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बुलेट ट्रेन लोगो की प्रतियोगिता जीतने वाला छात्र पहले 30 बार हो चुका था नाकाम

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के सेकंड ईयर के छात्र 27 वर्षीय चक्रधर आला ने कहा कि उसनं केन्द्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल MyGov.in पर शुरू तकरीबन हर डिजाइन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया.

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बुलेट ट्रेन लोगो की प्रतियोगिता जीतने वाला छात्र पहले 30 बार हो चुका था नाकाम

चक्रधर आला नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के छात्र हैं

नई दिल्ली:

सरकार की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेनके लोगो के लिए प्रतियोगिता में जीत चक्रधर आला को आत्मविश्वास की बुलंदियों पर पहुंचा दिया लेकिन उसे इस मुकाम पर पहुंचने के लिए विभिन्न लोगो प्रतियोगिताओं में 30 बार नाकामी का दर्द झेलना पड़ा. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के सेकंड ईयर के छात्र 27 वर्षीय चक्रधर आला ने कहा कि उसनं केन्द्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल  MyGov.in  पर शुरू तकरीबन हर डिजाइन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. उसे लगातार नाकामी का सामना करना पड़ा लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी. आखिरकार बुलेट ट्रेन के लिए बनाए उसके लोगो ने ज्यूरी का दिल जीत लिया. चक्रधर ने कहा कि वह बेहद उत्साहित है और बुलेट ट्रेन से संबद्ध हर सरकारी दस्तावेज, लेटर हेड और सूचना पत्रों पर अपनी कृति देखने के लिये अब ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता. उसने कहा कि अगर कोई इस लोगो को करीब से देखे तो उसे ट्रेन जैसी आकृति नजर आयेगी जिसमें बनायी गयी बिंदुएं हर स्टेशन और संबंधित मार्ग को दर्शाती हैं.
 
 

bullet train logo
( इसी लोगो को चक्रधर आला ने बनाया है)

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उन्होंने कहा कि उसके डिजाइन में देश की इस ‘हाई स्पीड ट्रेन’ के कई पहलुओं को समाहित किया गया है. चक्रधर ने कहा, ‘‘मेरा डिजाइन दिखने में बेहद सरल है लेकिन इसमें गहरे अर्थ छिपे हैं. चीता जहां तेज गति, विश्वसनीयता और भरोसे को दर्शाता है वहीं यह लोगो इसके शरीर पर उकेरे गये रेल नेटवर्क के साथ किसी पारंपरिक ट्रेन का मानचित्र भी प्रदर्शित करता है.’’ मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले चक्रधर के पिता एक नौकरशाह हैं और उनकी माता शहर के स्कूल में प्रधानाध्यापिका हैं.  उसने कहा कि लोगो डिजाइन करने के प्रति उसके धुन के कारण उसके मित्र एवं परिवार के लोग उसे ‘लोगोमैन’ कहते हैं.

 
उसने कहा, ‘‘मैंने स्वच्छ भारत और बेटी बचाओ जैसे कई कार्यक्रमों का लोगो बनाया है. लेकिन ट्रेननुमा चीता की डिजाइन मेरी पहली जीत है. मैं इसे बेहतर कर सकता था.’’

इनपुट : भाषा



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