नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में IUML ने दाखिल की याचिका, कहा- ये धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांत को तोड़ता है

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) बुधवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में पक्ष में 125 और विपक्ष में 99 वोट के साथ पास हो चुका है.

नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में IUML ने दाखिल की याचिका, कहा- ये धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांत को तोड़ता है

सुप्रीम कोर्ट - फाइल फोटो

खास बातें

  • बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका
  • याचिका में कहा गया कि बिल धर्म के आधार पर वर्गीकरण करता है
  • इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दाखिल की याचिका
नई दिल्ली:

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) बुधवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में पक्ष में 125 और विपक्ष में 99 वोट के साथ पास हो चुका है. नागरिकता बिल के खिलाफ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पहली याचिका दाखिल हो चुकी है. यह याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दाखिल किया है. IUML याचिका में बिल को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की. याचिका में कहा गया है कि ये बिल धर्म के आधार पर वर्गीकरण करता है और इससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होता है. CAB, 2019 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के दोहरे परीक्षण को संतुष्ट नहीं करता. CAB का धर्म/देश आधारित वर्गीकरण, स्पष्ट रूप से मनमाना और अनुचित है. इसका प्रत्यक्ष और अपरिहार्य परिणाम यह होगा कि विदेशी ट्रिब्यूनल के समक्ष एनआरसी प्रक्रिया और कार्यवाही विशेष रूप से मुसलमानों के लिए ही होगी और इस तरह से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है. ये धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांत को तोड़ता है और इस तरह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करता है. याचिका में CAB पर अतंरिम रोक लगाने की मांग की गई है. याचिका में ये भी कहा गया है कि केंद्र को आदेश दिया जाए कि इस मामले में आगे की कार्रवाई ना करे. कपिल सिब्बल के पैरवी की उम्मीद है.

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बताते चले कि नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को लेकर असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच संसद ने बुधवार को इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी. राज्यसभा ने बुधवार को विस्तृत चर्चा के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया. सदन ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने के विपक्ष के प्रस्ताव और संशोधनों को खारिज कर दिया.

विधेयक के पक्ष में 125 मत पड़े जबकि 99 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया. विधेयक के संसद में पारित होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत और इसके करुणा तथा भाईचारे के मूल्यों के लिए ऐतिहासिक दिन करार दिया. उन्होंने ट्वीट किया कि विधेयक ‘‘वर्षों तक पीड़ा झेलने वाले अनेक लोगों के कष्टों को दूर करेगा.' मोदी ने राज्यसभा में विधेयक का समर्थन करने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया. गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि नागरिकता संशोधन विधेयक पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है तथा इसमें ‘‘किसी की नागरिकता लेने नहीं, देने'' का प्रावधान है इसलिए देश के मुस्लिम नागरिकों को इससे डरने की जरूरत नहीं है.

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कैब को संसद द्वारा मंजूरी प्रदान किए जाने के बीच इसे लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर असम के गुवाहाटी में बुधवार को अनिश्चिकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया जबकि त्रिपुरा में असम राइफल्स के जवानों को तैनात कर दिया गया है. पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों से भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन की खबरें है, लेकिन राज्यसभा में विस्तृत चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया. 

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