पश्चिम बंगाल में कोरोना संकट का जायजा लेने के बाद केंद्रीय दल ममता सरकार पर 'विरोधी रवैया' अपनाने का लगाया आरोप

केंद्रीय जांच दल ने ममता सरकार पर विरोधी रवैये अपनाने और कोऑपरेट नहीं करने के आरोप लगाए हैं.

पश्चिम बंगाल में कोरोना संकट का जायजा लेने के बाद केंद्रीय दल ममता सरकार पर 'विरोधी रवैया' अपनाने का लगाया आरोप

West Bengal: जांच दल ने TMC सरकार पर पैनल के प्रति ‘विरोधी’ रूख अपनाने का आरोप लगाया

नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में कोरोना संकट के हालातों का जायजा और तैयारियों की समीक्षा करने के बाद केंद्रीय जांच दल ने ममता सरकार पर आरोप लगाया है. केंद्रीय जांच दल ने ममता सरकार पर विरोधी रवैये अपनाने और कोऑपरेट नहीं करने के आरोप लगाए हैं. बता दें कि इसी टीम ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी दौरा कर वहां के हालातों का जायजा लिया था. राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा को केंद्रीय दल की तरफ से लिखे गए पत्र में कहा गया है. जांच दल द्वारा स्थानीय प्रशासन से फील्ड विजिट और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ बातचीत का बार-बार अनुरोध किया गया. बावजूद इसके विभाग की तरफ से सिर्फ स्वास्थय सचिव ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बातचीत की.  वहीं केंद्रीय टीम के इस आरोप के बाद मुख्य सचिव राजीव सिन्हा का कहना है कि वह पूरे दिन व्यस्त थे और IMCT की चिट्ठी का उचित तरीके से जवाब देंगे. 

गौर हो कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को पत्र लिख, केंद्रीय जांच दल भेजे जाने पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने शिकायत की थी कि जिस टीम को उनके राज्य में भेजा जा रहा है उसकी जानकारी आखिरी समय पर दी गई. साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि केंद्रीय जांच दल को पश्चिम बंगाल की क्यों भेजा जा रहा है. वहीं टीएमसी के नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि जब कुछ राज्य कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने में व्यस्त हैं तो उन्हें केंद्र द्वारा निशाना बनाया जा रहा है. 

पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस महामारी की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए राज्य के दौरे पर आए IMCT ने सोमवार को कहा कि राज्य में कोविड-19 मृत्युदर 12.8 प्रतिशत देश में सर्वाधिक है और यह जांच में कमी और कमजोर निगरानी को दर्शाता है. अपनी दो दिवसीय यात्रा के समापन से पूर्व इस दल ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर पैनल के प्रति ‘विरोधी' रूख अपनाने का आरोप लगाया. 

रवाना होने से पहले आईएएस अधिकारी ने कहा कि वैसे तो राज्य सरकार ने निषिद्ध क्षेत्रों ‘बिल्कुल उच्च स्तरीय' रोजाना निगरानी करने का दावा करती है लेकिन उसने टीम को कोई आंकड़ा या नतीजे उपलब्ध नहीं कराये. चंद्रा ने राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा को लिखी अपनी चिट्ठी में कहा ‘‘ इतने बड़े डाटाबेस का मिलान और मूल्यांकन के लिए एक ठोस व्यवस्था की जरूरत है. लेकिन ऐसा कोई सबूत उपलब्ध नहीं है.''

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com