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छत्तीसगढ़ में एससी-एसटी एक्ट संसोधन की समस्या

रमन सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य सरकार प्रभावित हुआ है. राज्य में एससी-एसटी वर्ग के सम्मान की रक्षा करना सरकार का दायित्व है.

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छत्तीसगढ़ में एससी-एसटी एक्ट संसोधन की समस्या

रमन सिंह की फाइल फोटो

नई दिल्ली: देश ने 2 अप्रैल को दलितों कै गुस्सा देखा, गुस्सा अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न अधिनियम में संशोधन के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ. फैसला सर्वोच्च अदालत का था सो बीजेपी शासित छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश ने इसे फौरन लागू किया.हालांकि अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह पलट गए, पीएचक्यू से जारी आदेश रद्द करते हुए रमन सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य सरकार प्रभावित हुआ है. राज्य में एससी-एसटी वर्ग के सम्मान की रक्षा करना सरकार का दायित्व है. हमारी सरकार हमेशा से ही इस वर्ग के लिए संवेदनशील रही है. हमारी सरकार उनके हितों की रक्षा करने में समर्थ है और इसीलिए हमने पुलिस के सर्कुलर को रद्द करने का फैसला किया है.

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हम अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे. दबाव मध्यप्रदेश पर भी है लेकिन शायद परशुराम जयंति पर जिस तरह शिवराज को सवर्णों ने मंच पर घेरा फिलहाल सरकार सावधानी से चलना चाहती है. इसलिए गृहमंत्री के साथ हाईलेवल मीटिंग के बावजूद सरकार पशोपेश में हैं. छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश में इस साल चुनाव होने हैं ऐसे में बीजेपी को लगता है दलितों के साथ सवर्णों की नाराजगी से कहीं कमल मुरझा ना जाए फैसला लेने पर एक डर अदालत की अवमानमा का भी है.

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VIDEO: रमन सिंह ने एससी-एसटी एक्ट पर रखी अपनी बात.


मध्यप्रदेश में दलितों की आबादी 16 फीसद के आसपास है, छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति-जनजाति के लभगघ 40 फीसद वोटर हैं.


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