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SC/ST एक्ट फैसला : अध्यादेश सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहा केंद्र

सूत्रों की मानें तो इस एक्ट को लेकर केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में विधेयक लाने पर भी विचार कर सकती है.

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SC/ST एक्ट फैसला : अध्यादेश सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहा केंद्र

भारत बंद के दौरान हिंसा की फाइल फोटो

नई दिल्ली: SC/ST एक्ट पर फैसले को लेकर रविवार को केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ किया है. केंद्र सरकार ने कहा कि उसे लगता है कि SC/ST अत्याचार निवारण कानून पर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलटे जाने की आवश्यकता है. साथ ही कानून के वास्तविक प्रावधानों को बहाल करने के लिए अध्यादेश लाने पर विचार किया जा सकता है. सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार वास्तविक प्रावधानों को बहाल करने के लिए अध्यादेश लाए जाने से रोष शांत होगा. सूत्रों की मानें तो इस एक्ट को लेकर केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में विधेयक लाने पर भी विचार कर सकती है. एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि यदि अध्यादेश जारी किया जाता है , तो इसे भी विधेयक में तब्दील किया जाना और संसद में पारित कराना होगा. वास्तविक प्रावधानों को बहाल करने के लिए दोनों ही कदमों का परिणाम एक है. लेकिन अध्यादेश का लाभ त्वरित परिणाम के रूप में होता है.

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यह रोष को तत्काल शांत करने में मदद करेगा. दलित संगठनों ने उच्चतम न्यायालय के 20 मार्च के फैसले के जरिए कानून को हल्का किए जाने के खिलाफ दो अप्रैल को भारत बंद बुलाया था. इस दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हुए थे जिसमें कई लोग मारे भी गए. विपक्षी दलों ने सरकार पर दलित रक्षा अधिकारों की रक्षा कर पाने में विफल रहने का आरोप लगाया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को आश्वस्त किया था कि उनकी सरकार SC/ST समुदायों पर अत्याचार रोकने वाले कानून को हल्का नहीं होने देगी. उन्होंने कहा था कि मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे द्वारा कठोर बनाए कानून को ( न्यायालय के फैसले से ) प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. लेकिन अब सूत्रों ने कहा कि अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है और काफी कुछ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के तरीके पर निर्भर करेगा.

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उन्होंने कहा कि क्योंकि हो सकता है कि पुनर्विचार याचिका का तत्काल परिणाम नहीं आए और न्यायालय का फैसला अनुकूल न हो , तो ऐसे में सरकार को आगे की कार्रवाई को लेकर अपने रुख पर मजबूत रहना होगा. गौरतलब है कि SC/ST अत्याचार निवारण कानून को लेकर शीर्ष अदालत ने पुलिस अधिकारियों के लिए इस बारे में नए दिशा - निर्देश तैयार किए थे कि निर्दोष लोगों , खासकर सरकारी अधिकारियों को कानून के तहत झूठी शिकायतों से किस तरह रक्षा प्रदान की जाए.

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VIDEO: राजस्थान में पुलिस पर दलितों का दमन का आरोप.


इन सब के बीच केंद्र ने शुक्रवार को न्यायालय में दायर अपने लिखित अभिवेदन में कहा कि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून पर फैसले से इसके कड़े प्रावधान हल्के हुए हैं जिससे गुस्सा पैदा होने और लोगों के बीच सौहार्द की समझ बिगड़ने से देश को बड़ा नुकसान हुआ है.(इनपुट भाषा से) 
 


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