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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर 45 हजार करोड़ रुपये के दूरसंचार घोटाले का लगाया आरोप

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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर 45 हजार करोड़ रुपये के दूरसंचार घोटाले का लगाया आरोप

प्रतीकात्‍मक फोटो

खास बातें

  1. कांग्रेस का आरोप-सरकार ने छह कंपनियों के हितों की सुरक्षा की
  2. इनकी मदद सरकार को शुल्क के भुगतान करने से बचा कर की
  3. सरकारी राजकोष को नुकसान की पुष्टि कैग की ओर से हुई है
नई दिल्‍ली:

कांग्रेस ने 45 हजार करोड़ रुपये के दूरसंचार घोटाले का आरोप लगाते हुए गुरुवार को कहा कि मोदी सरकार ने छह दूरसंचार कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाये, जिन पर राजकोष का धन बकाया था। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला, शक्ति सिंह गोहिल और आर पी एन सिंह ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''ताजा दूरसंचार घोटाला करीब 45 हजार करोड़ रुपये का है और यह मोदी सरकार की ओर से दबाया गया।''

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छह दूरसंचार कंपनियों के हितों की सुरक्षा के लिए कदम उठाया और इनकी मदद सरकार को शुल्क के भुगतान करने से बचा कर की। साथ ही दावा किया कि यह स्पष्ट मामला है और सरकारी राजकोष को नुकसान की पुष्टि कैग की ओर से हुई है जिसका एकमात्र उदेश्य सांठगांठ वाले पूंजीपतियों की सहायता करना है।
सुरजेवाला ने जिन दूरसंचार कंपनियों का नाम बताया उनमें भारती, एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस, आइडिया, टाटा, एयरसेल शामिल हैं।

सरकार ने आरोपों को खारिज किया
सरकार ने कांग्रेस पार्टी के आरोप को खारिज करते हुए गुरुवार रात कहा कि छह दूरसंचार कंपनियों द्वारा अपनी कमाई को घटाकर बताए जाने संबंधी कैग रिपोर्ट 2006-07 से 2009-10 तक संप्रग सरकार के समय की है। सरकार ने कहा है कि उसने भारती, आरकाम व वोडाफोन जैसी कंपनियों से धन की वसूली की प्रक्रिया शुरू की है।


दूरसंचार विभाग ने इस बारे में एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, ''छह दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा अपने कारोबार को घटाकर बताने संबंधी कैग की रिपोर्ट फरवरी 2016 में प्राप्त हुई। यह रिपोर्ट 2006-07 से 2009-10 तक चार साल से जुड़ी है जो कि इस सरकार के कार्यकाल से पहले की है।'' इसके अनुसार इस रिपोर्ट में लाइसेंस शुल्क व स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क मद में 5000 करोड़ रुपये जबकि ब्याज मद में 7000 करोड़ रुपये की कमी को रेखांकित किया गया है। उक्त छह दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों में भारती एयरटेल, वोडाफोन, एयरसेल, रिलायंस कम्युनिकेशंस, टाटा टेली व आइडिया हैं।

बयान में कहा गया है, ''कैग द्वारा जांचे गए प्रमुख दस्तावेज विभाग को जून 2016 में मिले। इनकी कड़ाई से जांच की जा रही है और 22 लाइसेंस सेवा क्षेत्रों में छह कंपनियों को चार वित्त वर्ष के लिए मांग (डिमांड) नोटिस जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है।'' विभाग ने कहा है कि इस प्रक्रिया से सामने आई मांग को लाइसेंस शर्तों के हिसाब से ही ब्याज व जुर्माने सहित वसूला जाएगा।

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बयान के अनुसार, 'इस तरह से सरकार को किसी तरह का राजस्व नुकसान नहीं हुआ है।' विभाग ने बयान में कहा,'सरकार चूककर्ता कंपनी से पूरी राशि मय ब्याज व जुर्माने के कम से कम समय में वसूलने को प्रतिबद्ध है।'

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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