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अजीत डोभाल के जम्मू-कश्मीर से लौटते ही केंद्र सरकार ने की राज्य में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती

अजीत डोभाल (Ajit Doval) ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था को लेकर बैठक भी की.

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अजीत डोभाल के जम्मू-कश्मीर से लौटते ही केंद्र सरकार ने की राज्य में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में की अतिरिक्त जवानों की तैनाती

खास बातें

  1. देश के अलग-अलग इलाकों से भेजे गए हैं जवान
  2. अजीत डोभाल दो दिन के जम्मू-कश्मीर दौरे पर थे
  3. जम्मू-कश्मीर के डीजी ने कहा- कानून व्यवस्था है पहली प्राथमिकता
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर में आतंवाद विरोधी कार्रवाई को और मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य में 10 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है. बता दें कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval) के जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे से लौटने के बाद लिया गया है. सूत्रों के अनुसार अपने दौरे के दौरान अजीत डोभाल (Ajit Doval) ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था को लेकर बैठक की थी. वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी दिलबाग सिंह ने बताया कि वह पहले से ही उत्तरी कश्मीर में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की मांग करते रहे हैं. अतिरिक्त जवानों की तैनाती उनके आग्रह के बाद ही हुई है. उधर, गृहमंत्रालय द्वारा जारी किए गए ऑर्डर में कहा गया है कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती इसलिए की जा रही है ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था बेहतर की जा सके. 

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दिलबाग सिंह ने बताया  कि उत्तरी कश्मीर में जवानों की संख्या जरूरत से भी कम है. इसलिए हमें यहां अतिरिक्त जवानों की जरूरत थी.  100 कंपनियों को हवाई मार्ग से उत्तरी कश्मीर भेजा गया है. हमनें पहले ही इसकी मांग की थी. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जवानों की अतिरिक्त तैनाती को लेकर किए जाने वाले अन्य दावे तथ्यों से दूर हैं. सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर भेजे गए जवानों को देश के अलग-अलग इलाकों से चुना गया है.

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गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही अमरनाथ यात्रा को सफल बनाने को लेकर राज्य में 40 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी. वहीं, इस साल 24 फरवरी को 100 पारामिलिट्री फोर्स को घाटी में तैनात किया गया था. उस दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि इन जवानों की तैनाती अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए की जा रही है. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दोबारा में सत्ता में आने के बाद अजीत डोभाल को एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया था. इतना ही नहीं इस बार मोदी सरकार ने अजित डोभाल को केंद्रीय मंत्री का दर्जा भी दिया था.

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मोदी सरकार ने यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए लिया था. उनकी यह नियुक्ति पांच वर्षों के लिए होगी. बता दें कि अजित डोभाल पीएम मोदी की पिछली सरकार में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे. गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval) के बेटे शौर्य डोभाल को कुछ महीने पहले ही 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा (Z Category Security) दी गई थी. अधिकारियों ने बताया कि उन्हें संभावित खतरों को देखते हुए 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा (Z Category Security)  दी गई.

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अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियों द्वारा तैयार सुरक्षा आकलन रिपोर्ट के बाद शौर्य डोभाल को केंद्रीय अर्धसैनिक बल के 'मोबाइल सुरक्षा कवर' के तहत लाया गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्हें उनके पिता और अन्य लोगों के विरोधियों से खतरा है. अजीत डोभाल को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है. अजीत डोभाल को करीब चार साल पहले इस सुरक्षा कवर के तहत लाया गया था.

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