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डोकलाम के बहाने चीन ने इस तरह अमेरिका को सुनाई खरी-खरी, भारत को चेताया

इस पूरे मामले को आधार बनाकर चीन ने अब अमेरिका पर भी निशाना साधा है. सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में सू तान ने लिखा है कि भारत और चीन के द्विपक्षीय मामले में कुछ अन्य देश दखल देने की कोशिश कर रहे हैं.

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डोकलाम के बहाने चीन ने इस तरह अमेरिका को सुनाई खरी-खरी, भारत को चेताया

भारत और चीन के बीच डोकलाम में विवाद चल रहा है.

खास बातें

  1. भारत और चीन की सेना के नॉन कॉम्बैटिव मोड में आमने-सामने
  2. चीनी विदेश मंत्री ने इस पूरे विवाद के लिए भारत को जिम्मेदार बताया
  3. मंत्री बोले - चीन ने भारत की जमीं पर घुसपैठ नहीं की है
नई दिल्ली: सिक्किम के करीब भूटान के डोकलाम में भारत और चीन की सेना के नॉन कॉम्बैटिव मोड में आमने-सामने आने के एक महीने से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद चीन की ओर आधिकारिक बयान भी आया है. चीनी विदेश मंत्री ने इस पूरे विवाद के लिए भारत को जिम्मेदार बताया है और साफ कहा है कि चीन ने भारत की जमीं पर घुसपैठ नहीं की है बल्कि भारत ऐसा कर रहा है. इसलिए यह जरूरी है कि भारत अपनी सेना वापस ले जाए.

वहीं, इस पूरे मामले को आधार बनाकर चीन ने अब अमेरिका पर भी निशाना साधा है. सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में सू तान ने लिखा है कि भारत और चीन के द्विपक्षीय मामले में कुछ अन्य देश दखल देने की कोशिश कर रहे हैं. तान ने अमेरिकी अखबार वाशिंगटन इक्जामिनर के एक लेख के हवाले से कहा कि वे चीन का भय दिखा रहे हैं और अमेरिका-भारत की दोस्ती की तारीफ कर रहे हैं. तान ने कहा कि इस लेख में चीन की बढ़ती ताकत के खिलाफ अमेरिका को भारत का पक्ष लेने और दुनिया को चीन के खिलाफ एकजुट करने की सलाह दी गई है.

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चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि डोकलाम विवादित इलाका नहीं है. यह पर सीमाएं काफी पहले से ही निर्धारित हैं. चीन ने कहा कि जहां भी विवाद होता है अमेरिका पहुंच जाता है और ऐसा शायद ही होता है कि वह निष्पक्ष भूमिका लेकर विवाद का निपटारा करे. लेख में कहा गया है कि पश्चिम की कुछ ताकतें भारत और चीन में युद्ध कराना चाहती हैं. इससे उनको रणनीतिक लाभ होगा और वह भी बिना कुछ लगाए. वाशिंगटन ने दक्षिण चीन सागर में इसी रणनीति का सहारा लिया है.

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लेख में यह भी दावा किया गया है कि करीब 50 वर्ष पहले भी भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के पीछे अमेरिका और सोवियत संघ का हाथ था. नई दिल्ली को उस नुकसान से सबक लेना चाहिए. लेख में कहा गया है कि चीन और भारत दोनों ही युद्ध नहीं चाहते हैं और चीन ने हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ बातचीत के जरिए सीमा विवाद को सुलझाया है. तान ने कहा है कि अमेरिका को दक्षिण चीन सागर की तरह भारत और चीन के इस विवाद से कुछ हासिल नहीं होगा. 


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