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नाराज वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस हाई कमान पर बोला हमला, कहा - कामकाज का तरीका बदलें

इस हफ्ते की शुरुआत में वीरभद्र ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से दिल्ली में बुलाई गई बैठक में हिस्सा भी नहीं लिया था.

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नाराज वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस हाई कमान पर बोला हमला, कहा - कामकाज का तरीका बदलें

पार्टी सूत्रों का कहना है कि सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं...

खास बातें

  1. हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं
  2. अंदरूनी गुटबाजी और सत्ता विरोधी रुझान से जूझ रही कांग्रेस
  3. वीरभद्र की इस मांग से कांग्रेस आलाकमान पसोपेश में है
नई दिल्ली:

हिमाचल प्रदेश के नाराज मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने रविवार को कांग्रेस हाईकमान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी अपनी पूर्व की नीतियों से 'अलग दिशा की ओर बढ़ रही है' और 'मनमाफिक तरीके से चयन' करने का तरीका इसकी अच्छी संस्कृति का खात्मा कर देगा. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व के सोचने और कामकाज के तरीके में बदलाव लाने की जरूरत है क्योंकि कांग्रेस कई 'कारोबारियों की पार्टी' नहीं है बल्कि यह उन लोगों से संबंधित है जिन्होंने देश की 'आजादी के लिये अपना जीवन कुर्बान किया.' सिंह कुल्लू जिला के निरमंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बोल रहे थे.

दरअसल, बिहार, गुजरात के बाद हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस बगावत झेल रही है. हिमाचल प्रदेश इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लेकिन राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस को अंदरूनी गुटबाजी और सत्ता विरोधी रुझान से जूझना पड़ रहा है. मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू को पद से हटाए जाने की मांग कर रहे हैं. वीरभद्र की इस मांग से कांग्रेस आलाकमान पसोपेश में है और मुख्यमंत्री को मनाने की पुरजोर कोशिशें कर रहा है. गौरतलब है कि वीरभद्र ने इस पर्वतीय राज्य में कई दशकों से पार्टी की अगुवाई की है.

पिछले हफ्ते कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वीरभद्र को बुलाकर उनसे लंबी बातचीत की थी. उस वक्त लगा था कि वीरभद्र को राजी कर लिया गया और मसला सुलझ चुका है, लेकिन तभी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के हिमाचल मामलों के प्रभारी महासचिव सुशील कुमार शिंदे ने सुक्खू को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने से इनकार कर दिया.


चंबा में जिला स्तर के नेताओं से मिलने के लिए चार दिन के दौरे पर आए शिंदे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, "पार्टी नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा." वीरभद्र ने कहा है कि वह न तो विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और न ही सुक्खू के साथ प्रचार की अगुवाई करेंगे.

कांग्रेस के कद्दावर नेता वीरभद्र ने पहले राजनीति छोड़ने की धमकी दी थी और हाल की एक बैठक में पार्टी के विधायकों को बताया कि वह सुक्खू के साथ काम नहीं कर पाएंगे और यदि सुक्खू पद पर बने रहेंगे तो वह चुनावों से अपने कदम पीछे खींच लेंगे. शिंदे की ओर से कड़ा रुख अपनाने के बाद अब यह देखना है कि मुख्यमंत्री क्या प्रतिक्रिया जाहिर करते हैं. इस हफ्ते की शुरुआत में वीरभद्र ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से दिल्ली में बुलाई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि बैठक से पहले ही उन्हें इस बात की भनक लग गई थी कि राहुल सुक्खू को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के पक्ष में नहीं हैं.

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस वीरभद्र को मनाने के लिए 'समझौते के फार्मूले' पर अमल कर उन्हें चुनावों में साथ लाना चाहती है. पार्टी आलाकमान का मानना है कि चुनाव बेहद नजदीक होने के कारण यह सुक्खू को हटाने का सही समय नहीं है. राहुल के समर्थन से सुक्खू प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बने हुए हैं. हालांकि, बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया को सुक्खू को पद से हटाने में परहेज नहीं है.

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान वीरभद्र ने तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर को पद से हटाने की मांग की थी. उस वक्त भी वीरभद्र ने धमकी दी थी कि यदि ठाकुर को पद से नहीं हटाया गया तो वह पार्टी छोड़ देंगे. बाद में ठाकुर खुद ही पद से हट गए थे.

पढ़ें: रूठे-रूठे वीरभद्र मनाएं कैसे, प्रदेश अध्यक्ष को लेकर नाराज 'राजा' ने दिल्ली में डाला डेरा

हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार सुक्खू प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं. इसी उलझन में फंसे कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि वीरभद्र अपनी जिद पर कायम रहते हैं तो पार्टी के पास ज्यादा विकल्प नहीं रह जाते हैं. गुटबाजी के बारे में पूछे जाने पर सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री से उन्हें कोई समस्या नहीं है और वह पार्टी के हितों के लिए काम कर रहे हैं.

बहरहाल, मुख्यमंत्री वीरभद्र ने हिमाचल प्रदेश में हाल में हुई कांग्रेस विधायक दल की एक बैठक में कहा कि वह 'अपमानित नहीं होते रहेंगे' और किसी के 'मातहत' चुनाव में नहीं जाएंगे.

VIDEO : हिमाचल और बिहार में कांग्रेस में बगावत?

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कांग्रेस आलाकमान नहीं चाहता कि गुजरात जैसे हालात हिमाचल में भी पैदा हो जाएं. गुजरात में कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे शंकरसिंह वाघेला ने ऐसे समय में कांग्रेस छोड़ दी जब अगले कुछ ही महीनों में वहां चुनाव होने वाले हैं. वाघेला दो दशक से अधिक समय से कांग्रेस में थे. उनके साथ कुछ विधायकों ने भी कांग्रेस छोड़ दी थी.
(इनपुट भाषा से भी)

 



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