राज्‍यसभा में आज पेश होगा नागरिक संशोधन बिल, क्‍या सरकार पार कर पाएगी यह चुनौती?

लोकसभा में बिल 334 वोटों से पास हो गया. विपक्ष में बस 106 वोट पड़े. बुधवार को अब बिल राज्यसभा में आना है जिसके समीकरण कुछ जटिल भी हैं और लगातार बदलते दिख रहे हैं.

खास बातें

  • राज्यसभा में बिल को लेकर होगी चर्चा
  • लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है बिल
  • पूर्वोत्तर के राज्यों में बिल को लेकर हो रहा है विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली:

नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में भले ही पास हो गया हो लेकिन अभी राज्यसभा में यह पास होना बचा है. बुधवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा. सड़क से लेकर संसद में जारी विरोध के बीच राज्यसभा में बुधवार को विवादित नागरिकता संशोधन बिल पर 2 बजे चर्चा शुरू होगी. लोकसभा में बहस के बाद कुछ राजनीतिक दलों ने अपने रुख में बदलाव किया है, तो कुछ गैर-भाजपा-गैर-कांग्रेसी दल बिल के समर्थन में सामने आए हैं. लोकसभा में बिल 334 वोटों से पास हो गया. विपक्ष में बस 106 वोट पड़े. बुधवार को अब बिल राज्यसभा में आना है जिसके समीकरण कुछ जटिल भी हैं और लगातार बदलते दिख रहे हैं.

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राज्य सभा का अंक गणित
अभी राज्य सभा में सांसदों की कुल संख्या 240 है. यानी 121 सांसद बिल पास करने के लिए चाहिए. एनडीए के पास 116 सांसदों का समर्थन है. बीजेडी के 7 सांसद बिल के समर्थन में वोट करेंगे. वाईएसआर कांग्रेस के 2 सांसद भी बिल का समर्थन कर सकते हैं. यानी एनडीए को 125 सांसदों का समर्थन मिलता दिख रहा है. लेकिन ये समीकरण बदल भी सकता है क्योंकि 6 सांसदों वाले जेडीयू में बिल पर मतभेद सामने आ चुके हैं. इसी तरह उद्धव ठाकरे ने राज्यसभा में समर्थन के लिए नए इशारे किए हैं. टीआरएस के 6 सांसद बिल के विरोध में वोट करेंगे. टीआरएस नेता केशव राव ने एनडीटीवी से कहा, 'बिल भारत की सोच के खिलाफ है. हम इसके खिलाफ मतदान करेंगे."

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संकट और भी हैं. बिल का समर्थन कर रही बीजेडी ने बिल में संशोधन की मांग की है. बीजेडी नेता प्रसन्ना आचार्या ने एनडीटीवी से कहा, 'हम बिल के समर्थन में मतदान करेंगे. लेकिन हम मांग करते हैं कि श्रीलंकाई तमिलों को भी बिल में शामिल किया जाए.'AIADMK पहले ही बिल में श्रीलंकाई तमिलों को भी शामिल कर उन्हें नागरिकता देने की मांग कर चुकी है. टीआरएस भी इन दोनों पार्टियों के साथ खड़ी दिख रही है.

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सरकार बिल को लोकसभा में आसानी से पारित कराने में कामयाब रही, लेकिन राज्यसभा में उसकी कसौटी कड़ी होगी. सरकार ने आंकड़े ज़रूर जुटा लिये हैं लेकिन राज्यसभा में उसे बिल का समर्थन कर रही पार्टियों की तरफ से संशोधन की मांगों से निपटना होगा.

 
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