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बिल्‍डरों के खिलाफ नहीं थम रहा प्रदर्शन, खरीदारों का सवाल-हमारा फ़्लैट कब मिलेगा?

शनिवार को फिर बिल्डरों के ख़िलाफ़ फ्लैट ख़रीदारों का गुस्सा फ़ूटा सैकड़ों की संख्या में इन लोगों ने आम्रपाली के दफ़्तर के सामने प्रदर्शन किया.

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बिल्‍डरों के खिलाफ नहीं थम रहा प्रदर्शन, खरीदारों का सवाल-हमारा फ़्लैट कब मिलेगा?

शनिवार को आक्रोशित खरीदारों ने प्रदर्शन किया.

खास बातें

  1. शनिवार को खरीदारों ने बिल्‍डर के खिलाफ किए प्रदर्शन
  2. सत्‍ता बदली लेकिन फिर भी नहीं बदले हालात
  3. पिछले आठ साल से कर रहे फ्लैट मिलने का इंतजार
नोएडा: ग्रेटर नोएडा में बिल्डर के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. हालांकि यूपी में नई सरकार बनने के बाद बिल्डर और खरीदारों (बॉयर) की कई दौर की बैठकें हुईं हैं लेकिन बॉयर्स का कहना है कि इसका ज़मीन पर कोई असर नहीं दिख रहा है. शनिवार को फिर बिल्डरों के ख़िलाफ़ फ्लैट ख़रीदारों का गुस्सा फ़ूटा सैकड़ों की संख्या में इन लोगों ने आम्रपाली के दफ़्तर के सामने प्रदर्शन किया.

इनका गुस्सा 8 साल लंबे इंतज़ार का है. यह इंतजार उस घर का है जो क़ागजों पर तो दिखा पर आज तक इन्हें नहीं मिला. बैंक की किश्त और किराए का बोझ सह रहे लोग मांग कर रहे हैं कि बिल्डर पर दबाव बनाकर सरकार इन्हें घर दिलाए. इसलिए सैकड़ों की संख्या में धूप में बिल्डर के दफ़्तर के सामने घंटों नारेबाज़ी करते रहे. प्रदर्शन कर रहे पेशे से इंजीनियर अभिषेक का कहना है कि "क्या करें 7 साल से ईएमआई किराया दे कर थक गए हैं.'' सारे बिल्डर भाग गए हैं मीटिंग में दो महीने पहले आम्रपाली के अनिल शर्मा कह चुके हैं, ''मुझे मार कर फ़्लैट मिल जाए तो ले लो". सिर्फ आम्रपाली के ही विभिन्न प्रोजेक्टों मे लगभग 30000 से भी ज़्यादा लोगों के फ़्लैट फंसे हुए हैं.

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हालांकि यूपी सरकार का दावा है कि किसी भी क़ीमत पर घर ख़रीददारों के हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा. साथ ही रीयल एस्‍टेट कानून को मज़बूती से लागू कराया जाएगा और इसके साथ ही यूपी सरकार ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का सीएजी ऑडिट का फ़ैसला लिया है ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे. यूपी सरकार के मंत्री सतीश महाना का कहना है, "हम सीएजी का ऑडिट करा रहे हैं ताकि भ्रष्टाचार का पता चले, रेरा कानून को सख़्ती से लागू किया जाएगा हम बॉयर्स के घर का सपना पूरा करेंगे.''

हम जब बिल्डरों का पक्ष जानने के लिए आम्रपाली के दफ़्तर पहुंचे तो उनके कॉरपोरेट ऑफिस में कोई नहीं था ना कोई अधिकारी और ना कोई चपरासी. पूरा दफ़्तर खाली पड़ा हुआ था, केंद्र और राज्य दोनों में सरकारें बदल गई हैं पर फ्लैट मालिकों के लिए कुछ नहीं बदला. बैंक की क़िश्त और किराया का बोझ हर महीने इनकी कमर तोड़ रहा है.


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