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सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार का सवाल, क्या अब भी एयर इंडिया की जरूरत है?

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सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार का सवाल, क्या अब भी एयर इंडिया की जरूरत है?

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

खास बातें

  1. एयर इंडिया 2015-16 में परिचालन लाभ कमा पाई है
  2. हालांकि, एयरलाइन पर 46,570 करोड़ रुपये का कर्ज है
  3. बजट में एयरलाइन को 30,231 करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया गया है
नई दिल्‍ली: मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ने गुरुवार को कहा कि निजी क्षेत्र की विमानन कंपनियों की प्रतिस्पर्धा में सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया के प्रदर्शन में सुधार हुआ है पर उनके मन में बार बार ख्‍याल आता है कि इस एयर लाइन के ‘बने रहने’ का मतलब क्या है. इस राष्ट्रीय विमानन सेवा कंपनी को डूबने से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने 30,000 करोड़ रुपये का सहायता पैकेज दे रखा है. कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के प्रयासों में लगी हुई. मार्च, 2016 में समाप्त वित्त वर्ष में एयरलाइन ने 105 करोड़ रुपये का परिचालन मुनाफा कमाया था. सुब्रमण्यन ने कहा, ‘इंडिगो और जेट एयरवेज के साथ एयर इंडिया का होना, इनमें बिना एयर इंडिया के होने से बिल्कुल अलग है.. एक सवाल यह है कि क्या जेट एयरवेज और इंडिगो के साथ एयर इंडिया को भी बनाए रखने की कोई जरूरत रहती है. यह एक ऐसा सवाल है जिसमें हम फिलहाल नहीं जाना चाहेंगे.’’

उन्होंने कहा कि मुद्दे की बात यह है कि प्रतिस्पर्धा से एयर इंडिया का प्रदर्शन सुधरा है. सुब्रमण्यन यहां प्रतिस्पर्धा कानून के अर्थशास्त्र पर राष्ट्रीय सम्मेलन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. एयर इंडिया 2015-16 में परिचालन लाभ कमा पाई है.

हालांकि, एयरलाइन पर 46,570 करोड़ रुपये का कर्ज है. इसमें से 15,900 करोड़ रपये विमानों के अधिग्रहण के लिए हैं. वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में एयरलाइन को 30,231 करोड़ रुपये के राहत पैकेज के तहत 1,800 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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