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गुजरात : क्या राहुल ढूंढ पाएंगे इस बार कांग्रेस के लिए 'संजीवनी', BJP के सामने हैं इस बार कई चुनौतियां

इस राज्य से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही आते हैं.

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गुजरात : क्या राहुल ढूंढ पाएंगे इस बार कांग्रेस के लिए 'संजीवनी', BJP के सामने हैं इस बार कई चुनौतियां

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी

खास बातें

  1. गुजरात हैं अगले साल विधानसभा चुनाव
  2. राहुल ने तय किया मिशन 125 +
  3. पीएम मोदी और अमित शाह भी कर रहे हैं दौरा
नई दिल्ली: गुजरात देश का ऐसा राज्य जो बीजेपी का अजेय दुर्ग बन चुका है. पिछले 22 सालों में कांग्रेस ने इस राज्य को जीतने के लिए सब कुछ किया लेकिन वह बीजेपी को हिला तक नहीं पाई. इस राज्य से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही आते हैं. यह कहने की जरूरत नहीं है कि बीजेपी के लिए यह राज्य कितना जरूरी है और हर लिहाज से कांग्रेस के लिए भी. इस राज्य पर कभी 'हिंदूवादी लहर' पर सवार होकर जीतने वाली बीजेपी 'मोदी लहर' पर सवार होकर कांग्रेस को हर मोर्च पर पटखनी दे चुकी है. लेकिन इस बार कांग्रेस के नेताओं को लगता है कि उनके पास मौका है. इस बार के चुनाव में बीजेपी का चेहरा न तो नरेंद्र मोदी होंगे और न अमित शाह. इस बार कुछ समीकरण भी बीजेपी के पक्ष में नही हैं. इन सभी का फायदा कांग्रेस में उठाना चाहती है. राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल को जिताकर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस में थोड़ी-बहुत ऊर्जा का संचार हुआ है. वैसे गुजरात चुनाव में कांग्रेस थोड़ा बहुत भी अच्छा कर पाती है तो पार्टी के लिए संजीवनी से कम नहीं होगा.

पढ़ें : गुजरात में वफादारी परखेगी कांग्रेस, तभी मिलेगा विधायकी का टिकट

मोदी नहीं होंगे सीएम का चेहरा
सबसे बड़ी बीजेपी की प्रयोगशाला कहे जाने वाले गुजरात में 15 सालों में पहली बार ऐसा होगा जब मुख्यमंत्री पद का चेहरा नरेंद्र मोदी नहीं होंगे. इसमें कोई दो राय नहीं है कि गुजराती अस्मिता की बात करने वाले नरेंद्र मोदी के कांग्रेस के हर नेता पर भाषणों के मामले में भारी पड़ जाते हैं. लेकिन इस बार गुजरात में बीजेपी कार्यकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यही होगी कि मोदी नहीं होंगे.

नाराज हैं पाटीदार
गुजरात में पाटीदार आरक्षण के मुद्दे पर नाराज हैं. 2 साल पहले हार्दिक पटेल की अगुवाई में शुरू हुए आंदोलन की आग ने बीजेपी की सत्ता को झुलसा चुका है. जिसके चलते आनंदी बेन पटेल को अपनी कुर्सी तक गंवानी पड़ गई थी. 

पढ़ें : नार्वे से लौटकर यूएस जा सकते हैं राहुल गांधी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर होना है सम्मेलन

ऊना कांड की गूंज
गाय को लेकर ऊना में दलितों के साथ हुई मारपीट के बाद से दलितों में गुस्सा है. कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाना चाहती है. कांग्रेस के नेता पीड़ित परिवार से भी मिल चुके हैं.

क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में कांग्रेस
नरेंद्र मोदी के रहते गुजरात में क्षेत्रीय पार्टियों का उतना वजूद नहीं रह गया था. लेकिन स्थानीय मुद्दों को लेकर अब यह दल मजबूत हो रहे हैं और हो सकता है बीजेपी से नाराजगी के चलते कांग्रेस के साथ चले जाएं जो अभी तक कांग्रेस का ही वोट काटते रहे हैं. 

वीडियो :  राहुल का मिशन 125 +
बाढ़ न बिगाड़ दे काम
गुजरात की बाढ़ ने इस बार काफी नुकसान किया है. सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे हालात में कई बार लोग सरकार और प्रशासन से नाराज हो जाते हैं. वहीं किसानों पहले ही उपज का सही मूल्य ने मिलने से नाराज थे. अब बाढ़ की वजह से और हालत खराब हो गई है. 
 


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