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वोटों की 'टोटलाइज्ड काउंटिंग' का केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में किया विरोध

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वोटों की 'टोटलाइज्ड काउंटिंग' का केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में किया विरोध

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

नई दिल्‍ली:

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वोटों की 'टोटलाइज्ड काउंटिंग' का विरोध किया है. केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री की अगुवाई में मंत्रीमंडल समूह ने विचार किया. 16 सिंतबर 2016 को फाइनल मीटिंग की गई. इस मीटिंग में ये तय हुआ कि बूथ के आधार पर मतगणना पार्टी और उम्मीदवार के लिए बेहतर है क्योंकि इससे पार्टी या प्रत्याशी को ये पता चल जाता है कि किस इलाके में उसे ज्यादा वोट मिले हैं और किस हिस्से में उसे और काम करना चाहिए. सरकार ने यह भी कहा है कि यह तर्क सही नहीं है कि जिन इलाके के लोगों ने वोट नहीं दिया, वहां जीतने के बाद काम नहीं करेंगे. ये मीडिया एक्टिविज्म के जमाने में संभव नहीं है. अगर किसी ने ऐसा किया तो मीडिया और सोशल माडिया पर ऐसे मामले तुरंत फैल जाएंगे जिससे जनप्रतिनिधि और पार्टी पर दबाव आ जाएगा. वैसे भी चुनाव आयोग ने कहा है कि ये कदम प्रयोग के तौर पर नहीं किया जा सकता क्योंकि चुनाव के लिए पहले से पूरी तैयारी की जाती है.

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केंद्र ने ये भी कहा है कि इसे लागू करने के लिए 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा. वहीं सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस जे एस खेहर ने कहा कि मौजूदा दौर में ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ नामुमकिन नहीं है. यहां तक कि दुनिया का सबसे विकसित देश भी अछूता नहीं है. वो कभी ये नहीं कहता कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ संभव नहीं है. वो देश कहता है कि छेड़छाड़ नहीं हो सकती. देश में चुनाव के बाद बूथ के आधार पर मतगणना के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर ये टिप्पणी करते हुए मुख्‍य न्‍यायाधीश खेहर ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. अब मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी.


दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि फिलहाल मतगणनना के दौरान बूथ के आधार पर वोटों की गिनती होती है जिससे ये पता चल जाता है कि किस इलाके के लोगों ने किस प्रत्याशी को वोट दिया है. इससे जीतने वाला प्रत्याशी उस इलाके से भेदभाव करता है जहां के लोगों ने वोट नहीं दिया. इसलिए वोटों की गिनती एक साथ होनी चाहिए. इस मामले में चुनाव आयोग ने इस पर सहमति जताते हुए दलील दी थी कि इसे लेकर केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा था कि वो इस नियम को लागू क्यों नहीं कर रही है?



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