चंद्रयान 2 की तस्वीरें सामने आईं, अगले हफ्ते श्रीहरिकोटा से होगा प्रक्षेपण

चंद्रयान 2 सैटेलाइट की पहली तस्वीर सामने आ गई है. यह पृथ्वी से चंद्रमा की ओर श्रीहरिकोटा से 15 जुलाई को लगभग आधी रात को रवाना होगा.

खास बातें

  • चंद्रयान 2 की तस्वीरें सामने आईं
  • अगले हफ्ते श्रीहरिकोटा से होगा प्रक्षेपण
  • जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट इसे अंतरिक्ष में ले जाएगा
नई दिल्ली:

चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) सैटेलाइट की पहली तस्वीर सामने आ गई है. यह पृथ्वी से चंद्रमा की ओर श्रीहरिकोटा से 15 जुलाई को लगभग आधी रात को रवाना होगा. इसका वजन 3.8 टन है और यह एक हजार करोड़ का मिशन है. जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट इसे लेकर अंतरिक्ष में जाएगा. प्रक्षेपण के बाद उपग्रह 'चंद्रयान 2' को कई हफ्ते लगेंगे, और फिर वह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सितंबर के पहले हफ्ते में उतरेगा. गौरतलब है कि यह चंद्रमा का वह हिस्सा है, जहां आज तक दुनिया का कोई भी अंतरिक्ष यान नहीं उतरा है.

चंद्रयान - 2 अभियान में 13 पेलोड के साथ 1 NASA पेलोड भी शामिल - इसरो 

अंतरिक्ष यान का भार 3.8 टन है. यह 8 हाथियों के वजन के बराबर है. इसे भारत में तैयार किया गया है. इसमें तीन मॉड्यूल हैं - ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान).

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ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह को चित्रित करेगा और चंद्रमा पर खनिजों का मानचित्रण करेगा. लैंडर जिसका वजन 1,471 किलोग्राम है, वह चंद्रमा के कंपन और उसके तापमान को मापेगा. 27 किलोग्राम का प्रज्ञान रोवर चंद्र मिट्टी का विश्लेषण करने के लिए कैमरों और उपकरणों से लैस है. यह एक रोबोटिक मिशन है और इसमें कोई मानव चांद की सतह पर नहीं जाएगा. 

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इसरो (ISRO) के चेयरमैन डॉ के सिवन ने एनडीटीवी से कहा, 'चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग, मिशन का सबसे भयानक पहलू होगा क्योंकि भारत ने कभी भी सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास नहीं किया है. अगर भारत सॉफ्ट लैंडिंग में सफल होता है तो वह ऐसा करने वाला चौथा देश होगा. इससे पहले यूएस, रूस और चीन ऐसा कर चुके हैं. इसी साल की शुरुआत में इजरायल सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था. यह चांद की सतह के बहुत करीब पहुंचने पर क्रैश हो गया था. 

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जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट को बाहुबली रॉकेट माना जाता है जिसका वजन 640 टन है और यह 44 मीटर लंबा है. बता दें कि चंद्रयान-2 अपने पूर्ववर्ती चंद्रयान-1 का उन्नत संस्करण है. चंद्रयान-1 को करीब 10 साल पहले भेजा गया था.

चंद्रयान 2 नासा के लेजर उपकरणों को चंद्रमा तक लेकर जाएगा

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चंद्रयान 2 से जुड़ी अहम बातें...

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- चंद्रयान 2 15 जुलाई, 2019 को लगभग आधी रात को प्रक्षेपित किया जाएगा.
- चंद्रयान 2 तैयार है, और इसे 'बाहुबली' अथवा जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (GSLV Mk III) के ज़रिये लॉन्च किया जाएगा.
- चंद्रयान 2 में एक ऑरबिटर, 'विक्रम' नामक एक लैंडर तथा 'प्रज्ञान' नामक एक रोवर शामिल हैं.चंद्रयान 2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वज़न के लगभग बराबर है.
- चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया.
- यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा.
- भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की.
- चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जाएगा.
- LASER रेंजिंग के लिए NASA के उपकरण को निःशुल्क ले जाया जाएगा.
- चंद्रयान 2 पूरी तरह स्वदेशी अभियान है.
- भुगतान करने के बाद भारत NASA के डीप स्पेस नेटवर्क का इस्तेमाल करेगा.
- चंद्रयान 2 काफी उत्साहवर्द्धक मिशन है.
- चंद्रयान 2 ISRO का अब तक का सबसे जटिल अभियान है.
- लैंडर के अलग होने तथा चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के बीच वाले 15 मिनट सबसे ज़्यादा घबराहट रहेगी.
-चंद्रयान 2 को कामयाब बनाने के लिए ISRO कड़ी मेहनत कर रहा है.
- ISRO में पुरुष और महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं.
- चंद्रयान 2 में मज़बूती को सुनिश्चित करने और इसकी कामयाबी के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए देरी की गई.