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Exclusive: क्या BJP ने चुनाव आयोग में बैकडेट में जमा की चंदे वाली कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट ?

चुनाव आयोग में जमा हुई बीजेपी(BJP) की चंदे से जुड़ी कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट पर कुछ सवाल खड़े हुए हैं. आरटीआई से कई मामले उजागर कर चुके अजय दुबे ने की है आयोग में शिकायत.

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Exclusive: क्या  BJP ने चुनाव आयोग में बैकडेट में जमा की चंदे वाली कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट ?

प्रतीकात्मक तस्वीर.

खास बातें

  1. चुनाव आयोग में जमा बीजेपी की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट पर खड़े हुए सवाल
  2. आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत के बाद वेबसाइट पर आई रिपोर्ट
  3. वेबसाइट पर फाइल होने की तारीख और रिपोर्ट पर दर्ज तारीख में है अंतर
नई दिल्ली: चुनाव आयोग (Election Commission) में हाल में जमा हुई बीजेपी(BJP)  की चंदे से जुड़ी कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट सवालों के घेरे में आ गई है. दूसरे दलों की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट से तुलना करने पर बीजेपी की रिपोर्ट में कई भिन्नताएं नजर आतीं हैं. यहां तक कि बीजेपी की पिछले साल की रिपोर्ट से तुलना करने पर भी नई रिपोर्ट में अलग प्रक्रिया नजर आती है. 31 अक्टूबर 2018 की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद एक नवंबर 2018 तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर बीजेपी की रिपोर्ट उपलब्ध ही नहीं थी. मगर 18 नवंबर को हुई एक शिकायत के बाद अचानक 19 नवंबर को आयोग की वेबसाइट में कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट का लिंक ठप हो जाता है, फिर 20 नवंबर को कुछ ही समय बाद वेबसाइट पर बीजेपी की रिपोर्ट नजर आने लगती है. इस रिपोर्ट को खोल कर देखने पर पता चलता है कि इस पर 31 अक्टूबर की तिथि दर्ज है. यानी आयोग की वेबसाइट पर भले ही बीजेपी की रिपोर्ट 20 नवंबर को अपलोड हुई, मगर उस पर तारीख तय समय-सीमा यानी 31 अक्टूबर की दर्ज रही. इस मामले को उठाने वाले भोपाल के आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने एनडीटीवी से बाचतीत में कहा कि ऐसा लगता है कि देरी से रिपोर्ट जमा करने पर कहीं टैक्स छूट से हाथ न धोना पड़े, इसके लिए बीजेपी की रिपोर्ट बैकडेट में जमा हुई और आयोग के स्तर  से जरूरी पारदर्शिता नहीं दिख रही है. क्या आयोग बीजेपी को इस मामले में ढील दे रहा है ?
 
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20 नवंबर को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड हुई बीजेपी की 31 अक्टूबर 2018 डेट की रिपोर्ट पर R & I सेक्शन की नहीं लगी है मुहर. सिर्फ डीजी एक्सपेंडिचर की मुहर और साइन है. 



 दरअसल, नियम है कि अगर राजनीतिक दल समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल नहीं करते तो उन्हें चंदे पर टैक्स छूट का लाभ नहीं मिल सकता.  स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि कवरिंग लेटर पर 31 अक्टूबर की डेट वाली बीजेपी की रिपोर्ट अपलोड होने की तिथि वेबसाइट पर मंगलवार यानी 20 नवंबर है. दरअसल, राजनीतिक दलों को वर्ष में एक बार इनकम टैक्स रिटर्न के साथ 20 हजार या अधिक चंदा देने वाले लोगों के नाम और पते के बारे में जानकारी वाली कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट देनी होती है. यदि वह रिपोर्ट सबमिट करने में पार्टी फेल होती है तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उन्हें चंदे पर टैक्स की छूट नहीं दे सकता. ऐसा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में स्पष्ट प्रावधान है.
  
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चुनाव आयोग की वेबसाइट eci.gov.in पर एक नवंबर 2018 तक बीजेपी की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी, फाइलिंग डेट के आगे कुछ नहीं लिखा है.


 
क्या बीजेपी के लिए दूसरी व्यवस्था हुई ?
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की वर्ष 2015-16 से लेकर 2017-18 तक की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट उपलब्ध है. बीजेपी की 2016-17 और हालिया 2017-18 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट और कांग्रेस सहित दूसरे दलों की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट का अध्ययन करने पर कई भिन्नताएं नजर आतीं हैं. ऐसा लगता है कि बाकी राजनीतिक दलों की तुलना में बीजेपी की रिपोर्ट जमा करने में अलग प्रक्रिया अपनाई गई. मसलन, जब कोई राजनीतिक दल कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट चुनाव आयोग में जमा करता है तो पहले  R & I सेक्शन( रिसेप्शन सेक्शन) पर विवरण दर्ज होता है. यहां रिपोर्ट की कवरिंग पर डेट और डायरी नंबर दर्ज होता है और फिर सेक्शन की एक गोल आकृति की यानी राउंड मुहर लगती है.  इसके बाद कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट को पोलिटिकल पार्टीज एक्सपेंडिचर मानीटरिंग सेक्शन(PPEMS)को भेज दिया जाता है. फिर PPEMS सेक्शन भी डेट और डायरी नंबर इसके कवरिंग लेटर पर दर्ज कर अपना मुहर यानी ठप्पा मारता है. सभी राजनीतिक दलों की रिपोर्ट पर एकसमान रूप से इस प्रक्रिया का पालन होता है. सुबूत के तौर पर आयोग की वेबसाइट पर किसी भी दल की रिपोर्ट डाउनलोड कर देखी जा सकती है. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर वर्ष 2017-18 के लिए उपलब्ध  छह राष्ट्रीय दलों और 20 से ज्यादा राज्यों के दलों की रिपोर्ट इसी प्रक्रिया से गुजरी है. मगर बीजेपी की रिपोर्ट देखने पर लगता है कि इसके लिए अलग चैनल फॉलो किया गया है. बीजेपी की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट के कवरिंग लेट पर सिर्फ PPEMS सेक्शन यानी डीजी एक्सपेंडिचर की मुहर तो लगी है, मगर शुरुआती प्रक्रिया यानी रिसेप्शन सेक्शन(  R & I)की न एंट्री दर्ज है और न ही गोल मुहर लगी है. 
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देखिए चुनाव आयोग की वेबसाइट बता रही कि बीजेपी की रिपोर्ट ट्यूजडे(मंगलवार) को सबमिट हुई. इस दिन 20 नवंबर था.



क्या शिकायत के बाद अपलोड हुई रिपोर्ट ?

दरअसल, 18 नवंबर 2018 को आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने चुनाव आयोग और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड( CBDT) को ईमेल से बीजेपी सहित 30 अन्य क्षेत्रीय दलों के खिलाफ शिकायत भेजी थी. इसके एक दिन बाद भोपाल पहुंचे चुनाव आयुक्त ओपी रावत से व्यक्तिगत मुलाकात कर भी दुबे ने पांच पन्ने की शिकायत सौंपी. दुबे ने शिकायती पत्र में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा कि एक नवंबर 2018 तक के अपडेट्स के मुताबिक बीजेपी और 30 अन्य राजनीतिक दल निर्धारित समय-सीमा में कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट( CR) जमा करने में फेल साबित हुए हैं. लिहाजा इस गंभीर मामले में त्वरित एक्शन लिया जाए. उन्होंने कहा था कि समय से रिपोर्ट फाइल न करना,   जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के सेक्शन 29 सी(3) (4) और चुनाव आचार संहिता 1961 के नियम 85 का खुला उल्लंघन है. इस  स्थिति में नियमानुसार बीजेपी सहित अन्य 30 क्षेत्रीय दलों को चंदे पर मिलने वाली टैक्स छूट रद्द कर 2017-18 में अर्जित चंदे और कमाई पर टैक्स वसूला जाए. इसके लिए आयोग बीजेपी पर एक्शन के लिए सीबीडीटी से सिफारिश करे. 



आरटीआइ ऐक्टिविस्ट अजय दुबे कहते हैं कि उनकी शिकायत के बाद इस केस में  हैरानी भरे अपडेट्स हुए.  19 नवंबर, 2018 को  वेबसाइट पर कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट का लिंक डिसेबल्ड( disabled) हो गया. इस बीच 20 नवंबर को बीजेपी की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड हो गई. मगर बीजेपी की रिपोर्ट का अध्ययन करने पर तीन प्रमुख सवाल खडे़ हुए. 

1- बीजेपी की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट के कवरिंग पेज पर तारीख 31 अक्टूबर 2018 अंकित है, जबकि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर इस रिपोर्ट को 27 जुलाई 2018 को फाइल किया जाना बताया जा रहा है. जब रिपोर्ट पर 31 अक्टूबर का जिक्र है तो फिर इसे 27 जुलाई को कैसे आयोग में फाइल कर दिया गया. देखें स्क्रीनशॉट.
 
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चुनाव आयोग की वेबसाइट बता रही है कि बीजेपी की वर्ष 2017-18 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट 27 जुलाई 2018 को फाइल हुई, जबकि कवरिंग पेज पर 31 अक्टूबर की डेट दर्ज है.

 
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कम्युनिस्ट पार्टी और बीजेपी की रिपोर्ट में देखिए अंतर.



2- बीजेपी की वर्ष 2017-18 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट पर चुनाव आयोग के  R & I सेक्शन की न मुहर लगी है और न ही डायरी नंबर का जिक्र है और न ही तिथि और समय का. जबकि इस सेक्शन का गोल ठप्पा( मुहर) हर राजनीतिक दल की रिपोर्ट पर लगता है. यहां तक कि 2017 में बीजेपी की रिपोर्ट पर भी R & I सेक्शन की रिपोर्ट लग चुकी है. बीजेपी की रिपोर्ट पर सिर्फ  DG Expenditure के सेक्शन की मुहर और डेट तथा डायरी नंबर का जिक्र है. सवाल उठता है कि क्या बीजेपी की रिपोर्ट जमा करने में  R & I सेक्शन को बाईपास कर सीधे फाइल पोलिटिकल पार्टीज एक्सपेंडिचर मानीटरिंग सेक्शन(PPEMS) को भेज दी गई ? अगर बीजेपी की रिपोर्ट इस चैनल से गुजरी तो फिर बाकी राजनीतिक दलों की रिपोर्ट दो चैनल से कैसे गुजरी ? क्या बीजेपी की रिपोर्ट आनन-फानन में जमा हुई ? अजय दुबे के मुताबिक, ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं.
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बीजेपी की वर्ष 2016-17 की पुरानी कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट देखिए, जिसमें मानक पूरे हैं और R & I सेक्शन और एक्सपेंडिचर सेक्शन दोनों की भी लगी है मुहर, मगर 2017-18 की रिपोर्ट में ऐसा नहीं हुआ.



3-बीजेपी की इस रिपोर्ट में कंपनियों से धनराशि पाने का जिक्र तो है मगर कंपनी एक्ट की धारा 182 के तहत कंपनियों की ओर से अनिवार्य प्रमाण-पत्र सबमिट नहीं किया गया है. 

दलों को चंदे पर मिलती है सशर्त छूट 
राजनीतिक दलों के चंदे पर टैक्स नहीं लगता, मगर यह छूट कुछ शर्तों के साथ मिलती है. समय-सीमा के भीतर कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट और इनकम टैक्स रिटर्न चुनाव आयोग को उपलब्ध कराने पर ही राजनीति दलों को इस छूट का लाभ मिल सकता है. 24 फरवरी 2014 को चुनाव आयोग की ओर से सीबीडीटी चेयरमैन को लिखे पत्र में भी यह बात साफ की गई थी. उस पत्र में कहा गया था,' जनप्रतिनिधित्व एक्ट, 1951 के सेक्शन 29 C के सब-सेक्शन 3 और 4 के तहत पंजीकृत वही दल टैक्स छूट पाने के हकदार हैं, जो फॉर्म 24 A के फार्मेट पर अपनी योगदान रिपोर्ट(CR) समय-सीमा के भीतर देंगे."  चुनाव आचार संहिता, 1961 के नियम 85 B के तहत राजनीतिक दलों को समय-सीमा के भीतर रिटर्न भी भरना जरूरी है.

27 अगस्त 2018 को दिल्ली में राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक में भी चुनाव आयोग ने इस बाबत हिदायत दी थी कि बिना रिटर्न भरे और कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट जमा करने पर टैक्स छूट नहीं मिल सकती. फिर भी आयोग की ओर से तय समय-सीमा 31 अक्टूबर 2018 के भीतर बीजेपी सहित 30 अन्य क्षेत्रीय दलों ने कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट जमा नहीं की थी. हालांकि, बाद में 20 नवंबर को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अचानक से बीजेपी की रिपोर्ट अपलोड हुई. 

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 बीजेपी को मिले चंदे का ब्यौरा
आरटीआई के जरिए अब तक कई मामले उजागर कर चुके अजय दुबे कहते हैं कि समय-सीमा के भीतर कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट जमा करने में फेल साबित होने पर आयोग को कार्रवाई करनी चाहिए थी.  इस स्थिति में आयकर विभाग को बीजेपी सहित सभी 30 दलों को नोटिस जारी कर एक्शन लेते हुए वर्ष 2017-18 में जुटाए गए चंदे पर टैक्स लगाना चाहिए. वर्ष 2016-17 में बीजेपी ने अपनी वार्षिक आडिट रिपोर्ट में  7,10,05,78,051 रु. (710 करोड़ से अधिक) चंदे और आय की रकम घोषित की थी. 20 नवंबर को आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध बीजेपी की  कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट में करीब 400 करोड़ रुपये चंदे का जिक्र है. बताया जा रहा है कि वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट आने तक यह धनराशि दोगुनी हो सकती है. अगर नियमों के उल्लंघन पर बीजेपी को मिलने वाला टैक्स छूट खत्म हुआ तो उन्हें कुल आय का करीब 30 प्रतिशत टैक्स चुकाना पड़ेगा. इस प्रकार सिर्फ बीजेपी को ही सौ से दो सौ करोड़ का टैक्स जमा करना पड़ जाएगा.अजय दुबे कहते हैं कि आयोग के रुख को देखते हुए लग रहा है कि वह कार्रवाई की जगह बीजेपी जैसे दल को बचाने की कोशिश में है.
 
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आरटीआई कार्यकर्ता अजय दूबे की ओर से चुनाव आयोग को 18 नवंबर को भेजी गई इस शिकायत के बाद बीजेपी की रिपोर्ट आयोग की वेबसाइट https://eci.gov.in पर अपलोड हुई. 




 


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