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सूखे की वजह से देश की हालत खराब, सर्जरी के लिए भी पानी खरीदने को मजबूर हैं चेन्नई के डॉक्टर

रविशंकर ने कहा, 'अगर पानी की समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो मरीजों का इलाज करना भगवान की दया पर ही निर्भर करेगा.'

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सूखे की वजह से देश की हालत खराब, सर्जरी के लिए भी पानी खरीदने को मजबूर हैं चेन्नई के डॉक्टर

प्रतीकात्मक तस्वीर

खास बातें

  1. पूरे देश में पानी की कमी से जूझ रहे डॉक्टर्स
  2. सर्जरी के लिए भी पानी खरीदने को मजबूर चेन्नई के डॉक्टर
  3. पानी की समस्या देश के लिए एक गंभीर आर्थिक समस्या
चेन्नई :

पूरे देश में डॉक्टर्स पानी की कमी से जूझ रहे हैं. ऐसे में टी एन रविशंकर चेन्नई में जल्द बारिश होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. ब्लूमबर्ग के मुताबिक सुदर हॉस्पिटल के चेयरमैन रविशंकर ने कहा, 'अगर पानी की समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो मरीजों का इलाज करना भगवान की दया पर ही निर्भर करेगा.' रविशंकर 150 बेडों के चार क्लीनिक की चेन वाले सुदर हॉस्पिटल के चेयरमैन हैं. रविशंकर के हॉस्पिटल्स भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई है कि जो महंगे पानी के ट्रक वह मंगाते हैं, वह तमिलनाडु में आना बंद हो सकते हैं. 

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रविशंकर ने बताया, 'अगर यही हालात बने रहेंगे तो हम मरीजों की सेवा नहीं कर सकेंगे.' साउथ एशिया ड्रॉट मॉनीटर के मुताबिक बीते साल बारिश कम होने और इस साल देर से होने की वजह से देश का आधा हिस्सा सूखे से जूझ रहा है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र की तरह तमिलनाडु भी सूखे से पीड़ित है. 


देश की राजधानी दिल्ली ने बीते 45 सालों में पहली बार मॉनसून को इतना देर से आता देखा. वाटर सप्लाई का मुद्दा यहां राजनीतिक पार्टियों के बीच मुद्दा भी बना. पानी की समस्या देश के लिए एक गंभीर आर्थिक समस्या बनती जा रही है. बीते साल  2014-15 में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखा लागत सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2.54% रहा. बीते साल पर्यावरण मंत्रालय की स्टडी में यह बात सामने आई. बीते 4-5 सालों में भारत में व्यापक रूप से सूखा पड़ा है. 
 
मोदी सरकार ने हेल्थ सेक्टर का विकास करने की बात कही थी. उन्होंने पानी को लेकर एक जागरुकता अभियान भी चलाया था. लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि बनाए गए पैमाने सभी को साफ पानी मुहैया कराना सुनिश्चित करेंगे.

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वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट में इंडिया एडप्शन स्ट्रेटजी के प्रमुख अरिवुदई नांबी अप्पादुरई ने कहा, 'लोगों को पता ही नहीं है कि वो कितने बड़े खतरे में हैं. सूखे से प्रभावित इलाकों में जो पानी प्रयोग किया जा रहा है उससे एलर्जी हो रही है और ज्यादा मरीज हॉस्पिटल्स आ रहे हैं.' 

तमिलनाडु प्राइवेट वाटर टैंकर लॉरी ओनर एसोसिएशन के अध्यक्ष एन निजालिंगम ने कहा, चेन्नई के लगभग सभी हॉस्पिटल्स 5000 प्राइवेट टैंकर्स पर निर्भर हैं. लेकिन 100 किलोमीटर दूर पानी पहुंचाना बहुत मुश्किल काम है. अगर एक महीने बाद भी समस्या यही बनी रही तो उन लोगों को भी पानी मुहैया कराना बहुत मुश्किल होगा जो इसके लिए ज्यादा पैसे चुकाते हैं.' पानी की कमी होने की वजह से वाटर ट्रक की कीमतें भी बढ़ गई हैं. 12 हजार लीटर वाटर ट्रक की कीमत अप्रैल में 1200 रुपए बढ़ी. अधिकतम बढो़तरी 6 हजार रुपए तक है.  

चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में सर्जन बालादी वेनू गोपाल के मुताबिक, चेन्नई के छोटे नर्सिंग होम और क्लीनिक इस समस्या के सबसे बड़े शिकार हैं. क्योंकि बड़े हॉस्पिटल के पास पैसे हैं. कोई भी इस मामले को खुलकर सामने नहीं उठा रहा और सरकार का समर्थन भी नहीं मांग रहा. लेकिन पानी की कमी की वजह से मेडिकल सेक्टर के लाभ मार्जिन में वास्तव में कमी आई है. 

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 WHO के मुताबिक भारत अपनी जीडीपी का केवल एक फीसदी ही हेल्थकेयर पर खर्च करता है और उसका लक्ष्य 2025 तक इसे 2.5 फीसदी तक बढ़ाना है. वहीं बाकी देश 6 फीसदी तक हेल्थकेयर पर खर्च करते हैं. महाराष्ट्र के बीड में राज्य स्तरीय हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल ऑफीसर ने बताया, 'जब भी सूखा पड़ता है तो इसका दवाब हम पर आता है. ज्यादातर लोग सरकारी हॉस्पिटल की तरफ रुख करते हैं क्योंकि प्राइवेट की तुलना में यहां कम खर्च करना पड़ता है. हम म्युनिसिपल कारपोरेशन से कुछ फ्री पानी तो उपलब्ध करा सकते हैं लेकिन उसकी भी सीमाएं हैं.    

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थोराट ने कहा, मुंबई में उन्हें मई के महीने में 10 हजार लीटर के 2 ट्रक खरीदने पड़ते हैं. जून में भी उन्हें कई ट्रकों की जरूरत होगी. रविशंकर ने बताया, 'चेन्नई में एक ऐसे उपाय की जरूरत है जो लंबे समय तक कारगर हो. मौसम विज्ञान के मुताबिक साउथ इंडिया में बारिश इस हफ्ते केवल 30 फीसदी रही.'

रविशंकर ने कहा, 'इस समय आपातकाल की स्थिति है इसलिए सरकार ट्रेन से पानी ला रही है. लेकिन इसके बाद क्या होगा. सब प्रकृति पर छोड़ दिया है.' 



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