लखनऊ में मायावती की महारैली, कहा - बीजेपी शासित राज्यों में दलितों का उत्पीड़न हुआ

लखनऊ में मायावती की महारैली, कहा - बीजेपी शासित राज्यों में दलितों का उत्पीड़न हुआ

बीएसपी चीफ मायावती की लखनऊ में रैली..

खास बातें

  • मायावती की लखनऊ में रैली अब तक की 'सबसे बड़ी' रैली बताई जा रही है
  • मायावती ने रैली में बीजेपी और सपा पर निशाना साधा
  • कहा - क्या पीएम के वादे मुताबिक आप सबको नौकरी मिल पाई
लखनऊ:

बीएसपी सुप्रीमो मायावती आज कांशीराम की 10वीं पुण्यतिथि के मौके पर लखनऊ में एक बड़ी रैली कर शक्ति प्रदर्शन कर रही हैं. बीएसपी का दावा है कि ये मायावती की अब तक की सबसे बड़ी रैली हैं. कांशीराम स्मारक के पास रैली का आयोजन किया जा रहा है.

मायावती ने मौजूदा सत्ताधारी पार्टी समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस वक्त महिलाओं और बुज़ुर्गों की हालत बहुत ख़राब हो गई है. शासन में भ्रष्ट तंत्र का बोलबाला हो गया है और करोड़ों रुपए विज्ञापनों में खर्च कर दिए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यूपी में हालात राष्ट्रपति शासन लगने लायक हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि मोदी के वादे खोखले हो गए हैं. केंद्र ने भी यूपी के विकास पर ध्यान नहीं दिया. आरक्षण के मामले में केंद्र ने अनदेखी की है. केंद्र ने अपने एक चौथाई वादे भी पूरे नहीं किए है.

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में दलितों का उत्पीड़न हुआ. मुसलमानों के साथ पक्षपात वाला रवैया.  मुस्लिम समुदाय ख़ौफ में जीने को मजबूर हैं. देश में लोकसभा के चुनावों में मोदी और बीजेपी द्वारा किए गए वादे जुमले और हवा हवाई वादे बनकर रह गए. गोरक्षा के नाम पर दलितों का भी अब उत्पीड़न हो रहा है.

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बसपा सुप्रीमो ने सपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि 'यूपी में चहेते लोगों को दबदबा बना रहता है. मौजूदा सरकार हमारी योजनाओं का नाम बदलकर चला रही है.'  मायावती ने कहा कि 'पीएम मोदी ने 100 दिन में काला धन वापस लाने का वादा किया था. क्या उनके वादे के मुताबिक आप सबको अभी तक नौकरी मिल पाई है?' उन्होंने यह भी कहा कि इस रैली के बाद विरोधी तमाम हथकंडे अपनाएंगे.

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इससे पहले बीएसपी ने जानकारी दी थी कि रैली में लोगों को लाने के लिए 18 ट्रेनें बुक कराई गई हैं. हर विधानसभा क्षेत्र से 5000 लोग आ रहे हैं. इस तरह से पार्टी नेताओं को कुल 20 लाख की भीड़ जुटाने का टारगेट दिया गया है. पिछले दिनों कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ देने से बीएसपी का माहौल ख़राब हुआ था. मायावती इस शक्ति प्रदर्शन के ज़रिए ये बताना चाहती हैं कि उनके आने-जाने का पार्टी पर कोई असर नहीं हुआ है और वो पहले की तरह ही मज़बूत है.