दिया... वे नहीं होते, तो मैं मुख्यमंत्री नहीं बनता... उनके बलिदान और आपके आशीर्वाद से मैं राज्य का मुख्यमंत्री बन पाया हूं... धर्मगुरु सुझाव दें, मैं आकर उन पर व्यक्तिगत रूप से चर्चा करूंगा... यदि आप नहीं चाहते, तो मैं कल ही इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं... मैं अपनी कुर्सी से चिपका हुआ नहीं हूं..."

बिल्गी से विधायक मुरुगेश निरानी ताकतवर लिंगायत समुदाय से आते हैं और समुदाय के चेहरे के रूप में BJP के भीतर येदियुरप्पा के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं. कर्नाटक में BJP को हासिल होने वाले वोटों में लिंगायत वोटों की तादाद काफी होती है.

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उम्मीद की जा रही है कि बी.एस. येदियुरप्पा इसी महीने अपने कैबिनेट का विस्तार कर उसमें नए मंत्री शामिल करेंगे.

कर्नाटक की 225-सदस्यीय विधानसभा में कैबिनेट का आकार 34 मंत्रियों से ज़्यादा नहीं हो सकता. बी.एस. येदियुरप्पा ने 16 मंत्रिपद उन विधायकों के लिए बचाकर रखे थे, जिनके इस्तीफों की वजह से पिछले साल जनता दल सेक्युलर और कांग्रेस गठबंधन की सरकार गिर गई थी, और BJP सत्ता में आ सकी थी. उनमें से अधिकतर ने उपचुनाव जीत लिए हैं.

इन बागियों को शामिल करने के लिए बी.एस. येदियुरप्पा को लगभग आधा दर्जन मंत्री हटाने होंगे, जिसके चलते पार्टी के भीतर असंतोष उपज रहा है. बी.एस. येदियुरप्पा के 17-सदस्यीय मंत्रिमंडल में पहले से ही तीन-तीन उपमुख्यमंत्री - सी.एन. अश्वत नारायण, लक्ष्मण एस. सावदी तथा गोविंद एम. करजोल - हैं.

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ख़बरों की मानें, तो बी.एस. येदियुरप्पा मंत्रियों के नामों को तब अंतिम रूप देंगे, जब शनिवार को BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कर्नाटक यात्रा के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात होगी.



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