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CAG रिपोर्ट में खुलासा : इंसानों के खाने लायक नहीं रेलवे का खाना, ट्रेनों में तिलचट्टे और चूहे मिले

चलती ट्रेनों में पैंट्री साफ-सुथरी होनी चाहिए, मगर आम तौर पर होती नहीं. देश के 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों की जांच के बाद ये नतीजा सीएजी ने निकाला है.

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CAG रिपोर्ट में खुलासा : इंसानों के खाने लायक नहीं रेलवे का खाना, ट्रेनों में तिलचट्टे और चूहे मिले

संसद में पेश सीएजी की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रनों में कई जगहों पर खाना ख़राब मिला...(फाइल फोटो)

खास बातें

  1. 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों की जांच के बाद सीएजी ने नतीजा निकाला.
  2. ट्रेनों में साफ-सफाई का बिलकुल ध्यान नहीं रखा जाता.
  3. कई जगह मक्खी और धूल से बचाने के लिए खाना ढंका हुआ भी नहीं मिला.
नई दिल्ली: ट्रेनों में सफर करते हुए पैंट्री कार से मंगाकर जो खाना आप खाते हैं, वो कहीं-कहीं तो इंसान के खाने लायक नहीं है. कई जगहों पर वो गंदे पानी से पकाया जाता है और दूषित होता है. ये बात सीएजी की जांच में सामने आई है.

चलती ट्रेनों में पैंट्री साफ-सुथरी होनी चाहिए, मगर आम तौर पर होती नहीं. देश के 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों की जांच के बाद ये नतीजा सीएजी ने निकाला है. संसद में पेश उसकी बिल्कुल ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि खाना कई जगहों पर ख़राब मिला; सामान आदमी के खाने लायक नहीं थे; खाने का सामान भी दूषित मिला; कहीं-कहीं एक्सपायरी के बाद का सामान मिला; यही नहीं, नलके के गंदे पानी का खाना पकाने में इस्तेमाल हुआ. मक्खी और धूल से बचाने के लिए खाना ढंका हुआ भी नहीं मिला और ट्रेनों में तिलचट्टे और चूहे मिले.

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आम लोगों का अनुभव भी यही है. बरसों से परिवार के साथ सफर करने वाले प्रेम कहते हैं, खाना महंगा होता जा रहा है...क्वालिटी गिरती जा रही है. प्रेम कहते हैं, "पहले 20 रुपये में ट्रेन में खाना मिलता था. अब 100 रुपये से ज़्यादा की थाली मिलती है...एक तरफ खाना महंगा होता जा रहा है, जबकि खाने का स्वाद खराब होता जा रहा है".

उनकी पत्नी सिंदूर कहती हैं कि अब वो परिवार का खाना घर से बनाकर ले जाती हैं, क्योंकि बच्चों को ट्रेन का खाना खिलाना मुश्किल हो गया है. उनकी बेटी प्रियंका कहती हैं कि ट्रेन में जो खाना मिलता है वो बच्चों के लिए बहुत खराब होता है...उसमें प्रोटीन कन्टेन्ट भी कम होता है". 

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इसी प्लेटफॉर्म पर हमें बिनोद मिले जो बिहार से हैं और दिल्ली में मज़दूरी करते हैं. बिनोद कहते हैं कि ट्रेन में जो खाना सप्लाई होता है वो सही नहीं होता है...इसलिए वो अब या तो घर से खाना बनाकर यात्रा करते हैं या फिर होटल से पैक करा लेते हैं.

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रेल मंत्री बनने के बाद से ही सुरेश प्रभु चलती ट्रेनों में कैटरिंग की व्यवस्था में सुधार होने का दावा करते रहे हैं...लेकिन CAG की इस रिपोर्ट ने रेल मंत्री के दावों की पोल खोल दी है...अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन CAG की तरफ से उठाए गये सवालों से कैसे निपटती है.

गौरतलब है कि भारतीय रेलवे दुनिया में चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. भारतीय रेल के पास 70,000 से अधिक पैसेंजर कोच और 11,000 से अधिक इंजन है. 2015-16 के आंकड़े के अनुसार 13, 313 पैसेंजर ट्रेन हर दिन लगभग 7, 000 स्टेशनों के बीच पटरी पर दौड़ती है, जिनमें लगभग 2 करोड़ 20 लाख लोग सफर करते हैं. लेकिन इस रिपोर्ट के बाद हम और आप ट्रेन का खाना खाने से पहले एक बार जरूर सोचेंगे.


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