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गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने पर कांग्रेस भड़की, अमित शाह के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, गांधी परिवार के सदस्यों से SPG कवर हटाया गया. उन्हें अब CRPF की ज़ेड-प्लस सुरक्षा दी जाएगी.

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गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने पर कांग्रेस भड़की, अमित शाह के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

खास बातें

  1. आरोप- सरकार सोनिया, राहुल और प्रियंका के जीवन से खिलवाड़ कर रही
  2. गांधी परिवार को एसपीजी की जगह जेड प्लस सुरक्षा दी जाएगी
  3. हाल ही में सरकार ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सुरक्षा हटाई थी
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा (Gandhi Family SPG Security) हटाने का फैसला किया है. इसके खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया है. नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे (सरकार) सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं.  गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सोनिया गांधी (Sonia Gandhi), राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की एसपीजी सुरक्षा हटाई जाएगी. हालांकि उनको जेड प्लस सुरक्षा दी जाएगी.

जानकारी के मुताबित केंद्र सरकार ने सभी एजेंसियों के इनपुट के आधार पर यह फैसला लिया है. वहीं गांधी परिवार के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गांधी परिवार को अब तक इसकी जानकारी नहीं मिली है. हाल ही में केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा हटाई गई थी. अब पूरे देश में सिर्फ पीएम मोदी के पास ही एसपीजी का सुरक्षा कवच रह जाएगा.

गौरतलब है कि इंदिरा गांधी की उनके सुरक्षा गार्डों द्वारा हत्या करने के बाद प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए साल 1985 में एसपीजी की स्थापना की गई थी. साल 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद एसपीजी एक्ट में संशोधन किया गया और इसमें पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को अगले 10 साल तक एसपीजी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया.


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इन कारणों से सोनिया, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की SPG सुरक्षा हटाई गई

साल 2003 में वाजपेयी सरकार में इस एक्ट में संशोधन किया गया और वह दस साल की सीमा को एक साल कर दिया गया. इसके साथ ही यह भी प्रावधान किया गया कि खतरे को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार सुरक्षा की समय सीमा तय करेगी.



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