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Exclusive: जब CJI रंजन गोगोई से पूछा गया आपको गुस्सा क्यों आता है? तो बोले- नेता नहीं हूं जो मुस्कुराता रहूं

एनडीटीवी से बातचीत के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने न्यायपालिका से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपना राय रखी. उन्होंने कहा कि आजकल एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है कि पक्ष में फैसला न आने पर जजों पर निशाना साधा जा रहा है.

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खास बातें

  1. एनडीटीवी की CJI से एक्सक्लूसिव बातचीत
  2. न्यायपालिका से जुड़े सवालों के दिए जवाब
  3. कहा- नेता नहीं जो मुस्कुराता रहूं
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi)से एनडीटीवी ने एक्सक्लूसिव बातचीत की. बातचीत के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने न्यायपालिका से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपना राय रखी. उन्होंने कहा कि आजकल एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है कि पक्ष में फैसला न आने पर जजों पर निशाना साधा जा रहा है. यह सही नहीं है, इस वजह से युवा जज नहीं बन रहे हैं. क्योंकि लोग आजकल कोर्ट के फैसलों को लेकर जजों को कीचड़ उछाल रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के फैसले बदले जाने पर भी अपने विचार रखे, उन्होंने कहा कि यह कोई नया नहीं है. पहले भी ऐसा हो चुका है. 

इस बातचीत के दौरान ही सीजेआई रंजन गोगोई से पूछा गया कि आपको गुस्सा क्यों आता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'मैं कोई नेता या डिप्लोमेट नहीं हूं, जो मुस्कुराता रहूंगा. मुझे सबको खुश करने की कोई जरूरत नहीं है. मैं वही करता हूं जो मुझे सही लगता है. मैं गलत हो सकता हूं. लेकिन अगर कोई बकवास करता है तो मुझे क्या करना चाहिए?'


NDTV की CJI रंजन गोगोई से एक्सक्लूसिव बातचीत: पक्ष में फैसला न आने पर जजों को बनाया जाता है निशाना

बता दें, कई मामलों की सुनवाई के दौरान सीजेआई के गुस्से का कई लोगों को सामना करना पड़ा है. हालही कोर्ट की अवमानना के केस में सीजेआई की बेंच ने सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को अनोखी सजा सुनाई थी. कोर्ट ने नागेश्वर राव और एक अन्य अधिकारी को कोर्ट चलने तक एक कोने में बैठे रहने की सजा सुनाई थी. यह मामला बिहार शेल्टर होम केस से जुड़ा हुआ था. सीबीआई ने बिहार शेल्टर होम केस के जांच अधिकारी का तबादला कर दिया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बिना उन्हें बताए इस मामले के जांच अधिकारी का तबादला नहीं किया जाएगा.

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एनडीटीवी से बात करते हुए साथ ही सीजेआई ने कहा कि जजों पर किचड़ उछालने की वजह से हम युवाओं को न्यायपालिका में आने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आप फैसलों की आलोचना करते हैं. कानूनी खामियों की ओर इशारा करते हैं. लेकिन जजों पर हमला करना और अपने मकसद के लिए उन्हें निशाना बनाना परेशानी वाली बात है. पक्ष में फैसला न आने पर जजों को निशाना बनाया जाता है. जजों पर कीचड उछालने की वजह से युवा न्यायपालिका में नहीं आ रहे हैं, वो कहते हैं कि हम अच्छी कमाई कर रहे हैं. हमें जज क्यों बनना चाहिए, ताकि लोग कीचड़ उछाले? अगर आप जजों पर कीचड़ उछालते रहेंगे तो अच्छे लोग नहीं आएंगे. कुछ युवा जज पश्चाताप कर रहे हैं कि उन्होंने इस पेशे को क्यों चुना?

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