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राफेल पर क्या मोदी सरकार ने संसद में गलत दावा किया? कैग की रिपोर्ट में खुली पोल

राफेल सौदे पर क्या मोदी सरकार ने संसद में गलत दावा किया. जानिए क्या कहती है राफेल पर कैग(CAG) की रिपोर्ट.

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राफेल पर क्या मोदी सरकार ने संसद में गलत दावा किया? कैग की रिपोर्ट में खुली पोल

राफेल की फाइल फोटो.

नई दिल्ली:

बात दो जनवरी की है. जब लोकसभा में राफेल पर बहस गर्म थी. पक्ष और विपक्ष के बीच घमासान मचा था. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जब राफेल विमानों की कीमतों को लेकर जबर्दस्त तरीके से सरकार की घेराबंदी की तो बचाव करने वित्तमंत्री अरुण जेटली उतरे थे. उन्होंने बहुत आत्मविश्वास के साथ कहा था," मैं यकीनन बिना किसी खंडन के डर से कह सकता हूं कि 2016 की तारीख में बेसिक एयरक्राफ्ट का दाम यूपीए की तुलना में नौ प्रतिशत और वेपनाइज्ड यानी हथियारों से लैस एयरक्राफ्ट का सौदा 20 प्रतिशत सस्ता है." उस दौरान भी अरुण जेटली ने यह कहकर एयरक्राफ्ट की कीमतों का खुलासा करने से इन्कार किया था कि इससे भारत-फ्रांस के बीच इंटर गवर्नमेंटल एग्रीमेंट(आइजीए) की शर्तों का न केवल उल्लंघन होगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हित भी प्रभावित होंगे. 

तो सीएजी ने झुठलाया दावा
केंद्र की मोदी सरकार भले ही अपने दौर में हुई राफेल की नई डील को यूपीए के दौरान प्रस्तावित डील से नौ प्रतिशत(बेसिक एयरक्राफ्ट) और 20 प्रतिशत(वेपनाइज्ड एयरक्राफ्ट) सस्ता बता रही हो, मगर सीएजी ने यूपीए के दौरान उस पुरानी प्रस्तावित डील, जिसे रद्द कर दिया गया, उससे और एनडीए सरकार में हुई डील की कीमतों की कई स्तर पर तुलना की. मसलन, फ्लाइवे एयरक्राफ्ट पैकेज, सर्विसेस, प्रोडक्ट्स, इंडियन स्पेशफिक इन्हेंसमेंट, स्टैंडर्ड्स ऑफ प्रिपरेशन, इंजीनियरिंग सपोर्ट पैकेज, परफार्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स, टूल्स, टेस्टर्स, ग्राउंड इक्विपमेंट, वेपन्स पैकेज, रोल इक्विपमेंट, ट्रेनिंग ऑफ पायलट्स एंड टेक्नीशियन्स, सिमुलेटर एंड ट्रेनिंग, एनुअल मेंटीनेंस आदि स्तरों पर पिछली और नई डील की तुलना की गई. जिसके आधार पर पाया कि यूपीए की तुलना में नौ या 20 प्रतिशत नहीं बल्कि नई डील 2.86 प्रतिशत ही सस्ती है. यूपीए के दौरान कुल 126 विमान खरीदने की बात चल रही थी. जिसमें 18 विमान उड़ान भरने की अवस्था में और शेष 108 विमानों का निर्माण सरकारी कंपनी एचएएल की देखरेख में होना था. सीएजी ने यूपीए की डील के 18 विमानों की कीमत को दोगुनी कर एनडीए सरकार के 36 विमानों की कीमत से तुलना कर यह अंतर हासिल किया. 

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सीएजी की राफेल पर रिपोर्ट में देखिए निष्कर्ष में कहा गया है कि राफेल का सौदा 2.86 प्रतिशत सस्ता है.
 
सरकार को नहीं, दसॉल्ट को हुआ फायदा
सीएजी की रिपोर्ट ने राफेल डील में एक बड़ी खामी की तरफ ध्यान दिलाया. सीएजी ने कहा है कि 2007 में जो सौदा हो रहा था, उसमें बैंक गारंटी, परफॉर्मेंस गारंटी और वारंटी की बात थी, जबकि 2016 के सौदे में बैंक गारंटी न रखे जाने का फ़ायदा भारत को नहीं, सीधे दसॉल्ट एविएशन को मिल रहा है.रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार इस सौदे के लिए जो अग्रिम भुगतान करती, उस पर दसॉ एविएशन को 15 फ़ीसदी बैंक गारंटी देनी थी. यह गारंटी तब तक चलती रहती जब तक दसॉ एविएशन से इस रक़म के बराबर की आपूर्ति नहीं हो जाती. इस गारंटी का बैंक चार्ज कई मिलियन यूरो का होता. दसॉ के मुताबिक बैंक दर 1.25 फ़ीसदी सालाना होती जबकि भारतीय बातचीत टीम के मुताबिक यह .38% पड़ती. यही नहीं, 2007 में परफॉर्मेंस गारंटी और वारंटी का भी प्रावधान था जिसके मुताबिक कंपनी को कुल करार की क़ीमत की  10 फ़ीसदी गारंटी देनी पड़ती. यह गारंटी सारी आपूर्ति होने तक चलती जिसका कुल समय करीब 5.5 साल होता. जब ये गारंटियां नहीं रहीं तो इस बचत का फायदा किसको मिला? सीएजी की रिपोर्ट नोट करती है कि इसका फायदा दसॉ ने उठा लिया, मंत्रालय को नहीं दिया.



सीएजी रिपोर्ट की अन्य बातें
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में अन्य कई बातों का जिक्र किया है.रिपोर्ट में कहा गया है, ऑडिट में देखा गया कि भारतीय वायुसेना ने ASQR (एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स) की परिभाषा तय नहीं की थी. परिणामस्वरूप कोई भी वेंडर ASQR का पूरी तरह पालन नहीं कर पाया.कैग रिपोर्ट में बताया गया, प्रोक्योरमेंट प्रोसेस के दौरान ASQR लगातार बदले जाते रहे. इसकी वजह से तकनीकी तथा कीमत मूल्यांकन के समय दिक्कतें हुईं, तथा प्रतियोगी टेंडरिंग को नुकसान पहुंचा, जो एक्विज़िशन प्रक्रिया में देरी की प्रमुख वजह रहा.'इसके अलावा बताया गया, 'रक्षा मंत्रालय की टीम ने मार्च, 2015 में सिफारिश की थी कि 126 विमानों के सौदे को रद्द कर दिया जाए. टीम ने कहा था कि दसॉ एविएशन सबसे कम कीमत देने वाला नहीं है, तथा EADS (यूरोपियन एयरोनॉटिक डिफेंस एंड स्पेस कंपनी) टेंडर रिक्वायरमेंट को पूरी तरह पूरा नहीं करती.'

कांग्रेस का राफेल पर दावा
कांग्रेस राफेल डील में बड़े घपले का आरोप लगाती आई है. राहुल गांधी संसद में बहस के दौरान दावा कर चुके हैं कि यूपीए की डील में राफेल हवाई जहाज का दाम 520 करोड़ रुपये प्रति हवाई जहाज था. मगर बाद में किससे बात हुई कि पीएम ने जादू से हवाई जहाज की कीमत 16 सौ करोड़ प्रति जहाज तक पहुंचा दी.  पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला  ने चार बातों का जिक्र करते हुए दावा किया कि 36 राफेल विमानों की कीमतें यूपीए सरकार की पेशकश के मुकाबले 55 गुना ज्यादा हैं. उन्होंने कहा कि यूरोफाइटर द्वारा राफेल के लिए दी 25 फीसदी की छूट ना लेने से नुकसान हुआ. बैंक और सरकारी गारंटी की छूट और कीमत में इजाफे के साथ दस साल के लिए कोई विमान मिलने वाला नहीं है. कांग्रेस ने पीएम मोदी पर अनिल अंबानी के लिए बिचौलिया के रूप में काम करने का आरोप लगाया. 

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वीडियो- प्राइम टाइम: सीएजी की रिपोर्ट से भी राफेल सौदे पर कई सवाल 


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